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खुले बाजार में Sensex 730 अंक लुढ़का, Nifty भी 23,000 के नीचे; कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और एशियाई बाजारों में कमजोर रुख का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 730 अंक गिरकर 73,170.12 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 231.50 अंक टूटकर 22,908.95 पर आ गया।

बाजार में बिकवाली का दबाव इतना व्यापक रहा कि शुरुआती कारोबार में Sensex की सभी 30 कंपनियां लाल निशान में कारोबार कर रही थीं। Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank, HDFC Bank, Bajaj Finserv, Hindustan Unilever, Mahindra & Mahindra, Larsen & Toubro और Bharat Electronics समेत कई बड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला।

हालांकि, यह शुरुआती कारोबार के आंकड़े थे। बाद के कारोबार में गिरावट और बढ़ी तथा Sensex एक समय 900 अंकों से ज्यादा नीचे चला गया, जबकि Nifty 23,000 के स्तर से भी नीचे फिसल गया।

Crude Oil Price: कच्चा तेल 106 डॉलर के पार

सोमवार को भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता में से एक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude करीब 2.27 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 106.7 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। अन्य बाजार अपडेट्स में भी Brent crude की कीमत 106 डॉलर के आसपास पहुंचने की जानकारी सामने आई।

कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी का संबंध मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में बने गतिरोध से जोड़ा जा रहा है। तेल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण Strait of Hormuz को लेकर अनिश्चितता ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। तेल महंगा होने पर आयात बिल बढ़ सकता है और इससे महंगाई तथा कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ने की संभावना रहती है।

US-Iran Tension ने बढ़ाई बाजार की चिंता

सोमवार की बाजार गिरावट के पीछे एक प्रमुख वैश्विक कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की उस पहल को स्वीकार नहीं किया जिसमें संघर्ष समाप्त करने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने का प्रस्ताव शामिल था। इसके बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी कि तेल की आपूर्ति में व्यवधान लंबे समय तक जारी रह सकता है।

Strait of Hormuz दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। इसलिए इस मार्ग को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। सोमवार को तेल की कीमतों में तेजी को इसी व्यापक भू-राजनीतिक चिंता के संदर्भ में देखा गया।

Sensex और Nifty में कितनी गिरावट?

शुरुआती कारोबार में Sensex 730 अंक गिरकर 73,170.12 पर आ गया था। इसी दौरान Nifty 231.50 अंक की गिरावट के साथ 22,908.95 पर कारोबार कर रहा था।

इससे पहले शुक्रवार को घरेलू बाजार में तेजी देखने को मिली थी। शुक्रवार को Sensex 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ था। वहीं Nifty 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ था। सोमवार की शुरुआत ने इस तेजी को पलट दिया।

बाद के कारोबार में बिकवाली और तेज हुई। उपलब्ध दोपहर के आंकड़ों के अनुसार, Sensex 900 अंकों से ज्यादा गिर गया था और Nifty 23,000 के नीचे बना हुआ था।

Asian Markets में भी दबाव

भारतीय बाजार अकेले दबाव में नहीं थे। सोमवार को एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI, जापान का Nikkei 225 और Shanghai SSE Composite शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे, जबकि Hong Kong का Hang Seng इस दौरान बढ़त में था।

वैश्विक बाजारों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और आगे की बातचीत पर बनी हुई है। ऐसे माहौल में तेल की कीमतों में अचानक होने वाली तेजी का असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर ज्यादा पड़ सकता है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

सभी Sensex Stocks में दिखी बिकवाली

सोमवार की शुरुआत में Sensex की सभी 30 कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इससे पता चलता है कि शुरुआती दबाव किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं था। Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank, HDFC Bank, Bajaj Finserv, Hindustan Unilever, Mahindra & Mahindra, Larsen & Toubro और Bharat Electronics प्रमुख कमजोर शेयरों में शामिल रहे।

बाजार में जब व्यापक स्तर पर शेयरों में बिकवाली होती है, तो इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर भी तेजी से दिखाई देता है। सोमवार के कारोबार में यही स्थिति देखने को मिली।

FII Selling भी बाजार के लिए दबाव का कारण

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी निवेशकों की नजर में रहती हैं। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने शुक्रवार को 3,693.93 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने करीब 2,838 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल एक साथ बाजार की धारणा पर असर डाल रहे हैं। यही वजह है कि सोमवार को निवेशकों में सतर्कता देखने को मिली।

महंगा Crude Oil भारत के लिए क्यों चिंता की बात है?

भारत दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil की कीमत बढ़ने पर देश के आयात बिल पर असर पड़ सकता है। यदि तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो ईंधन और परिवहन लागत समेत अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों पर दबाव बढ़ सकता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से कंपनियों की लागत भी प्रभावित हो सकती है। खासकर वे कंपनियां जिनका कारोबार ऊर्जा और परिवहन लागत से अधिक जुड़ा है, उनके मुनाफे पर दबाव पड़ने की संभावना बाजार में चर्चा का विषय रहती है। साथ ही महंगा तेल महंगाई के लिए भी चुनौती बन सकता है।

निवेशकों की नजर अब किन घटनाक्रमों पर?

सोमवार की तेज गिरावट के बाद बाजार की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान बातचीत, Strait of Hormuz से जुड़े घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर रहेगी।

बाजार विशेषज्ञों ने भी मौजूदा परिस्थितियों में सावधानी की बात कही है। Enrich Money के CEO Ponmudi R. के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और crude oil में तेजी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। उनके मुताबिक, तेल की कीमतें फिलहाल वैश्विक बाजारों के लिए प्रमुख कारकों में से एक हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि विशेषज्ञों की राय बाजार की संभावित दिशा का निश्चित परिणाम नहीं होती। शेयर बाजार में कीमतें वैश्विक घटनाओं, निवेश प्रवाह, कंपनियों के नतीजों और कई अन्य आर्थिक कारकों के आधार पर तेजी से बदल सकती हैं।

सात हफ्तों से लगातार दबाव में भारतीय बाजार

सोमवार की गिरावट ऐसे समय में आई जब Sensex और Nifty इससे पहले लगातार सात सप्ताह की साप्ताहिक गिरावट दर्ज कर चुके थे। 28 सितंबर के बाजार अपडेट्स में दोनों प्रमुख सूचकांकों के करीब छह महीने के निचले स्तरों के आसपास पहुंचने की भी जानकारी सामने आई।

इससे बाजार में मौजूदा कमजोरी का व्यापक संदर्भ समझा जा सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी दिन की गिरावट से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं की जा सकती। आगे के सत्रों में वैश्विक तेल कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर महत्वपूर्ण रह सकता है।

Stock Market Today: आगे क्या देखना होगा?

28 सितंबर की शुरुआत में शेयर बाजार में तेज गिरावट ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर वैश्विक घटनाक्रमों की ओर खींचा है। Brent crude का 106 डॉलर से ऊपर जाना, अमेरिका-ईरान तनाव और एशियाई बाजारों में कमजोरी भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेत रहे।

आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर पर रहती हैं और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में कोई नई प्रगति होती है या नहीं। साथ ही विदेशी निवेशकों का रुख और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल रहेगी।

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