महाराष्ट्रदेश

Congress and Shiv Sena Alliance Plan: उद्धव गुट में बगावत की असली वजह आई सामने! बागी सांसदों का बड़ा दावा— ‘कांग्रेस में होने जा रहा था शिवसेना (UBT) का विलय’

18 जून, 2026 | मुंबई/नई दिल्ली | Congress and Shiv Sena Alliance Plan: महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला देने वाले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के ताजा संकट को लेकर एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पार्टी से बगावत कर अंडरग्राउंड हुए 6 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की है। इन बागी सांसदों ने स्पीकर के सामने दावा किया है कि वे किसी लालच में नहीं, बल्कि शिवसेना (UBT) का कांग्रेस में संभावित विलय (Merger) होने के डर से पार्टी छोड़ रहे हैं।

इस बीच, बगावत की आंच तेज होते ही उद्धव ठाकरे खेमे ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ठाकरे गुट ने पाला बदलने की तैयारी कर रहे इन छह सांसदों को 7 दिनों का ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर दिया है। इसके साथ ही, शिवसेना (UBT) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से गुहार लगाई है कि वे इन बागी सांसदों की अलग गुट बनाने और संसद में सीटें बदलने की मांग को पूरी तरह से खारिज (Snub) कर दें।

4 साल में तीसरा बड़ा विभाजन; महाराष्ट्र पुलिस ने बढ़ाई सांसदों की सुरक्षा

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह हफ्ता इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। पिछले 4 साल के भीतर राज्य ने यह तीसरा सबसे बड़ा राजनीतिक विभाजन (Third Major Political Split) देखा है। इससे पहले साल 2022 में मूल शिवसेना और साल 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में ऐतिहासिक टूट हुई थी।

ताजा घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र के गृह विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए बगावत के केंद्र में रहे इन छह सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है (Enhanced Security Cover)। यह सियासी हलचल ऐसे समय में हो रही है जब देश की राजनीति में पहले से ही दलबदल का दौर चल रहा है। अभी कुछ ही दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करके भाजपा नीत एनडीए (NDA) को समर्थन देने का प्रस्ताव दिया था, जिसके बाद अब महाराष्ट्र की इस नई टूट ने देश के राजनीतिक समीकरणों को गरमा दिया है।

लोकसभा स्पीकर के सामने क्या बोले बागी सांसद?

संसद भवन में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर बागी सांसदों ने अपना पक्ष रखा। सांसदों ने दावा किया कि शिवसेना (UBT) के कुछ बेहद वरिष्ठ नेता पर्दे के पीछे से पूरी पार्टी को कांग्रेस में मर्ज करने की गुप्त योजना बना रहे थे। चूंकि कांग्रेस महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन का हिस्सा है और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सहयोगी है, इसलिए पार्टी धीरे-धीरे अपनी मूल विचारधारा खोकर कांग्रेस के रंग में रंगती जा रही थी।

सांसे रोकने वाली इस राजनीतिक उठापटक के बीच, बागी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से एक और तकनीकी मांग की है। उन्होंने लिखित अनुरोध किया है कि लोकसभा के भीतर उनकी बैठने की व्यवस्था (Seat Allocation) को बदला जाए और उन्हें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के 7 सांसदों की सीटों के ठीक पास जगह दी जाए। सांसदों का कहना है कि वे कांग्रेस में जाने के बजाय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में विलय करने के पक्षधर हैं।

“संजय राउत बन गए हैं कांग्रेस के एजेंट” — शिंदे गुट का तीखा हमला

इस पूरे मामले पर एकनाथ शिंदे गुट के लोकसभा सांसद नरेश म्हस्के (Naresh Mhaske) ने एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्धव ठाकरे और संजय राउत पर तीखे तीर चलाए।

नरेश म्हस्के ने मीडिया के सामने आरोप लगाते हुए कहा:

“शिवसेना (UBT) के कई सांसदों ने अरविंद सावंत के जरिए उद्धव ठाकरे से मिलने का बार-बार समय मांगा था, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। सांसदों के मन में यह गहरा डर बैठ गया था कि अंततः उनकी पार्टी का वजूद खत्म करके उसे कांग्रेस में मिला दिया जाएगा। इसीलिए उन्होंने अपना अलग रास्ता चुनने का फैसला किया। सच तो यह है कि संजय राउत अब उद्धव ठाकरे के सिपहसालार नहीं, बल्कि ‘कांग्रेस के एजेंट’ बन चुके हैं और वे ही पार्टी को इस विनाशकारी दिशा में ले जा रहे हैं।”

बागी नेताओं ने संजय राउत के उस कथित बयान का भी हवाला दिया, जिसमें राउत ने सुझाव दिया था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को खुद का विलय कांग्रेस में कर लेना चाहिए। सांसदों का कहना है कि राउत के इस बयान ने उनके इस डर को 100% सच साबित कर दिया कि ऐसा ही कुछ शिवसेना (UBT) के साथ भी करने की तैयारी चल रही थी।

उद्धव ठाकरे के लिए ‘डेजा वू’ का समय: इतिहास ने खुद को दोहराया

पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के लिए यह समय बेहद दर्दनाक और ‘डेजा वू’ (अतीत का अहसास) जैसा है। यह पूरा घटनाक्रम उन्हें चार साल पहले एकनाथ शिंदे द्वारा की गई उसी बगावत की याद दिला रहा है, जिसके कारण उनकी महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी और उन्हें मुख्यमंत्री पद से मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा था। एक बार फिर वही कहानी, वही स्क्रिप्ट और वही तरीके उद्धव ठाकरे के सामने खड़े हैं।

महाराष्ट्र शिवसेना (UBT) संकट 2026: मुख्य बिंदु तालिका

प्रमुख पक्ष और नेता उठाए गए कदम और मांगें बगावत और कार्रवाई का मुख्य कारण
उद्धव ठाकरे खेमा (UBT) बागी सांसदों को 7 दिनों का शो-कॉज नोटिस; स्पीकर से सीटें न बदलने की अपील। सांसदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और अनुशासनहीनता का आरोप।
6 बागी सांसद लोकसभा स्पीकर से मुलाकात; एकनाथ शिंदे गुट की सीटों के पास सीट अलॉटमेंट की मांग। उद्धव ठाकरे द्वारा मुलाकात न देना और पार्टी का कांग्रेस में विलय होने का गहरा डर।
एकनाथ शिंदे गुट (नाइश म्हस्के) प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्धव और संजय राउत को घेरा; बागियों का स्वागत किया। संजय राउत पर ‘कांग्रेस के एजेंट’ के रूप में काम करने और पार्टी को खत्म करने का आरोप।

महाराष्ट्र की यह राजनीतिक लड़ाई अब पूरी तरह से वैचारिक और तकनीकी मोड़ पर आ चुकी है। 7 दिनों का कारण बताओ नोटिस देकर उद्धव ठाकरे ने बागियों पर दलबदल कानून की तलवार लटका दी है, तो वहीं सांसदों ने कांग्रेस में विलय के डर को ढाल बनाकर अपने कदम को सही ठहराया है। अब पूरा दारोमदार लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के फैसले पर टिका है कि वे इस गुट को मान्यता देते हैं या नहीं।

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