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अमित शाह की राहुल गांधी को खुली चुनौती, बोले- घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से हटाकर देश से बाहर करेंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। हरियाणा के करनाल में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रैली में शाह ने साफ कहा कि उनकी पार्टी घुसपैठियों की पहचान करने, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने और उन्हें देश से बाहर भेजने के अपने संकल्प पर कायम है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इस मुद्दे पर संसद में खुली बहस करने की चुनौती भी दी।

अमित शाह ने कहा कि अगर राहुल गांधी को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कोई आपत्ति है, तो उन्हें संसद में आकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को भी तैयार है। शाह ने राहुल गांधी पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक विरोध के नाम पर सदन का बहिष्कार करने का आरोप लगाया।

गृह मंत्री ने अपने भाषण में बचपन का एक कबड्डी का किस्सा सुनाकर विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि चुनाव में हारने के बाद विपक्षी दल संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगते हैं। शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है।

घुसपैठियों के मुद्दे पर अमित शाह का बड़ा बयान

करनाल में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च का नेतृत्व करते हुए अमित शाह ने घुसपैठियों के मुद्दे पर पार्टी का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि भाजपा का संकल्प है कि देश में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जाएगी और उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे।

शाह ने कहा कि इसके बाद ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह घुसपैठियों के समर्थन में जितना चाहें विरोध कर सकते हैं, लेकिन भाजपा अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी।

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाना जरूरी है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव में केवल पात्र मतदाता ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें।

हालांकि, मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष सरकार और भाजपा पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का खतरा है। वहीं, भाजपा इसे चुनावी प्रक्रिया को बेहतर और पारदर्शी बनाने की कवायद बता रही है।

राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती

अमित शाह ने राहुल गांधी को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाने हैं, तो संसद में आकर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार है।

शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी के पास अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य, तर्क और ठोस आधार हैं, तो उन्हें संसद में सरकार के सामने अपनी बात रखनी चाहिए। गृह मंत्री के मुताबिक, संसद में आमने-सामने चर्चा से ही इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वह बहस की मांग तो करते हैं, लेकिन जब जवाब देने का समय आता है तो पीछे हट जाते हैं। शाह ने दावा किया कि सरकार इस विषय पर हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।

गृह मंत्री की यह चुनौती ऐसे समय आई है, जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस के लिए चुनौती दी थी। इसी का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री के साथ चर्चा चाहते हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखना चाहिए। सरकार संसद में SIR पर विशेष चर्चा कराने को तैयार है।

कबड्डी का किस्सा सुनाकर विपक्ष पर साधा निशाना

अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने बचपन का एक किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि जब वह स्कूल में पढ़ते थे, तब कबड्डी खेला करते थे। उनकी सातवीं कक्षा की टीम लगातार मुकाबले जीतती थी और चैंपियन बनती थी।

शाह के मुताबिक, लगातार हार से परेशान नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने एक बैठक की। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनसे छोटी कक्षा की टीम बार-बार कैसे जीत रही है। ऐसे में उन्होंने खेल के रेफरी को ही बेईमान बताने की रणनीति बना ली, ताकि अपनी हार की जिम्मेदारी से बच सकें।

गृह मंत्री ने इस किस्से के जरिए विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव में हारने के बाद कुछ दल चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने इशारों में राहुल गांधी की ओर निशाना साधते हुए कहा कि शायद उन्होंने भी उन विद्यार्थियों वाली रणनीति सीख ली है।

शाह का आरोप था कि विपक्ष चुनावी नतीजों को स्वीकार करने के बजाय निर्वाचन व्यवस्था और संस्थाओं पर सवाल खड़े करता है। उनके इस बयान को मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप

अमित शाह ने अपने भाषण में कांग्रेस और राहुल गांधी पर संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद को ठीक से चलने नहीं देते और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय हंगामा तथा बहिष्कार को राजनीतिक हथियार बनाते हैं।

शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने संसद में विरोध प्रदर्शन और कार्यवाही का बहिष्कार करने को अपनी राजनीतिक संस्कृति बना लिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन संसद में चर्चा और संवाद भी उतने ही जरूरी हैं।

गृह मंत्री ने विपक्ष पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र इतना कमजोर नहीं है कि राजनीतिक विरोध के ऐसे तरीकों से उसे नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि भाजपा संसद से लेकर विधानसभा और गांवों तक विपक्ष को जवाब देने के लिए तैयार है।

शाह ने यह भी कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और जनता को उनके विदेश दौरों के बारे में जानकारी जानने का अधिकार है। उन्होंने राहुल गांधी से उनके विदेशी दौरों को लेकर भी जवाब मांगा।

करनाल में भाजपा ने निकाला ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च

हरियाणा के करनाल में भाजपा की ओर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम से मार्च निकाला गया। इस मार्च का नेतृत्व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री और करनाल के सांसद मनोहर लाल, हरियाणा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता, पार्टी की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी और राज्य सरकार के कई मंत्री भी मार्च में शामिल हुए। भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

मार्च सेक्टर-12 से शुरू होकर दयानंद चौक तक पहुंचा। इस दौरान भाजपा नेताओं ने पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के साथ विपक्ष पर भी निशाना साधा। अमित शाह के भाषण का मुख्य केंद्र घुसपैठियों की पहचान, मतदाता सूची का पुनरीक्षण और राहुल गांधी की ओर से उठाए जा रहे सवाल रहे।

SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष में बढ़ा टकराव

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची में मौजूद गलत प्रविष्टियों और अपात्र नामों को हटाना जरूरी है, ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठा रहा है।

इसी विवाद के बीच 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन INDIA की ओर से ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली आयोजित की गई थी। इस प्रदर्शन में विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की योजना बनाने का आरोप लगाया था।

विपक्ष ने दावा किया था कि SIR के जरिए लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई थी।

चुनावी प्रक्रिया को लेकर सियासी जंग जारी

SIR और चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ भाजपा इसे मतदाता सूची को दुरुस्त करने और चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाने की प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्ष इसे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेर रहा है।

करनाल में अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। गृह मंत्री ने राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती देकर विपक्ष को सीधे जवाब देने का संकेत दिया है।

अब इस राजनीतिक टकराव में आगे क्या रुख सामने आता है, यह संसद में होने वाली संभावित चर्चा और निर्वाचन आयोग की ओर से SIR को लेकर उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल घुसपैठियों की पहचान, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी संस्थाओं की भूमिका देश की राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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