
महाराष्ट्र की गोकुल डेयरी में चेयरमैन चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राहुल गांधी ने भाजपा पर चुनाव के बाद नियम बदलकर सत्ता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से डेयरी का घेराव करने की अपील की है। जानिए क्या है पूरा विवाद।
महाराष्ट्र की राजनीति में कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी गोकुल डेयरी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गोकुल डेयरी के चुनाव में हार का सामना करने के बाद भाजपा अब सरकारी नियमों में बदलाव करके सहकारी संस्था पर नियंत्रण हासिल करना चाहती है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार ने चुनावी नतीजे आने के बाद ऐसा फैसला लिया है, जिससे निर्वाचित बोर्ड का गणित बदल सकता है। उन्होंने इसे दूध उत्पादकों के वोटों और लोकतांत्रिक जनादेश के साथ धोखा बताया है।
इस विवाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी कूद पड़े हैं। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले लोगों से गोकुल डेयरी के चेयरमैन चुनाव के दिन एकजुट होकर डेयरी परिसर का घेराव करने की अपील की है। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र सरकार के फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कही है।
गोकुल डेयरी विवाद पर राहुल गांधी ने BJP को घेरा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि गोकुल डेयरी के चुनाव में भाजपा समर्थित पैनल को बहुमत नहीं मिलने के बाद सरकार ने नियम बदलने का रास्ता अपनाया है।
राहुल गांधी के मुताबिक, गोकुल डेयरी के चुनाव में दूध उत्पादकों ने भाजपा के खिलाफ अपना फैसला सुनाया था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार ने सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन बोर्ड में सरकारी नामित निदेशकों को शामिल करने का फैसला कर लिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के जरिए बोर्ड में चार अतिरिक्त निदेशक शामिल करके सदस्यों की संख्या 12 से बढ़ाकर 16 करने की कोशिश की जा रही है। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों के बहुमत पर असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने इसे दूध उत्पादकों के मताधिकार के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि भाजपा सत्ता बचाने के लिए हर जगह अलग-अलग तरीके अपना रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों और दूध उत्पादकों के वोटों के साथ कथित धोखाधड़ी को वे आसानी से नहीं भूलेंगे।
गोकुल डेयरी चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को मिली थी जीत
दरअसल, कोल्हापुर की गोकुल डेयरी महाराष्ट्र की प्रमुख सहकारी दुग्ध संस्थाओं में से एक है। इस संस्था से बड़ी संख्या में दूध उत्पादक और किसान जुड़े हुए हैं। इसका प्रबंधन और चेयरमैन पद स्थानीय राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
19 अक्टूबर को गोकुल डेयरी के संचालक मंडल के लिए चुनाव हुए थे। इन चुनावों में कांग्रेस समर्थित पैनल ने कुल 25 सीटों में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, महायुति समर्थित उम्मीदवारों को 12 सीटें मिली थीं।
इस नतीजे के बाद कांग्रेस समर्थित समूह को बोर्ड में स्पष्ट बढ़त मिल गई थी। विपक्ष का दावा है कि दूध उत्पादकों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके जिस पैनल को चुना, अब सरकारी फैसले के जरिए उसी के बहुमत को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।
हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद भी गोकुल डेयरी के चेयरमैन का चुनाव नहीं हो सका है। इसी वजह से संस्था के भीतर राजनीतिक खींचतान लगातार बढ़ रही है।
पवन खेड़ा ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी महाराष्ट्र सरकार के फैसले को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि गोकुल डेयरी के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को 25 में से 13 सीटें मिली थीं, जबकि महायुति समर्थित समूह 12 सीटों पर सिमट गया था।
पवन खेड़ा के मुताबिक, चुनाव के बाद महायुति समर्थित संचालकों ने चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। उनके अनुपस्थित रहने के कारण बोर्ड की बैठक में जरूरी कोरम पूरा नहीं हो पाया और चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
उन्होंने बताया कि इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए 10 नवंबर को नए सिरे से चेयरमैन का चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
पवन खेड़ा का आरोप है कि निर्वाचित बोर्ड को अपना काम करने देने के बजाय महाराष्ट्र सरकार ने सहकारी संस्थाओं में सरकारी प्रतिनिधियों को नामित करने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया। इन सदस्यों को मतदान का अधिकार दिए जाने से गोकुल डेयरी के बोर्ड में सत्ता का संतुलन बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी सरकार को चुनाव परिणाम आने के बाद केवल इसलिए नियम बदलने का अधिकार होना चाहिए, क्योंकि उसे जनता का फैसला पसंद नहीं आया?
पवन खेड़ा ने यह भी बताया कि विपक्ष इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है, ताकि सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनावी जनादेश की रक्षा की जा सके।
रोहित पवार ने किया गोकुल डेयरी के घेराव का आह्वान
गोकुल डेयरी विवाद में एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से गोकुल डेयरी के बाहर एकजुट होने की अपील की।
रोहित पवार ने कहा कि चेयरमैन चुनाव के दिन लोगों को डेयरी परिसर के बाहर पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए। उनका उद्देश्य यह संदेश देना है कि लोकतांत्रिक तरीके से मिले जनादेश को किसी भी सरकारी फैसले से कमजोर नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि गोकुल डेयरी से जुड़े लगभग 5.5 लाख मतदाताओं ने कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के समर्थन वाले पैनल को अपना समर्थन दिया था। इसके बावजूद सरकार की ओर से नामित सदस्यों को शामिल करके संस्था पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
रोहित पवार ने इस कदम को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गलत बताते हुए कहा कि जनता के फैसले को नजरअंदाज करके सरकारी प्रतिनिधियों के जरिए सत्ता का समीकरण बदलना उचित नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं तो इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करें। उनके मुताबिक, गोकुल डेयरी का मामला केवल कोल्हापुर या सतेज पाटिल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़ा सवाल है।
रोहित पवार ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- यह अराजकता पैदा करने वाला फैसला
रोहित पवार ने भाजपा पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा कि चुनाव में मनमुताबिक परिणाम नहीं मिलने के बाद सरकारी व्यवस्था का इस्तेमाल करके राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोल्हापुर में जीत का जश्न जुलूस निकालकर नहीं मना पाने की नाराजगी अब इस तरह के फैसलों के रूप में सामने आ रही है। उनके मुताबिक, सरकार का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था में अविश्वास पैदा कर सकता है।
रोहित पवार ने चेतावनी दी कि अगर आज गोकुल डेयरी में चुनावी जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश होती है, तो कल लोकसभा या विधानसभा चुनावों में हारने के बाद भी इसी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले में महाराष्ट्र के उन सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए, जो लोकतंत्र और संविधान की रक्षा में विश्वास रखते हैं। उन्होंने गोकुल डेयरी के सदस्यों और कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के प्रति समर्थन भी जताया।
गौरतलब है कि सतेज पाटिल की पार्टी कांग्रेस विपक्षी महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है। एनसीपी (शरदचंद्र पवार) भी इसी विपक्षी गठबंधन में शामिल है।
महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी संस्थाओं में सरकारी निदेशक नियुक्त करने का फैसला लिया
गोकुल डेयरी विवाद के बीच महाराष्ट्र कैबिनेट ने बुधवार को सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन मंडलों में सरकारी नामित सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ा प्रस्ताव मंजूर किया।
इस फैसले के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं की प्रबंधन समितियों में पांच सरकारी नामित सदस्य नियुक्त किए जा सकेंगे। हालांकि, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक, इन पांच नामित सदस्यों में से चार को संचालक मंडल की बैठकों में मतदान करने का अधिकार भी मिलेगा। सरकार का यह फैसला ही गोकुल डेयरी विवाद की मुख्य वजह बना हुआ है।
विपक्ष का कहना है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल गोकुल डेयरी में कांग्रेस समर्थित पैनल के बहुमत को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। वहीं, इस फैसले को लेकर सरकार का पक्ष और इसके कानूनी प्रभाव भी महत्वपूर्ण होंगे।
10 नवंबर को होगा गोकुल डेयरी के चेयरमैन का चुनाव
19 अक्टूबर को चुनाव परिणाम घोषित होने के बावजूद गोकुल डेयरी में अभी तक चेयरमैन का चयन नहीं हो पाया है। इसकी मुख्य वजह बोर्ड की बैठकों में महायुति समर्थित संचालकों की अनुपस्थिति बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, चेयरमैन का चुनाव कराने के लिए संचालक मंडल की बैठक में कम से कम 14 सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है। लेकिन महायुति समर्थित सदस्य बैठकों से अनुपस्थित रहे, जिसके कारण जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका।
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए 10 नवंबर को दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया है।
अब इस चुनाव पर पूरे महाराष्ट्र की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। एक तरफ कांग्रेस समर्थित पैनल अपने चुनावी बहुमत के आधार पर चेयरमैन पद पर दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी नामित सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
गोकुल डेयरी विवाद से महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ेगी टकराव की स्थिति?
गोकुल डेयरी का विवाद अब एक सहकारी संस्था के चेयरमैन चुनाव से आगे बढ़कर महाराष्ट्र की राजनीति में लोकतांत्रिक अधिकारों और सरकारी हस्तक्षेप का बड़ा मुद्दा बन गया है।
राहुल गांधी, पवन खेड़ा और रोहित पवार के बयानों से स्पष्ट है कि विपक्ष इस मुद्दे को राज्य सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक सवाल के रूप में उठाने की तैयारी में है।
विपक्ष का मुख्य तर्क है कि जब चुनाव में दूध उत्पादकों ने अपना प्रतिनिधि चुन लिया है, तो बाद में सरकारी नामांकन के जरिए बोर्ड का संतुलन बदलना उनके जनादेश को कमजोर कर सकता है।
दूसरी ओर, इस मामले में सरकारी नामांकन की व्यवस्था की वैधानिकता और उसके वास्तविक प्रभाव का फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल सबकी निगाहें 10 नवंबर को होने वाले गोकुल डेयरी के चेयरमैन चुनाव और विपक्ष की ओर से प्रस्तावित कानूनी चुनौती पर हैं। आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में और अधिक गरमा सकता है।



