
6 जून, 2026 | कोलकाता | Sourav Ganguly on Yusuf Pathan: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी भारी उथल-पुथल के बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) का एक बड़ा और बेहद कड़ा बयान सामने आया है। गांगुली ने उन तमाम मीडिया रिपोर्टों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) से इस्तीफा देने के लिए कहा था।
सौरव गांगुली ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि उनका किसी भी स्तर पर किसी के साथ भी कभी कोई ‘राजनीतिक लेना-देना’ नहीं रहा है।
क्या था पूरा विवाद? आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट पर भड़के दादा
दरअसल, हाल ही में बंगाली अखबार ‘आनंदबाजार पत्रिका’ में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सौरव गांगुली ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कहने पर बहरामपुर से टीएमसी सांसद यूसुफ पठान से संपर्क किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, गांगुली ने यूसुफ पठान तक ममता बनर्जी का यह संदेश पहुंचाया था कि वे अपनी संसदीय सीट से इस्तीफा दे दें, ताकि ममता बनर्जी उस सीट पर होने वाले उपचुनाव में खड़े होकर संसद (लोकसभा) में प्रवेश कर सकें।
इन दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सौरव गांगुली ने कहा:
“ये सभी आरोप पूरी तरह से असत्य हैं और सच्चाई को ताक पर रखकर लगाए गए हैं। मैं मीडिया से अनुरोध करता हूं कि वे तथ्यों की सत्यता की जांच किए बिना इस तरह की अफवाहों और अटकलों का शिकार न बनें। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लेख को प्रकाशित करने से पहले मुझसे इसका वेरिफिकेशन करना भी जरूरी नहीं समझा गया।”
गांगुली ने साफ शब्दों में रिकॉर्ड पर लाते हुए कहा, “मुझे सुश्री ममता बनर्जी द्वारा कभी भी यूसुफ पठान को अपनी संसदीय सीट छोड़ने या ऐसा कोई भी संदेश देने के लिए नहीं कहा गया था। मैं अपने पूरे जीवन में कभी भी राजनीतिक मामलों में शामिल नहीं रहा हूं।”
ममता बनर्जी की हार और बहरामपुर सीट का सियासी समीकरण
इस पूरे विवाद की जड़ें बंगाल के हालिया चुनावी नतीजों से जुड़ी हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के हाथों मिली करारी शिकस्त के बाद, ऐसी चर्चाएं थीं कि ममता बनर्जी संसद के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही हैं। इसके लिए बहरामपुर सीट को सबसे सुरक्षित माना जा रहा था।
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यूसुफ पठान बने थे ‘जायंट किलर’: पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने राजनीति में कदम रखते ही इतिहास रच दिया था। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को उनके ही गढ़ बहरामपुर में मात दी थी।
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टीएमसी का गढ़: करीब 50 से 52 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले बहरामपुर निर्वाचन क्षेत्र को तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीटों में से एक माना जाता है, यही वजह है कि कयास लगाए जा रहे थे कि ममता बनर्जी यहां से उपचुनाव लड़ना चाहती हैं।
2026 विधानसभा चुनाव के बाद अस्तित्व के संकट से जूझ रही TMC
सौरव गांगुली का यह खंडन ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक और अस्तित्व के संकट (Existential Crisis) से गुजर रही है। 2026 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है।
पार्टी के भीतर बगावत इस कदर बढ़ चुकी है कि टीएमसी के 60 से अधिक विधायकों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया और निष्कासित नेता रितब्रत बनर्जी को राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) चुन लिया। पार्टी के कई कद्दावर नेता और विधायक खुलेआम शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जाहिर कर रहे हैं और सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं।
बंगाल का राजनीतिक घटनाक्रम 2026: एक नजर में
सौरव गांगुली के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आधिकारिक प्रतिक्रिया, बहरामपुर सीट की ग्राउंड रिपोर्ट और पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़ी हर निष्पक्ष व सटीक लाइव ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल को फॉलो करना न भूलें।



