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अरुणाचल जनता पार्टी के गठन पर कांग्रेस का अमित शाह पर हमला, जयराम रमेश ने उठाए सवाल

देश की राजनीति में एक नई पार्टी के गठन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित नई राजनीतिक पार्टी ‘अरुणाचल जनता पार्टी’ के गठन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने इस घटनाक्रम को भाजपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह की भूमिका एक और छोटे राजनीतिक दल के उभार के पीछे हो सकती है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अरुणाचल जनता पार्टी के गठन से संबंधित सार्वजनिक नोटिस साझा किया। इसके साथ उन्होंने दावा किया कि यह कदम अमित शाह की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कांग्रेस नेता ने इस मामले की तुलना पश्चिम बंगाल की नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) से भी की, जिसके कुछ समय पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने साथ जुड़ने का फैसला किया था।

इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश की 734 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की कुल घोषित आय 1,118 करोड़ रुपये से अधिक रही। इस रकम का बड़ा हिस्सा गुजरात, दिल्ली और राजस्थान की पार्टियों के खाते में दर्ज किया गया।

अरुणाचल जनता पार्टी के गठन पर जयराम रमेश ने क्या कहा?

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को X पर एक सार्वजनिक नोटिस साझा करते हुए अरुणाचल जनता पार्टी के गठन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा और उन्हें ‘स्वयंभू चाणक्य’ बताते हुए राजनीतिक तंज कसा।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह कदम ऐसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसके तहत छोटे या कम चर्चित राजनीतिक दलों को राजनीतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी एक अपेक्षाकृत अज्ञात पार्टी को तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के लिए राजनीतिक ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया गया था।

कांग्रेस नेता के इस बयान का सीधा संकेत पश्चिम बंगाल की राजनीति में हुए हालिया घटनाक्रम की ओर था। हालांकि, अमित शाह की भूमिका को लेकर जयराम रमेश ने जो आरोप लगाए हैं, वे उनके राजनीतिक दावे हैं। सार्वजनिक नोटिस में नई पार्टी के गठन और चुनाव आयोग में पंजीकरण की प्रस्तावित प्रक्रिया का उल्लेख है, लेकिन उसमें अमित शाह की भूमिका का कोई विवरण नहीं दिया गया है।

क्या है अरुणाचल जनता पार्टी का सार्वजनिक नोटिस?

साझा किए गए सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, अरुणाचल जनता पार्टी का गठन 16 अक्टूबर 2026 को किया गया है। पार्टी का मुख्य कार्यालय अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर स्थित डोकुम कॉलोनी, आकाशदीप क्षेत्र में बताया गया है। नोटिस में पार्टी की ओर से भारतीय निर्वाचन आयोग में पंजीकरण के लिए आवेदन करने की प्रस्तावित जानकारी दी गई है।

यह आवेदन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत किया जाना है। इस प्रावधान के अंतर्गत राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के पास पंजीकरण कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को पार्टी के प्रस्तावित पंजीकरण पर कोई आपत्ति है, तो वह लिखित रूप में चुनाव आयोग के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए निर्वाचन आयोग के नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन के पते पर 3 दिसंबर 2026 तक आपत्ति भेजने की समयसीमा दी गई है।

इस तरह सार्वजनिक नोटिस का उद्देश्य प्रस्तावित पंजीकरण के बारे में लोगों को जानकारी देना और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर उपलब्ध कराना है। फिलहाल नोटिस में पार्टी के पंजीकरण की प्रक्रिया प्रस्तावित बताई गई है। इसलिए इसे चुनाव आयोग से अंतिम मंजूरी मिल जाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या होती हैं पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां?

इस खबर में जिन 734 राजनीतिक दलों का उल्लेख किया गया है, वे पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां यानी Registered Unrecognised Political Parties (RUPPs) हैं।

भारत में कोई राजनीतिक संगठन चुनाव आयोग के पास निर्धारित नियमों के तहत पंजीकरण कराकर राजनीतिक दल बन सकता है। लेकिन केवल पंजीकरण हो जाने से किसी पार्टी को राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता नहीं मिल जाती। मान्यता प्राप्त करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए वोट प्रतिशत, सीटों और अन्य निर्धारित मानदंडों को पूरा करना होता है।

इसलिए पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां वे राजनीतिक दल होती हैं, जिनका चुनाव आयोग के पास पंजीकरण तो है, लेकिन वे राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों की श्रेणी में नहीं आतीं।

ऐसी पार्टियां भी निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती हैं। हालांकि, उन्हें मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिलने वाली कुछ सुविधाएं और विशेष अधिकार स्वतः उपलब्ध नहीं होते।

734 राजनीतिक दलों की आय 1,118 करोड़ रुपये से अधिक

इस राजनीतिक विवाद के बीच ADR की रिपोर्ट के हवाले से गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की आय से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में देश की कुल 734 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की घोषित आय 1,118.494 करोड़ रुपये रही।

इन आंकड़ों ने राजनीतिक दलों की फंडिंग और उनके वित्तीय प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। खास बात यह है कि इन पार्टियों की कुल आय का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा राज्यों में केंद्रित रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात की 29 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों ने कुल 510.4172 करोड़ रुपये की आय घोषित की। यह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक थी।

दिल्ली इस सूची में दूसरे स्थान पर रही। यहां की 73 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों ने 218.483 करोड़ रुपये की आय दर्ज की। वहीं राजस्थान की 23 पार्टियों की कुल घोषित आय 173.365 करोड़ रुपये बताई गई।

इन तीन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कुल आय को जोड़ने पर यह रकम लगभग 902.27 करोड़ रुपये होती है। यानी देशभर की इन 734 पार्टियों की घोषित कुल आय का करीब 80.67 प्रतिशत हिस्सा गुजरात, दिल्ली और राजस्थान से आया।

गुजरात की 29 पार्टियों के पास सबसे ज्यादा आय

ADR रिपोर्ट के आंकड़ों में गुजरात की स्थिति सबसे अधिक चर्चा में है। यहां केवल 29 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों ने 510 करोड़ रुपये से अधिक की आय घोषित की है।

दिल्ली में इन पार्टियों की संख्या गुजरात से कहीं ज्यादा यानी 73 है, लेकिन उनकी कुल घोषित आय 218 करोड़ रुपये के आसपास रही। राजस्थान में 23 पार्टियों की कुल आय 173 करोड़ रुपये से अधिक दर्ज की गई।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि राजनीतिक दलों की संख्या और उनकी घोषित आय के बीच सीधा अनुपात होना जरूरी नहीं है। कम संख्या में मौजूद कुछ दलों की आय भी काफी अधिक हो सकती है।

हालांकि, किसी पार्टी की अधिक आय अपने आप में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसके लिए पार्टी के आय के स्रोत, खर्च का विवरण, चुनावी गतिविधियों और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की अलग से जांच जरूरी होती है।

NCPI और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का क्या है मामला?

जयराम रमेश ने अरुणाचल जनता पार्टी के गठन पर सवाल उठाते हुए नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI का भी उल्लेख किया। यह पार्टी अक्टूबर 2022 में गठित हुई थी और पश्चिम बंगाल में आधारित एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बताई गई है।

खबर के मुताबिक, NCPI ने बाद में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दिया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के 27 लोकसभा सांसदों में से 20 के पार्टी छोड़कर NCPI से जुड़ने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है। इन नेताओं ने भाजपा नेतृत्व वाले NDA को समर्थन देने की बात कही थी।

इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि NCPI का इस्तेमाल तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं को एक राजनीतिक मंच उपलब्ध कराने के लिए किया गया।

कांग्रेस नेता ने इस पूरे घटनाक्रम को अमित शाह की राजनीतिक रणनीति से जोड़ने की कोशिश की है। हालांकि, इस संबंध में उनके आरोपों और पार्टी के वास्तविक गठन तथा गतिविधियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी राजनीतिक दल का NDA को समर्थन देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसका गठन किसी दूसरी पार्टी के नेताओं को शामिल करने के उद्देश्य से ही किया गया था।

नई पार्टी के पंजीकरण और राजनीतिक फंडिंग पर क्यों उठ रहे सवाल?

अरुणाचल जनता पार्टी के गठन से जुड़े सार्वजनिक नोटिस और ADR की रिपोर्ट के आंकड़ों ने राजनीतिक दलों के पंजीकरण तथा उनकी फंडिंग को लेकर चर्चा को नया आधार दिया है।

भारत में राजनीतिक दलों का पंजीकरण चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक नोटिस के जरिए आपत्तियां आमंत्रित करना भी एक महत्वपूर्ण चरण है। अरुणाचल जनता पार्टी के मामले में 3 दिसंबर 2026 तक आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही गई है।

दूसरी ओर, गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की आय के आंकड़े यह सवाल उठाते हैं कि इन दलों को मिलने वाले धन के स्रोत क्या हैं और उनका इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जाता है। राजनीतिक पारदर्शिता के लिहाज से आय और खर्च का सही विवरण सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण है।

फिलहाल अरुणाचल जनता पार्टी के प्रस्तावित पंजीकरण और अमित शाह को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर राजनीतिक बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस नई पार्टी के पंजीकरण की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया दी जाती है।

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