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Jharkhand JPSC Protest: रांची में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प

Jharkhand JPSC Protest: झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब विधानसभा मार्च निकाल रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किए जाने की भी बात सामने आई है।

यह आंदोलन JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा है। प्रदर्शनकारी खास तौर पर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL समेत कुछ अन्य परीक्षाओं को रद्द करने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहे हैं।

रांची सिटी के एसपी पारस राणा के मुताबिक, घटना में तीन पुलिसकर्मी और करीब चार से पांच प्रदर्शनकारी मामूली रूप से घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।

विधानसभा मार्च के दौरान बिगड़े हालात

सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शनकारी पुराने विधानसभा परिसर से नए विधानसभा भवन की ओर मार्च कर रहे थे। उनका उद्देश्य विधानसभा का घेराव करना और सरकार के सामने अपनी मांगें रखना था।

प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तर पर बैरिकेडिंग की थी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कंटीले तारों की बाड़ भी लगाई गई थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार कर लिए और आगे बढ़ने की कोशिश की।

स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए पानी की बौछार की। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े जाने और लाठीचार्ज की खबर सामने आई। प्रदर्शनकारियों की ओर से भी पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने और पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की करने की बात पुलिस ने कही है।

पुलिस का दावा- कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पत्थर फेंके

रांची सिटी के एसपी पारस राणा ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारी लगातार पुलिस की अपील की अनदेखी कर रहे थे।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने लगातार कई बैरिकेड तोड़ दिए। एक बैरिकेड टूटने के दौरान तीन पुलिसकर्मी उसके नीचे दब गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ स्थानों पर पुलिस की ओर पत्थर फेंके गए और पुलिस बल को पीछे धकेलने की कोशिश की गई।

एसपी ने कहा कि पुलिस ने सीमित समय के लिए बल का इस्तेमाल किया और इसके बाद संयम बरता गया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील की।

पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। उन्हें एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया। पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

अनशन के बावजूद मार्च में पहुंचे देवेंद्रनाथ महतो

आंदोलन के प्रमुख छात्र नेताओं में शामिल देवेंद्रनाथ महतो भी विधानसभा मार्च में पहुंचे। महतो पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद वह प्रदर्शन में शामिल होने के लिए एंबुलेंस से पहुंचे और स्ट्रेचर की मदद से मार्च में आगे बढ़े।

महतो ने सरकार पर प्रदर्शनकारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने पुलिस द्वारा आंसू गैस, वाटर कैनन और लाठी के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया और कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।

महतो के मुताबिक, सरकार के साथ पहले कई दौर की बातचीत हो चुकी है। अब छात्र केवल आश्वासन नहीं चाहते, बल्कि अपनी मांगों पर ठोस फैसला चाहते हैं।

JPSC और JSSC परीक्षाओं को रद्द करने की मुख्य मांग

छात्र आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर है। प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा JPSC की 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को लेकर भी आंदोलनकारी सवाल उठा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल हैं।

आंदोलनकारी चाहते हैं कि इन मामलों की जांच किसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय एजेंसी से कराई जाए। छात्रों की प्रमुख मांगों में CBI जांच भी शामिल है।

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत में क्या हुआ?

विधानसभा मार्च से पहले रविवार को राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्र प्रतिनिधियों के बीच रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में बातचीत हुई थी। बैठक में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने को लेकर सहमति बनने की बात सामने आई।

छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, सरकार ने JPSC की 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को लेकर भी सकारात्मक रुख दिखाया। इसके अलावा अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच CID और ED जैसी एजेंसियों से कराने का प्रस्ताव सामने आया।

हालांकि आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर कायम हैं। यही उन मुद्दों में से एक है जिस पर सरकार और छात्रों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन पाई है।

छात्र नेताओं का दावा- लगभग सभी मांगों पर बनी सहमति

छात्र प्रतिनिधि रवींद्र पासवान ने बातचीत के बाद कहा कि सरकार ने उनकी लगभग सभी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है। उनके अनुसार, 14वीं JPSC, 2023 और 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं सहित कई मुद्दों पर सरकार ने आगे बढ़ने की सहमति जताई है।

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार से जुड़ी अधिकांश मांगों को स्वीकार किया गया है, लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी लंबित हैं। इनमें अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट देने का मुद्दा भी शामिल है।

छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सभी महत्वपूर्ण मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं किया जाएगा।

सरकार का दावा- 98 फीसदी मांगें मानी गईं

झारखंड सरकार की ओर से दावा किया गया है कि आंदोलन कर रहे छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया गया है। सरकार का कहना है कि छात्रों की समस्याओं पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि प्रदर्शनकारी सरकार के इस दावे से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं और जब तक उन पर लिखित एवं स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

यही मतभेद विधानसभा मार्च के दौरान भी दिखाई दिया, जब बातचीत के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतर आए।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

छात्र आंदोलन के बीच अब राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने झारखंड में चल रहे अभ्यर्थियों के आंदोलन पर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया।

अखिलेश यादव ने कहा कि झारखंड के छात्रों से राज्य सरकार बातचीत कर रही है और उन्हें उम्मीद है कि बातचीत से कोई समाधान निकलेगा। हालांकि उन्होंने बेरोजगारी और युवाओं के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यदि रोजगार के क्षेत्र में बेहतर काम करती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव राज्य सरकारों पर भी पड़ता है। उनके मुताबिक, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना और बेरोजगारी की समस्या का समाधान करना केंद्र और राज्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है।

आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?

सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्र प्रतिनिधि कई प्रमुख मांगों पर लिखित और स्पष्ट फैसला चाहते हैं।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि उसने अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया है और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा, JPSC की बैकलॉग परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर सरकार क्या अंतिम निर्णय लेती है।

फिलहाल रांची में हुआ टकराव यह दिखाता है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड के युवाओं में नाराजगी कितनी गहरी है। छात्रों की मांगें रोजगार, परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी हैं। यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष इन मुद्दों पर स्पष्ट सहमति तक पहुंचते हैं, तो लंबे समय से चल रहे इस विवाद को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।

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