
25 जून, 2026 | नई दिल्ली | Rahul Gandhi Slams Dharmendra Pradhan: देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को लेकर मचे घमासान के बीच राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of the Opposition) और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे देश के युवाओं से तुरंत माफी मांगने और अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है.
“सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार”: राहुल गांधी का कड़ा प्रहार
सोशल मीडिया पर जारी एक बेहद आक्रामक बयान में राहुल गांधी ने मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने के लिए ओछी राजनीति पर उतर आई है। राहुल गांधी के शब्दों में:
“सत्ता के अहंकार में पूरी तरह अंधी हो चुकी मोदी सरकार अब उस स्तर पर पहुंच गई है, जहां देश का शिक्षा मंत्री उन मासूम छात्रों को ‘आतंकवादी’ कह रहा है जो केवल अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और एक सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे हैं।”
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि जो कोई भी आज सरकार की कमियों या नीतियों पर सवाल उठाता है, उसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा तुरंत ‘देशद्रोही’ या ‘ट्रेटर’ का टैग दे दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की पूरी राजनीति बस इसी एक ढर्रे पर टिकी हुई है.
धर्मेंद्र प्रधान का विवादित बयान: “ये दहशतगर्दों की बी-टीम हैं”
इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों और विपक्ष पर निशाना साधा था। एक निजी समाचार चैनल (NDTV) से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विरोध प्रदर्शनों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा था:
“ये दहशतगर्दों की बी-टीम है। ये वो लोग हैं जिन्हें देश के लोकतंत्र और जनता ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ये अब अपना भेष बदलकर वापस आए हैं और देश की परीक्षा प्रणाली को निशाना बना रहे हैं। ये लोग उन ताकतों के समर्थन में नारे लगाते हैं जो देश को बांटना चाहती हैं। इनकी पहचान हो चुकी है।” [cite: Pradhan, earlier, strongly criticised the protesters and accused opposition parties of exploiting the issue for political gain. “Ye dehshatgardon ka B-team hai. Jin logon ko prajatantra ne sare se aswikar kiya. (They are the B-team of terrorists. Those whom the people rejected in a democracy),” the minister told NDTV, adding, “They have returned in disguise and are now targeting the system. They raise slogans in support of those who want to divide the country. They have been identified]
‘शिक्षा व्यवस्था बन चुकी है एक्सटॉर्शन रैकेट’ — कोटा के बाद राहुल का फिर दावा
धर्मेंद्र प्रधान के इस हमले पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि सरकार उन पर चाहे जितने हमले कर ले, वह पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने हाल ही में राजस्थान के कोटा में दिए अपने बयान को दोहराते हुए कहा:
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वसूली का धंधा: आज देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था सिर्फ एक ‘एक्सटॉर्शन रैकेट’ (Extortion Racket – जबरन वसूली का धंधा) बनकर रह गई है.
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लड़ाई जारी रहेगी: राहुल गांधी ने संकल्प लिया कि वह इस व्यवस्था को ऐसे ही बर्बाद नहीं होने देंगे.
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अधिकारों की बात: देश के हर बच्चे को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पारदर्शी व निष्पक्ष परीक्षाएं दिलाना उनका लक्ष्य है और इसके लिए वह हमेशा आवाज उठाते रहेंगे.
जंतर-मंतर पर 4 दिनों से डटे हैं छात्र; दीपके कर रहे हैं नेतृत्व
दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक विवाद (NEET Paper Leak Controversy) और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ पिछले चार दिनों से छात्रों और विभिन्न युवा संगठनों का अनवरत धरना जारी है .
इस छात्र आंदोलन की कमान छात्र कार्यकर्ता दीपके (Dipke) संभाल रहे हैं। दीपके ने इस टूटी हुई परीक्षा प्रणाली के खिलाफ सबसे पहले 6 जून को जंतर-मंतर पर अकेले मोर्चा खोला था. तब से लेकर अब तक वे और उनके साथी देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा कर चुके हैं, ताकि आम नागरिकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस मुहिम से जोड़कर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाया जा सके.
राहुल गांधी बनाम धर्मेंद्र प्रधान: मुख्य विवाद बिंदु
देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जहां एक तरफ छात्र और युवा सड़कों पर उतरकर अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही यह जुबानी जंग और तीखे आरोप-प्रत्यारोप इस बात का संकेत हैं कि यह विवाद जल्द थमता नजर नहीं आ रहा है. अब देखना यह होगा कि सरकार छात्रों के इस गुस्से को शांत करने और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
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