
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध को लेकर राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। INDI गठबंधन के नेताओं और सांसदों के जंतर-मंतर की ओर मार्च के बाद अब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर लागू नियमों को एक बार फिर स्पष्ट किया है।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, नई दिल्ली जिले में किसी भी तरह का धरना, प्रदर्शन या मार्च आयोजित करने के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी है। पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए संबंधित आयोजकों को कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना होता है।
इसके अलावा जंतर-मंतर पर एक समय में अधिकतम 1,000 लोगों के एकत्र होने की अनुमति है। यदि किसी संगठन या राजनीतिक दल को इससे बड़ी संख्या में लोगों के साथ प्रदर्शन करना है तो उसके लिए प्रशासन की ओर से निर्धारित दूसरे स्थानों का इस्तेमाल करना होगा।
पुलिस का यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दल लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
INDI गठबंधन के प्रदर्शन के बाद पुलिस ने दोहराए नियम
पिछले कुछ दिनों से नई दिल्ली जिले में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। INDI गठबंधन के नेताओं ने SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर की तरफ मार्च किया था।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाए। इसके साथ ही विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग भी कर रहा है।
इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना जरूरी समझा कि नई दिल्ली जिले में विरोध प्रदर्शन के लिए पहले से अनुमति लेना अनिवार्य है।
पुलिस के मुताबिक, नियम केवल किसी एक राजनीतिक दल या संगठन पर लागू नहीं होते। कोई भी संगठन यदि नई दिल्ली जिले में प्रदर्शन करना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
10 दिन पहले देनी होगी प्रदर्शन की जानकारी
दिल्ली पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर या नई दिल्ली जिले में धरना अथवा प्रदर्शन करने के इच्छुक आयोजकों को सक्षम अधिकारी के पास पहले से आवेदन देना होगा।
पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन कम से कम 10 दिन पहले देना आवश्यक है। इसका उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था, यातायात और आम लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखना है।
राजधानी दिल्ली में संसद, केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यालय और अन्य संवेदनशील संस्थान मौजूद हैं। ऐसे में बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन को पहले से तैयारी करनी पड़ती है।
यही वजह है कि पुलिस प्रदर्शन के लिए स्थान, लोगों की संख्या और आयोजन की तारीख जैसी बातों को पहले से निर्धारित करने पर जोर दे रही है।
जंतर-मंतर पर 1000 लोगों की सीमा
दिल्ली पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लोगों की संख्या की एक सीमा निर्धारित है। यहां अधिकतम 1,000 लोगों के एकत्र होने की अनुमति है।
यदि किसी राजनीतिक दल या संगठन के प्रदर्शन में इससे ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है तो उसे दूसरे निर्धारित प्रदर्शन स्थल का विकल्प चुनना होगा।
पुलिस का कहना है कि यह व्यवस्था लंबे समय से लागू है और इसका उद्देश्य राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था तथा आम नागरिकों की सुविधा बनाए रखना है।
इसका मतलब यह है कि कोई भी संगठन अपनी इच्छा के मुताबिक हजारों लोगों को लेकर सीधे जंतर-मंतर नहीं पहुंच सकता। बड़े प्रदर्शन के लिए पहले से निर्धारित स्थल और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना होगा।
1 हजार से 50 हजार लोगों के लिए रामलीला मैदान
दिल्ली में अलग-अलग आकार के प्रदर्शनों के लिए अलग-अलग स्थान तय किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, यदि किसी प्रदर्शन में 1,000 से 50,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है तो रामलीला मैदान का इस्तेमाल किया जा सकता है।
वहीं यदि किसी प्रदर्शन में 50 हजार से ज्यादा लोगों के जुटने की संभावना हो तो बुराड़ी मैदान को निर्धारित स्थल के तौर पर इस्तेमाल किया जाना है।
इस व्यवस्था के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि बड़े प्रदर्शनों को ऐसे इलाकों में आयोजित किया जाए जहां भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात को डायवर्ट करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को आसानी हो।
सेंट्रल विस्टा और इंडिया गेट इलाके में प्रदर्शन पर रोक
दिल्ली पुलिस ने कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध की बात भी कही है।
पुलिस के अनुसार सेंट्रल विस्टा क्षेत्र, इंडिया गेट, सी-हेक्सागन, मान सिंह रोड और जनपथ सहित आसपास के लॉन में प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।
इन इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से सुरक्षा और यातायात से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए यहां सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रतिबंध लागू किया गया है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन का ऐलान
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रदर्शन का ऐलान किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ दास ने प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति लेने की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे पुरानी और गैरजरूरी प्रक्रिया बताया।
उनके बयान के बाद दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन की अनुमति से संबंधित नियम मनमाने तरीके से नहीं बनाए गए हैं। पुलिस ने कहा कि ये नियम न्यायिक निर्देशों और उसके स्थायी आदेशों के तहत लागू हैं।
पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि बिना अनुमति प्रदर्शन करने की कोशिश करने वाले किसी भी संगठन के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
बिना अनुमति प्रदर्शन पर पुलिस का सख्त रुख
दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि नई दिल्ली जिले में बिना अनुमति प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति या संगठन कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिछले कुछ दिनों में हुए राजनीतिक प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती तथा बैरिकेडिंग जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
पुलिस का तर्क है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता, राहगीरों और स्थानीय लोगों के अधिकारों का भी ध्यान रखना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले से जुड़ा है नियम
दिल्ली पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन को लेकर लागू व्यवस्था का संबंध जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से है। यह मामला मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ से जुड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना था कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध और अपनी बात रखना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि इस अधिकार के इस्तेमाल के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था और दूसरे नागरिकों के हितों का ध्यान रखना आवश्यक है।
इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान और प्रक्रिया तय की गई है। यानी प्रशासन शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसके तरीके और स्थान को नियंत्रित कर सकता है।
अब 10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर नजर
SIR और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच अब 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। दिल्ली पुलिस पहले ही साफ कर चुकी है कि नई दिल्ली जिले में बिना अनुमति किसी भी तरह के प्रदर्शन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ऐसे में यदि किसी संगठन की ओर से जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की कोशिश होती है तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस ने सभी राजनीतिक दलों और संगठनों को नियमों का पालन करने का संदेश दिया है। दूसरी ओर, विपक्षी दल SIR और चुनाव आयोग से जुड़े अपने मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रखने की तैयारी में हैं।
निष्कर्ष
जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस का रुख फिलहाल काफी स्पष्ट है। प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी है और जंतर-मंतर पर एक समय में अधिकतम 1,000 लोगों को ही एकत्र होने की अनुमति है। बड़े प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान और बुराड़ी मैदान जैसे स्थान निर्धारित हैं।
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच दिल्ली में विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच नियमों को लेकर टकराव से बचने के लिए अनुमति प्रक्रिया का पालन करना अहम होगा।



