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Mallikarjun Kharge at Sankalpa Samavesha programme: शांत रहो, निकम्मे कहीं के!”— ‘DK-DK’ के नारों पर भड़के मल्लिकार्जुन खड़गे; बेंगलुरु में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मंच से लगाई कड़ी फटकार

22 जून, 2026 | बेंगलुरु | Mallikarjun Kharge at Sankalpa Samavesha programme: कर्नाटक कांग्रेस के भीतर की अंदरूनी गुटबाजी और व्यक्ति-पूजा (Personality Politics) एक बार फिर सरेआम मंच पर उजागर हो गई है। बेंगलुरु में आयोजित कांग्रेस के ‘संकल्प समावेश’ (Sankalpa Samavesha) कार्यक्रम के दौरान एक बेहद हैरान करने वाला वाकया सामने आया, जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) अपने ही कार्यकर्ताओं पर बुरी तरह भड़क गए।

मंच से वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद के शपथ ग्रहण और पार्टी के एजेंडे पर बात चल रही थी, लेकिन इसी बीच भीड़ में मौजूद एक गुट ने कर्नाटक के नवनियुक्त मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के समर्थन में ‘DK-DK’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। कार्यकर्ताओं की इस अनुशासनहीनता को देख खड़गे ने अपना आपा खो दिया और मंच से ही माइक पर कार्यकर्ताओं को ‘निकम्मा’ तक कह डाला।

“यह किसी व्यक्ति का शो नहीं है”— खड़गे ने दी अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी

कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि जब भीड़ ‘DK-DK’ के नारे लगा रही थी, तब खुद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और एआईसीसी (AICC) महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला हाथ के इशारे से कार्यकर्ताओं को शांत रहने की अपील कर रहे थे। लेकिन जब नारेबाजी नहीं रुकी, तो मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण को बीच में ही रोक दिया और बेहद सख्त लहजे में कहा:

“क्या तुम्हारे यहां चिल्लाने से पूरा देश प्रभावित हो जाएगा? यह किसी एक व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं है, यह पार्टी का आधिकारिक कार्यक्रम है। तुम सब निकम्मे (Useless fellows)… यहां किसी व्यक्ति की पूजा नहीं होगी। हम सब यहां पार्टी के कार्यक्रम के लिए आए हैं जो हम सभी को एक साथ जोड़ता है।”

अपने 58 साल के लंबे राजनीतिक करियर का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा, “मेरे पास 58 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है। मैंने यहां कई नेताओं को आते-जाते देखा है; भले ही पार्टी में उनका योगदान छोटा रहा हो, लेकिन पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। जो कोई भी यहां चिल्ला रहा है, उसकी फुटेज रिकॉर्ड हो रही है। मैं इस पूरी फुटेज की समीक्षा करने के बाद कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करूँगा।”

लंबी खींचतान के बाद 4 जून को सीएम बने हैं डीके शिवकुमार

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह उत्साह और नारेबाजी अकारण नहीं है। हाल ही में, यानी 4 जून को एक लंबी राजनीतिक खींचतान के बाद डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। उनके साथ उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और 12 सदस्यीय मंत्रिपरिषद ने भी कार्यभार संभाला है। इस शपथ ग्रहण के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच पिछले काफी समय से चल रहा नेतृत्व का विवाद खत्म हुआ था।

सिल्क कुर्ता और धोती पहने डीके शिवकुमार ने अपने श्रद्धेय संत ‘वीरा गंगाधरा अजैया’ के नाम पर और हाथ में भारत के संविधान की प्रति लेकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

क्या है इस नारेबाजी के पीछे की असली इनसाइड स्टोरी?

कर्नाटक में साल 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली अप्रत्याशित जीत के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर लगातार टकराव चल रहा था। उस वक्त आलाकमान ने सिद्धारमैया को सीएम बनाया था और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम पद से संतोष करते हुए अपनी बारी का इंतजार करने को कहा गया था।

पार्टी के भीतर एक ‘रोटेशनल फॉर्मूला’ (ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री पद) तय हुआ था। पिछले साल नवंबर में जैसे ही सिद्धारमैया सरकार ने अपने ढाई साल का कार्यकाल पूरा किया, डीके शिवकुमार के खेमे ने दिल्ली दरबार (हाईकमान) पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आखिरकार, आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस आलाकमान को झुकना पड़ा और जून की शुरुआत में डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंप दी गई। यही वजह है कि उनके समर्थक अब हर जगह अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे को कतई पसंद नहीं आया।

मुख्यमंत्री बनते ही डीके शिवकुमार के बड़े फैसले

शपथ लेने के तुरंत बाद सीएम डीके शिवकुमार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की और युवाओं व छात्रों के लिए बड़े फैसलों का ऐलान किया:

  • फ्री बस पास: राज्य के सभी छात्रों के लिए मुफ्त बस पास की सुविधा को मंजूरी दी गई।

  • भारत जोड़ो युवा संघ: युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्यभर में 10,000 ‘भारत जोड़ो युवा संघों’ के गठन की घोषणा की गई।

कर्नाटक कांग्रेस का अंदरूनी संकट: एक नजर में मुख्य ब्यौरा

राजनीतिक घटनाक्रम वर्तमान स्थिति और विवाद आलाकमान का रुख और चिंता
नारेबाजी का विवाद संकल्प समावेश में कार्यकर्ताओं ने ‘DK-DK’ के नारे लगाए। खड़गे ने कार्यकर्ताओं को ‘निकम्मा’ कहा; वीडियो फुटेज देखकर कार्रवाई की चेतावनी।
सत्ता का रोटेशन ढाई साल बाद सिद्धारमैया की जगह 4 जून को डीके शिवकुमार बने सीएम। गुटबाजी खत्म होने के बजाय और ज्यादा आक्रामक रूप में सामने आ रही है।
शिवकुमार के फैसले छात्रों के लिए फ्री बस पास और 10,000 भारत जोड़ो युवा संघ। जनता के बीच पैठ मजबूत करने के लिए लोक-लुभावन योजनाओं पर फोकस।

भले ही डीके शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो चुके हैं, लेकिन पार्टी के भीतर की गुटबाजी अभी भी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे का सार्वजनिक मंच पर इस कदर गुस्सा होना यह साफ करता है कि कांग्रेस आलाकमान राज्य में किसी भी तरह की व्यक्ति-पूजा या समानांतर पावर सेंटर को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अनुशासन की यह सीख कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य के लिए कितनी कारगर साबित होती है, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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