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एक दिन में कमाए 77 करोड़ रुपये! 26 की उम्र में करोड़पति बना IIT Kanpur का छात्र, AI से बदली किस्मत

Siddhartha Saxena AI Success Story: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया ने पिछले कुछ वर्षों में कई युवा उद्यमियों की जिंदगी बदल दी है। भारत के युवा भी इस टेक्नोलॉजी क्रांति में तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं। ऐसी ही एक कहानी IIT Kanpur के पूर्व छात्र और AI स्टार्टअप Merlin के को-फाउंडर सिद्धार्थ सक्सेना की है, जिन्होंने दावा किया है कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा दिन आया, जब उन्होंने एक ही दिन में करीब 8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 77 करोड़ रुपये की कमाई की।

सिद्धार्थ सक्सेना के मुताबिक, इस बड़ी वित्तीय उपलब्धि ने उन्हें महज 26 साल की उम्र में मिलियनेयर बना दिया। आज उनका नाम भारत के उभरते हुए AI उद्यमियों में लिया जा रहा है। हालांकि, सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर सिर्फ एक दिन की कहानी नहीं है। इसके पीछे IIT Kanpur की कठिन पढ़ाई, मशीन लर्निंग में वर्षों का अनुभव और स्टार्टअप की दुनिया में बड़ा जोखिम लेने का फैसला शामिल है।

हाल ही में कंटेंट क्रिएटर Viraj Ala को दिए एक स्ट्रीट-स्टाइल इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने अपने कॉलेज के दिनों से लेकर AI कंपनी बनाने और करोड़ों की संपत्ति खड़ी करने तक के सफर पर खुलकर बात की।

IIT Kanpur से शुरू हुआ सिद्धार्थ सक्सेना का सफर

सिद्धार्थ सक्सेना ने देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में शामिल IIT Kanpur से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की है। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपने अकादमिक सफर का जिक्र करते हुए IIT Kanpur के इंजीनियरिंग प्रोग्राम को भारत के सबसे कठिन पाठ्यक्रमों में से एक बताया।

सिद्धार्थ ने यहां तक दावा किया कि IIT Kanpur के कंप्यूटर साइंस कोर्स में एडमिशन हासिल करना Harvard University में प्रवेश पाने की तुलना में “20 गुना ज्यादा कठिन” है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

IIT में दाखिला लेना ही देश के लाखों छात्रों के लिए एक बड़ा सपना होता है। खासतौर पर कंप्यूटर साइंस जैसी लोकप्रिय ब्रांच के लिए प्रतियोगिता काफी ज्यादा रहती है। सिद्धार्थ ने इसी प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी पढ़ाई पूरी की और साल 2019 में IIT Kanpur से ग्रेजुएशन किया।

लेकिन कॉलेज की डिग्री मिलने के बाद उन्होंने तुरंत कोई स्टार्टअप शुरू नहीं किया। पहले उन्होंने टेक्नोलॉजी और मशीन लर्निंग की दुनिया को करीब से समझने और अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया।

Machine Learning में बनाया मजबूत करियर

IIT Kanpur से पढ़ाई पूरी करने के बाद सिद्धार्थ सक्सेना ने मशीन लर्निंग और AI से जुड़े अलग-अलग संस्थानों और कंपनियों में काम किया। उनके प्रोफेशनल सफर में Envestnet, Yodlee, Wadhwani AI, Finland की Aalto University और Jumio Corporation जैसे नाम शामिल रहे।

इन भूमिकाओं ने उन्हें मशीन लर्निंग की वास्तविक दुनिया में उपयोगिता को समझने का मौका दिया। सिद्धार्थ ने केवल टेक्नोलॉजी की थ्योरी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि यह जानने की कोशिश की कि AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल बड़े स्तर पर समस्याओं को हल करने के लिए कैसे किया जा सकता है।

यही अनुभव बाद में उनके उद्यमी बनने के सफर में महत्वपूर्ण साबित हुआ। तेजी से बदलती AI इंडस्ट्री में सिद्धार्थ ने उस समय संभावनाओं को पहचाना, जब Generative AI आम लोगों और बिजनेस की रोजमर्रा की जिंदगी में अपनी जगह बनाना शुरू कर रहा था।

‘मैंने एक दिन में 8 मिलियन डॉलर कमाए’

सिद्धार्थ सक्सेना के इंटरव्यू का सबसे चर्चित हिस्सा उनकी कमाई से जुड़ा रहा। जब उनसे उनके जीवन की सबसे बड़ी वित्तीय उपलब्धि के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब सुनकर इंटरव्यू लेने वाला भी हैरान रह गया।

सिद्धार्थ ने कहा, “मैं आपको इससे भी बेहतर बात बताता हूं। मैंने एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर कमाए।”

भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 77 करोड़ रुपये बैठती है। इसके बाद उनसे पूछा गया कि क्या वह एक ही रात में मिलियनेयर बन गए थे? इस सवाल पर सिद्धार्थ ने कहा, “हां, कुछ ऐसा ही।”

उनका यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया। हालांकि, इंटरव्यू के दिए गए विवरण में इस 8 मिलियन डॉलर की राशि की पूरी वित्तीय संरचना या यह रकम नकद आय, इक्विटी वैल्यू अथवा किसी अन्य वैल्यूएशन इवेंट से जुड़ी थी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आती। फिर भी सिद्धार्थ ने इसे अपने जीवन का बड़ा आर्थिक पड़ाव बताया।

स्टार्टअप की दुनिया में किसी कंपनी की तेजी से बढ़ती वैल्यू उसके फाउंडर्स की हिस्सेदारी के मूल्य को भी कई गुना बढ़ा सकती है। यही कारण है कि टेक इंडस्ट्री में कई युवा उद्यमियों की नेटवर्थ बहुत कम समय में तेजी से बदलती दिखाई देती है।

2022 में दोस्तों के साथ शुरू किया Merlin AI

सिद्धार्थ सक्सेना के उद्यमी बनने की कहानी में सबसे महत्वपूर्ण नाम Merlin है। साल 2022 में उन्होंने IIT Kanpur के अपने बैचमेट्स प्रत्युष राय और सिरसेंदु सरकार के साथ मिलकर Merlin की शुरुआत की।

Merlin एक AI-powered Chrome extension है, जिसे Generative AI की मदद से यूजर्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया। आसान भाषा में कहें तो यह टूल यूजर्स को ऑनलाइन काम करते समय AI की क्षमताओं का इस्तेमाल करने में मदद करता है।

Generative AI की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ऐसे टूल्स की मांग भी तेजी से बढ़ी है। लोग कंटेंट लिखने, जानकारी को समझने, लंबे टेक्स्ट को छोटा करने और रोजमर्रा के डिजिटल कामों को तेजी से पूरा करने के लिए AI आधारित प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Merlin ने इसी तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टार्टअप ने कम समय में तेज ग्रोथ दर्ज की और इसकी वैल्यू करीब 50 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।

अगर भारतीय मुद्रा में देखें तो यह वैल्यू कई सौ करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। AI स्टार्टअप इकोसिस्टम में किसी युवा कंपनी के लिए इस स्तर की वैल्यूएशन हासिल करना बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।

Merlin के अलावा Thine के भी को-फाउंडर

सिद्धार्थ सक्सेना का उद्यमी सफर केवल Merlin तक सीमित नहीं है। वह Thine नाम के एक अन्य वेंचर के भी को-फाउंडर हैं। इससे AI और टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम में उनकी सक्रियता और मजबूत हुई है।

आज दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों से लेकर छोटे स्टार्टअप तक AI में निवेश कर रहे हैं। ऐसे समय में युवा फाउंडर्स नए AI टूल्स और प्रोडक्ट्स के जरिए तेजी से बाजार में प्रवेश कर रहे हैं।

सिद्धार्थ की कहानी भी इसी बदलती टेक्नोलॉजी दुनिया की एक झलक पेश करती है। एक कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने पहले मशीन लर्निंग में अनुभव हासिल किया और फिर अपनी तकनीकी समझ को बिजनेस में बदलने का फैसला किया।

‘Scarcity Mindset’ को सफलता में बाधा मानते हैं सिद्धार्थ

सिद्धार्थ सक्सेना के लिए उद्यमिता केवल अच्छी टेक्नोलॉजी या शानदार कोड लिखने तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि एक सफल फाउंडर बनने के लिए सोचने का तरीका भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।

इंटरव्यू में उन्होंने भारतीयों के बीच दिखाई देने वाली “Scarcity Mindset” यानी सीमित संसाधनों वाली सोच के बारे में बात की। सिद्धार्थ का मानना है कि भारत में बहुत से लोग सीमित संसाधनों के बीच बड़े होते हैं। ऐसे माहौल में व्यक्ति कई बार अवसरों से ज्यादा जोखिम और कमियों पर ध्यान देना सीख जाता है।

उनके अनुसार, सफल उद्यमियों को “Abundance Mindset” विकसित करने की जरूरत है। इसका मतलब यह नहीं है कि बिना सोचे-समझे जोखिम लिया जाए। बल्कि व्यक्ति को बड़े अवसरों को पहचानना, सोच-समझकर जोखिम लेना और सीमाओं के बजाय संभावनाओं पर ध्यान देना सीखना चाहिए।

सिद्धार्थ की सोच है कि अगर कोई फाउंडर हमेशा केवल इस बात से डरता रहेगा कि क्या गलत हो सकता है, तो उसके लिए बड़े स्तर पर कुछ नया बनाना मुश्किल हो सकता है।

स्टार्टअप की दुनिया में अनिश्चितता हमेशा मौजूद रहती है। कोई भी नया प्रोडक्ट सफल होगा या नहीं, इसकी गारंटी नहीं होती। ऐसे में बड़े विजन और जोखिम लेने की क्षमता को कई उद्यमी सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

16 साल की उम्र में नहीं सोचा था बनेंगे मिलियनेयर

आज सिद्धार्थ सक्सेना AI स्टार्टअप की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं, लेकिन किशोरावस्था में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भविष्य में उनकी जिंदगी इस तरह बदल जाएगी।

इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या 16 साल की उम्र वाला सिद्धार्थ यह कल्पना कर सकता था कि वह AI कंपनी बनाकर मिलियनेयर बनेगा?

इस सवाल का उन्होंने बेहद सीधा जवाब दिया, “बिल्कुल नहीं।”

उनका यह जवाब बताता है कि करियर और जिंदगी का रास्ता हमेशा पहले से तय नहीं होता। सिद्धार्थ ने IIT Kanpur में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की, इसके बाद मशीन लर्निंग से जुड़ी अलग-अलग भूमिकाओं में अनुभव हासिल किया और फिर सही समय पर AI उद्यमिता की दुनिया में कदम रखा।

Generative AI की तेज रफ्तार ने दुनियाभर में नए बिजनेस मॉडल तैयार किए हैं। ऐसे में तकनीकी कौशल रखने वाले युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

IIT की क्लास से AI स्टार्टअप तक, युवाओं के लिए खास है कहानी

सिद्धार्थ सक्सेना की कहानी इस बात का उदाहरण है कि तकनीकी विशेषज्ञता, लगातार सीखने की आदत और बड़े फैसले लेने की क्षमता किसी युवा के करियर को पूरी तरह बदल सकती है।

हालांकि हर स्टार्टअप की सफलता की कहानी अलग होती है और करोड़ों रुपये की वैल्यू बनाना आसान नहीं है। इसके पीछे सही प्रोडक्ट, बाजार की मांग, टीम, टेक्नोलॉजी और समय जैसे कई फैक्टर काम करते हैं।

सिद्धार्थ ने AI की बढ़ती ताकत को समझा और अपने IIT Kanpur के साथियों के साथ मिलकर Merlin जैसा प्रोडक्ट तैयार किया। आज उनका एक दिन में 8 मिलियन डॉलर कमाने का दावा चर्चा में है और उनकी उद्यमी यात्रा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस तेजी से दुनिया बदल रही है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में भारत से और भी कई युवा AI उद्यमियों के सामने आने की संभावना है। सिद्धार्थ सक्सेना का IIT Kanpur की क्लास से AI स्टार्टअप बनाने तक का सफर इसी नई टेक क्रांति की दिलचस्प कहानियों में से एक है।

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