देश

नेहा बोरा के ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ वाले बयान पर सियासी बवाल, सपा और शिवसेना UBT ने जताई नाराजगी

AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा का एक कथित पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में नेहा बोरा के ‘ब्राह्मणवाद से आजादी’ से जुड़े बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDI के भीतर भी इस टिप्पणी को लेकर असहमति सामने आई है। समाजवादी पार्टी (SP) और शिवसेना (UBT) के नेताओं ने नेहा बोरा की भाषा पर आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित बताया है।

इस विवाद ने विपक्षी दलों के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ भाजपा इस बयान को कांग्रेस और उसके सहयोगी संगठनों की विचारधारा से जोड़कर हमला कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्षी दलों के नेता भी जाति और धर्म से जुड़ी ऐसी टिप्पणियों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।

हालांकि, वायरल वीडियो की तारीख और उसके पीछे का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बयान को लेकर सामने आ रही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह समझना भी जरूरी है कि वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किया गया था।

नेहा बोरा के बयान पर समाजवादी पार्टी ने जताई आपत्ति

नेहा बोरा की टिप्पणी को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने नाराजगी जाहिर की है। उत्तर प्रदेश की घोसी लोकसभा सीट से सांसद राजीव राय ने कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय को लेकर इस तरह की सामान्य टिप्पणी करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि हर धर्म और समाज में अच्छे तथा बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं। इसलिए किसी एक बयान या घटना के आधार पर पूरे समुदाय के बारे में राय बनाना सही नहीं है। राजीव राय के मुताबिक, राजनीतिक दलों को ऐसी बयानबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं।

सपा सांसद ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में जिस तरह की टिप्पणियां सामने आ रही हैं, वे स्वीकार करने योग्य नहीं हैं। किसी जाति, धर्म, समुदाय या क्षेत्र को लेकर सामान्यीकरण करना ठीक नहीं है। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी से विपक्ष को राजनीतिक रूप से घेरने का मौका मिलता है और विपक्ष को इस तरह के विवादों में नहीं उलझना चाहिए।

राजीव राय की प्रतिक्रिया से साफ है कि समाजवादी पार्टी इस मामले में नेहा बोरा की टिप्पणी का समर्थन करने के बजाय उससे दूरी बनाए रखना चाहती है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने भी बताया दुर्भाग्यपूर्ण बयान

शिवसेना (UBT) की नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी नेहा बोरा के कथित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए कहा कि भले ही वीडियो पुराना हो, लेकिन उसमें दिखाई देने वाली सोच पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि समाज को हर मुद्दे को जाति और धर्म के नजरिए से देखने की प्रवृत्ति से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने खुद को ब्राह्मण महिला बताते हुए सवाल किया कि क्या किसी समुदाय के लिए इस तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल सही माना जा सकता है?

उन्होंने कहा कि चाहे कट्टरता वामपंथी विचारधारा में हो या दक्षिणपंथी विचारधारा में, दोनों ही समाज और देश के लिए नुकसानदायक हैं। किसी भी विचारधारा को अपनी बात रखने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाया जाए।

हालांकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने नेहा बोरा के प्रति पूरी तरह नकारात्मक रुख नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि नेहा युवा और प्रतिभाशाली हैं। वह उनसे मिलकर बातचीत करना चाहेंगी और उन्हें अपनी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल करने की सलाह देंगी।

इस तरह सपा और शिवसेना (UBT) के नेताओं की प्रतिक्रिया ने विपक्षी गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने ला दिए हैं।

BJP ने नेहा बोरा को बताया राहुल गांधी की ‘पोस्टर गर्ल’

वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी हमला बोला। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नेहा बोरा को राहुल गांधी की कथित हिंदू विरोधी राजनीति की ‘पोस्टर गर्ल’ बताया।

भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उससे जुड़े छात्र संगठन हिंदू धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने वाली राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने नेहा बोरा की टिप्पणी को राहुल गांधी की राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।

भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में राहुल गांधी के मंदिरों को लेकर दिए गए एक पुराने बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में हिंदू समुदाय के प्रति नकारात्मक सोच दिखाई देती है और पार्टी वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देती है।

प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी हिंदुओं से नफरत करती है और वोट बैंक की राजनीति में लगी हुई है। उनके मुताबिक, इस तरह की सोच देश की एकता के लिए खतरा बन सकती है।

हालांकि, ये भाजपा प्रवक्ता के राजनीतिक आरोप हैं। वायरल वीडियो में नेहा बोरा की टिप्पणी और कांग्रेस की आधिकारिक विचारधारा के बीच सीधे संबंध को साबित करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

वायरल वीडियो की तारीख और पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं

इस विवाद का एक अहम पहलू यह है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो क्लिप की तारीख स्पष्ट नहीं है। साथ ही, नेहा बोरा ने यह टिप्पणी किन परिस्थितियों में और किस संदर्भ में की थी, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है।

सोशल मीडिया पर अक्सर किसी लंबे भाषण या बातचीत का छोटा हिस्सा साझा किया जाता है। ऐसे में केवल वायरल क्लिप के आधार पर किसी व्यक्ति की पूरी विचारधारा या बयान का अर्थ तय करना सही नहीं माना जा सकता।

इस मामले में भी वीडियो का पूरा संदर्भ सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नेहा बोरा किस मुद्दे पर अपनी बात रख रही थीं। फिलहाल अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता इस क्लिप के आधार पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

कौन हैं नेहा बोरा, जिनके बयान पर मचा है विवाद?

नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की अध्यक्ष हैं। हाल के दिनों में वह चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी आंदोलनों में सक्रिय दिखाई दी हैं।

AISA एक छात्र संगठन है, जो छात्र राजनीति और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गतिविधियों के लिए जाना जाता है। नेहा बोरा की सक्रियता खासतौर पर हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान चर्चा में रही है।

10 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शन में भी उन्होंने हिस्सा लिया था। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी और विभिन्न छात्र समूहों की ओर से आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नेहा बोरा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था। बताया गया था कि राजधानी के कुछ इलाकों में सार्वजनिक सभाओं और भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध लागू थे।

इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आयोजित INDI गठबंधन की रैली को भी नेहा बोरा ने समर्थन दिया। उन्होंने लोगों से विपक्ष के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी।

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के साथ भी नजर आई थीं नेहा बोरा

चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान नेहा बोरा राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ भी दिखाई दी थीं। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रमों में भी शामिल रही हैं।

इसी क्रम में मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया गया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सांकेतिक महाभियोग की प्रक्रिया दिखाई गई थी। नेहा बोरा भी इस कार्यक्रम में मौजूद थीं।

इन गतिविधियों के कारण वह हाल के दिनों में विपक्षी आंदोलनों से जुड़ा एक चर्चित चेहरा बन गई हैं। अब उनके कथित पुराने वीडियो को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीतिक बहस का नया विषय बन गया है।

क्या नेहा बोरा के बयान से INDI गठबंधन में बढ़ेगी दूरी?

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहा बोरा की टिप्पणी पर भाजपा के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी और शिवसेना (UBT) के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि किसी जाति या समुदाय को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विपक्षी दलों के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भाजपा लगातार INDI गठबंधन पर तुष्टीकरण और हिंदू विरोधी राजनीति के आरोप लगाती रही है। ऐसे में विपक्ष के सहयोगी दलों की नाराजगी यह संकेत देती है कि वे इस तरह के विवादों से अपनी राजनीतिक छवि को अलग रखना चाहते हैं।

हालांकि, केवल दो नेताओं की आपत्ति के आधार पर INDI गठबंधन में किसी बड़े टूट या औपचारिक मतभेद का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। यह भी संभव है कि अलग-अलग दल अपने राजनीतिक और सामाजिक आधार को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर स्वतंत्र प्रतिक्रिया दे रहे हों।

फिलहाल नेहा बोरा के कथित बयान को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नेहा बोरा इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण देती हैं या नहीं और क्या वायरल वीडियो का पूरा संदर्भ सार्वजनिक होता है।

Related Articles

Back to top button