उत्तर प्रदेश

पीएम सूर्य घर योजना से यूपी में बदली बिजली की तस्वीर

PM Surya Ghar Yojana: उत्तर प्रदेश में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों की छतों पर सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों से कुल 2,769.59 मेगावाट की सौर ऊर्जा क्षमता तैयार हो चुकी है। योजना के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में घरेलू उपभोक्ता बिजली के खर्च को कम करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में भी योगदान दे रहे हैं।

छतों पर लगाए गए इन सौर संयंत्रों से हर दिन करीब 1.25 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है। इससे उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया है। योजना का असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल, सरकारी सहायता, रोजगार और पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

8.24 लाख घरों की छत पर सोलर पैनल, 2,769 मेगावाट क्षमता स्थापित

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को अपनी छतों पर सौर संयंत्र लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 8,24,492 घरों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया जा चुका है।

इन सभी संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 2,769.59 मेगावाट तक पहुंच गई है। औसतन 4.5 यूनिट प्रति किलोवाट प्रतिदिन के उत्पादन के आधार पर इन संयंत्रों से हर दिन लगभग 1.25 करोड़ यूनिट स्वच्छ बिजली बनने का अनुमान है।

इसका मतलब है कि जिन घरों में सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, वे अपनी बिजली की जरूरत का एक हिस्सा खुद पैदा कर सकते हैं। इससे ग्रिड से खरीदी जाने वाली बिजली की मात्रा कम हो सकती है और उपभोक्ताओं के मासिक बिजली खर्च में भी कमी आ सकती है।

हर दिन करीब 8.10 करोड़ रुपये की बिजली उत्पादन का अनुमान

रूफटॉप सोलर से होने वाले बिजली उत्पादन को यदि औसतन 6.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से देखा जाए तो प्रतिदिन लगभग 8.10 करोड़ रुपये मूल्य की बिजली के बराबर उत्पादन होने का अनुमान है।

इसी आधार पर सालाना आर्थिक लाभ करीब 2,956 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। यह लाभ मुख्य रूप से बिजली की खरीद में होने वाली बचत और घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से जुड़ा है।

रूफटॉप सोलर की खासियत यह है कि बिजली का उत्पादन उसी स्थान पर होता है जहां उसका इस्तेमाल किया जाना है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली की लागत कम करने का अवसर मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी घट सकती है।

1.25 लाख से ज्यादा घरों का बिजली बिल हुआ शून्य या निगेटिव

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का सबसे दिलचस्प असर बिजली बिल के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। योजना के उपभोक्ता बिल विवरण के अनुसार जून 2026 में उत्तर प्रदेश के 1,25,262 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य या ऋणात्मक रहा।

शून्य बिजली बिल का मतलब है कि संबंधित उपभोक्ता को उस महीने बिजली के लिए भुगतान नहीं करना पड़ा। वहीं ऋणात्मक बिल की स्थिति तब बन सकती है जब कोई उपभोक्ता ग्रिड से जितनी बिजली लेता है, उससे अधिक बिजली अपने सोलर सिस्टम के जरिए ग्रिड में भेज देता है। ऐसी अतिरिक्त बिजली का हिसाब आगे आने वाले बिलों में समायोजित किया जा सकता है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था सोलर सिस्टम लगाने के प्रमुख आर्थिक फायदों में से एक है। हालांकि वास्तविक बिल और क्रेडिट की स्थिति उपभोक्ता के उत्पादन, खपत और लागू बिजली व्यवस्था पर निर्भर करती है।

केंद्र और यूपी सरकार से मिली 7,300 करोड़ से ज्यादा की सहायता

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को योजना के तहत अब तक केंद्र सरकार से 5,400 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता मिल चुकी है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से लाभार्थियों को 1,900 करोड़ रुपये से अधिक का राज्य अनुदान दिया गया है। इस तरह केंद्र और राज्य की सहायता को मिलाकर कुल वित्तीय सहयोग 7,300 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

सरकारी सहायता की वजह से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर प्लांट लगवाने की शुरुआती लागत को कम करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में परिवार रूफटॉप सोलर सिस्टम की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

पर्यावरण को भी फायदा, हर साल 36.6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का असर केवल बिजली के बिल पर नहीं पड़ता, बल्कि पर्यावरण पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश में स्थापित 2,769.59 मेगावाट सौर क्षमता से हर साल करीब 36.6 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान लगाया गया है।

इस कार्बन बचत की तुलना करीब 16.5 करोड़ परिपक्व पेड़ों द्वारा एक साल में सोखी जाने वाली कार्बन मात्रा से की गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़े स्तर पर रूफटॉप सोलर अपनाने से स्वच्छ ऊर्जा के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिल सकता है।

रूफटॉप मॉडल का एक और फायदा जमीन के इस्तेमाल से जुड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगाने के कारण लगभग 10,617 एकड़ भूमि को बड़े भू-आधारित सौर संयंत्रों के लिए इस्तेमाल होने से बचाया जा रहा है। यह भूमि कृषि, आवासीय या अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाई जा सकती है।

सोलर योजना से 85 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। उत्तर प्रदेश में इस योजना के कारण 85,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का आधार तैयार होने का अनुमान है।

सोलर पैनल की स्थापना से लेकर सिस्टम की जांच और रखरखाव तक कई तरह के कामों के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती है। इसमें इंजीनियर, तकनीशियन, इलेक्ट्रिशियन, सर्वेक्षक, सुपरवाइजर, सप्लाई और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कर्मचारी तथा मेंटेनेंस सेवाएं देने वाले लोग शामिल हैं।

प्रदेश में 7,750 पंजीकृत सोलर वेंडरों का नेटवर्क भी तैयार किया गया है। ये वेंडर उपभोक्ताओं को सर्वेक्षण, सिस्टम डिजाइन, सोलर प्लांट इंस्टॉलेशन, बिजली कनेक्शन, निरीक्षण, सिस्टम को चालू करने और रखरखाव जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

31 मार्च 2027 तक लागू है योजना की अवधि

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के मौजूदा क्रियान्वयन की अवधि 31 मार्च 2027 तक निर्धारित की गई है। इस अवधि में उपभोक्ताओं को आवेदन से लेकर सोलर प्लांट की स्थापना, विद्युत निरीक्षण, नेट मीटरिंग और सब्सिडी भुगतान जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

सोलर सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया में आवेदन, वेंडर चयन, साइट सर्वे, स्थापना और बिजली विभाग से संबंधित प्रक्रियाओं में समय लग सकता है। ऐसे में जो उपभोक्ता योजना का लाभ लेने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए समय रहते प्रक्रिया शुरू करना उपयोगी हो सकता है।

कैसे करें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के लिए आवेदन?

जो घरेलू उपभोक्ता अपनी छत पर सोलर प्लांट लगवाना चाहते हैं, वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के राष्ट्रीय पोर्टल pmsuryaghar.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा अपने संबंधित विद्युत वितरण निगम के पंजीकृत वेंडर से भी योजना की प्रक्रिया और स्थापना को लेकर जानकारी ली जा सकती है।

आवेदन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सोलर सिस्टम की स्थापना, विद्युत निरीक्षण और नेट मीटरिंग जैसी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। पात्रता और लागू नियमों के अनुसार केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता का लाभ लिया जा सकता है।

सोलर पैनल लगवाने से क्या होगा फायदा?

रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने से घरेलू बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने का अवसर मिलता है। दिन के समय सौर ऊर्जा का इस्तेमाल घर की बिजली जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है। इससे ग्रिड से ली जाने वाली बिजली की मात्रा कम होने पर बिजली बिल में बचत हो सकती है।

वहीं, यदि उत्पादन घरेलू खपत से अधिक होता है और लागू नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाती है, तो उसका समायोजन नियमों के अनुसार किया जा सकता है। इसी कारण कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर का विस्तार अब लाखों घरों तक पहुंच चुका है। 8.24 लाख से अधिक घरों में सौर संयंत्र स्थापित होने और 2,769.59 मेगावाट क्षमता तैयार होने से प्रदेश में घरेलू स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ा है। आने वाले समय में योजना के तहत और अधिक घरों को जोड़ने के साथ बिजली बचत, रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।

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