
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, खराब खान-पान, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और एक्सरसाइज की कमी आम होती जा रही है। इन आदतों का असर सिर्फ वजन और फिटनेस पर नहीं पड़ता, बल्कि दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि हृदय रोग से जुड़े जोखिम कारकों को कम उम्र से पहचानना और नियंत्रित करना महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू, अधिक वजन, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
इसी मुद्दे पर Manipal Hospital, Salt Lake के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों ने दिल की सेहत को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. रंजन कुमार शर्मा और कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजा नाग ने बदलती जीवनशैली, युवाओं में हार्ट अटैक के जोखिम और नियमित हेल्थ चेकअप की जरूरत पर जोर दिया।
क्यों बढ़ रहा है हार्ट डिजीज का खतरा?
प्रो. डॉ. रंजन कुमार शर्मा के मुताबिक, आज लोगों की जीवनशैली में कई ऐसे बदलाव आए हैं जो हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। खाने में जरूरत से ज्यादा नमक और फैट लेना, लगातार मानसिक तनाव में रहना और शारीरिक गतिविधि कम होना इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा प्रदूषण भी स्वास्थ्य पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
WHO भी अस्वास्थ्यकर डाइट, शारीरिक गतिविधि की कमी, तंबाकू और बढ़ते वजन को हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में गिनता है। लंबे समय तक इन कारकों के बने रहने से हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और दूसरी हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ाती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, जिन लोगों के परिवार में पहले से हार्ट डिजीज का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों का ब्लड शुगर या कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, उनमें भी हृदय संबंधी जोखिम सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक हो सकता है।
गैस और हार्ट अटैक के लक्षण में न करें गलती
हार्ट अटैक से जुड़ी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक यह है कि कई बार लोग इसके शुरुआती संकेतों को सामान्य गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। सीने में असहजता या दर्द को केवल पेट की समस्या मानकर घर पर इंतजार करना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
WHO के अनुसार हार्ट अटैक में सीने के बीच दर्द या दबाव के साथ हाथ, कंधे, जबड़े, गर्दन या पीठ में दर्द हो सकता है। सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, मितली, उल्टी, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है।
इसलिए सीने में अचानक दर्द, दबाव या असामान्य बेचैनी महसूस होने पर इसे केवल गैस मानकर खुद से इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है। हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है और इलाज में देरी से हृदय की मांसपेशियों को नुकसान बढ़ सकता है।
20 की उम्र के बाद दिल की सेहत को लेकर रहें सतर्क
इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजा नाग ने कम उम्र के लोगों को लेकर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, अब 20 से 30 वर्ष की उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक से जुड़े मामले देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने 20 वर्ष की उम्र के बाद कम से कम एक बार ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच कराने की सलाह दी।
यह सलाह खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जिनकी जीवनशैली में धूम्रपान, कम शारीरिक गतिविधि, अधिक वजन, खराब डाइट या लंबे समय तक तनाव जैसी स्थितियां मौजूद हैं। युवाओं में भी कोलेस्ट्रॉल और दूसरे हृदय जोखिम कारकों की शुरुआती पहचान पर चिकित्सा साहित्य में जोर दिया गया है।
हालांकि हर व्यक्ति के लिए जांच की जरूरत और उसकी आवृत्ति अलग हो सकती है। उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखकर डॉक्टर उचित जांच की सलाह दे सकते हैं।
30 की उम्र के बाद इन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
डॉ. राजा नाग के अनुसार, जो लोग धूम्रपान करते हैं या मोटापे से जूझ रहे हैं, उन्हें 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
तंबाकू का सेवन हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। WHO के अनुसार तंबाकू शरीर के लगभग हर अंग को नुकसान पहुंचाता है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है। WHO यह भी स्पष्ट करता है कि तंबाकू के सेवन का कोई सुरक्षित स्तर नहीं माना जाता।
इसी तरह मोटापा भी केवल वजन से जुड़ी समस्या नहीं है। अधिक वजन के साथ हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों का जोखिम बढ़ सकता है। इन सभी कारकों का हृदय की सेहत पर असर पड़ता है।
कौन सी तीन समस्याएं हैं ‘साइलेंट किलर’?
डॉक्टरों ने मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल को ऐसे जोखिम कारकों के रूप में बताया जिनका असर लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी शरीर पर पड़ सकता है।
डायबिटीज में लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। WHO के अनुसार डायबिटीज से पीड़ित वयस्कों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम सामान्य आबादी की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ सकता है।
वहीं हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर किसी खास लक्षण के साथ सामने नहीं आता। इसकी पहचान आमतौर पर ब्लड टेस्ट के जरिए होती है। खासकर LDL यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा स्तर धमनियों में प्लाक बनने और आगे चलकर हृदय रोग का जोखिम बढ़ाने से जुड़ा है।
हाई ब्लड प्रेशर भी लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकता है। नियमित ब्लड प्रेशर जांच ही यह पता लगाने का सबसे आसान तरीका है कि किसी व्यक्ति को हाइपरटेंशन है या नहीं। अनियंत्रित हाई BP समय के साथ हृदय, रक्त वाहिकाओं, किडनी और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है।
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
हार्ट डिजीज से बचाव केवल तब शुरू नहीं होना चाहिए जब कोई समस्या सामने आ जाए। स्वस्थ जीवनशैली को कम उम्र से ही अपनाना ज्यादा उपयोगी है। खाने में नमक और अस्वास्थ्यकर फैट की मात्रा नियंत्रित करना, पर्याप्त फल-सब्जियां लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना भी बेहद जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति पहले से हाई BP, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहा है तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और उपचार जारी रखना चाहिए।
सिर्फ जिम जाना ही पर्याप्त नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को कम करना और नियमित शारीरिक गतिविधि को शामिल करना भी जरूरी है। WHO के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता और अस्वास्थ्यकर खान-पान हृदय रोग के महत्वपूर्ण व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल हैं।
परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है तो रहें ज्यादा सावधान
अगर माता-पिता या परिवार के करीबी सदस्यों में कम उम्र में हार्ट डिजीज, हार्ट अटैक या बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल का इतिहास रहा है तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। कुछ स्थितियां आनुवंशिक भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए familial hypercholesterolaemia एक ऐसी inherited condition है जिसमें LDL कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक हो सकता है और समय से पहले हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे मामलों में सामान्य व्यक्ति की तुलना में जांच और जोखिम आकलन की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए परिवार के मेडिकल इतिहास को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
हार्ट हेल्थ के लिए नियमित जांच क्यों जरूरी?
दिल की बीमारी का खतरा कई बार तब तक स्पष्ट नहीं होता जब तक कोई गंभीर घटना न हो जाए। हाई BP और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना महत्वपूर्ण है।
खासकर ऐसे लोगों को अपने डॉक्टर से नियमित स्वास्थ्य जांच के बारे में बात करनी चाहिए जिनके परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, जो धूम्रपान करते हैं, जिनका वजन अधिक है या जिन्हें पहले से डायबिटीज, हाई BP या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है।
निष्कर्ष
बदलती जीवनशैली के दौर में दिल की सेहत को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है। ज्यादा नमक और अस्वास्थ्यकर फैट वाला भोजन, तनाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, तंबाकू, हाई BP, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे कारक हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह का मुख्य संदेश यही है कि दिल की बीमारी का इंतजार करने के बजाय उसके जोखिम कारकों पर पहले से ध्यान दिया जाए। खासकर युवाओं को भी अपने ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे महत्वपूर्ण पैरामीटर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या हाथ-जॉ/पीठ तक फैलने वाला दर्द जैसे संभावित हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।



