
गोरखपुर में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर लगातार कार्रवाई के बावजूद नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से लगातार ई-चालान काटे जा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में वाहन मालिक जुर्माना जमा नहीं कर रहे हैं। स्थिति यह है कि कई वाहनों के खिलाफ एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों बार चालान की कार्रवाई हो चुकी है, इसके बावजूद वे सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं।
गोरखपुर जिले में परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक साल के दौरान यातायात नियमों और अन्य अनियमितताओं के मामले में 19,887 चालान किए गए। इनमें से अब तक केवल 5,254 चालानों का निस्तारण हो पाया है, जबकि 14,633 चालान अभी लंबित हैं। लंबित मामलों के कारण बड़ी रकम की वसूली भी अटकी हुई है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 4 करोड़ 47 लाख रुपये का चालान बकाया है, जबकि लगभग 5 करोड़ 91 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है।
चालान कटता रहा, लेकिन नियम तोड़ने वालों पर असर नहीं
ई-चालान व्यवस्था लागू होने के बाद यातायात नियमों का उल्लंघन दर्ज करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। वाहन का नंबर कैमरे या अन्य माध्यमों से रिकॉर्ड होने के बाद चालान ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज हो जाता है। इसके बावजूद कई वाहन मालिक समय पर जुर्माना जमा नहीं करते।
ऐसे मामलों में समस्या सिर्फ बकाया जुर्माने तक सीमित नहीं रहती। जब कोई वाहन बार-बार नियम तोड़ता है और हर बार चालान होने के बाद भी सड़क पर चलता रहता है, तो इससे सड़क सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुछ वाहनों के खिलाफ इतनी बार कार्रवाई हो चुकी है कि उनके चालान की संख्या दर्जनों में पहुंच गई है।
यानी एक तरफ विभाग नियम तोड़ने पर चालान काट रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ वाहन चालक इसे गंभीरता से लेते हुए जुर्माना जमा नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि बार-बार होने वाली कार्रवाई के बावजूद कुछ वाहनों का सड़क पर संचालन जारी रहता है।
गोरखपुर में एक साल में करीब 20 हजार चालान
परिवहन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो गोरखपुर में एक वर्ष के दौरान कुल 19,887 चालान किए गए। इनमें से 5,254 मामलों का निस्तारण हो चुका है, लेकिन 14,633 मामले अभी भी लंबित हैं।
लंबित चालानों की यह संख्या बताती है कि ई-चालान व्यवस्था के बावजूद जुर्माने की वसूली और मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। विभाग को ऐसे मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
बताया गया है कि ई-चालान कटने के बाद वाहन मालिक को जुर्माना जमा करने के लिए निर्धारित अवधि दी जाती है। यदि 90 दिन तक जुर्माना जमा नहीं किया जाता तो संबंधित मामले को वसूली के लिए न्यायालय भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
देशभर में भी ई-चालान का बड़ा बकाया
ई-चालान का मामला सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग राज्यों में भी बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विभिन्न राज्यों में करीब 45 हजार करोड़ रुपये का ई-चालान बकाया बताया गया है, जबकि लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
इन आंकड़ों से साफ है कि डिजिटल चालान व्यवस्था ने नियम उल्लंघन को रिकॉर्ड करने की क्षमता तो बढ़ाई है, लेकिन चालान के बाद जुर्माने की वसूली और समय पर निस्तारण अभी भी बड़ी चुनौती है।
सड़क सुरक्षा के लिहाज से इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि चालान का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं होता। इसका एक प्रमुख उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना भी है। यदि कोई चालक बार-बार नियम तोड़ता है और उसके खिलाफ कार्रवाई के बावजूद वाहन का संचालन जारी रहता है, तो इससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एक वाहन का 79 बार चालान, बसों पर 90 और 71 बार कार्रवाई
गोरखपुर मंडल में बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। परिवहन विभाग के अनुसार 97 ऐसे वाहन सामने आए हैं, जिनका चालान 50 से अधिक बार काटा जा चुका है।
गोरखपुर की एक बाइक के खिलाफ 79 बार चालान दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इसी तरह देवरिया की एक बस के खिलाफ 90 बार, जबकि दूसरी बस के खिलाफ 71 बार चालान दर्ज किया गया है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ वाहन मालिक या चालक बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। सामान्य तौर पर एक वाहन के खिलाफ लगातार चालान होना इस बात का संकेत है कि पहले की कार्रवाई से नियम पालन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
इसी कारण परिवहन विभाग अब ऐसे मामलों में केवल चालान काटने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वाहन के पंजीयन और चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई कर रहा है।
एक साल में एक फार्च्यूनर का 26 बार चालान
गोरखपुर में बार-बार चालान का एक चर्चित मामला चार फाटक हादसे से जुड़े प्रॉपर्टी डीलर गोल्डेन साहनी की फार्च्यूनर गाड़ी से संबंधित बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस वाहन का केवल एक वर्ष में 26 बार चालान किया गया था।
मामले में परिवहन विभाग ने सख्ती दिखाते हुए चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और UP 32 LR 0013 नंबर की फार्च्यूनर का पंजीयन निलंबित कर दिया।
यह उदाहरण बताता है कि विभाग अब बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ केवल आर्थिक दंड तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पंजीयन और लाइसेंस से जुड़े कदम भी उठा रहा है।
50 से ज्यादा चालान वाले 40 वाहनों का पंजीयन निलंबित
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी अरुण कुमार के मुताबिक ई-चालान जारी होने के बाद वाहन मालिक को जुर्माना जमा करने के लिए 90 दिन तक इंतजार किया जाता है। यदि इस अवधि में जुर्माना जमा नहीं किया जाता तो चालान की वसूली के लिए संबंधित मामला अदालत भेज दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि 50 या उससे अधिक चालान वाले 40 वाहनों का पंजीयन निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा 30 या उससे अधिक चालान वाले वाहनों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं।
विभाग की कार्रवाई अब वाहन तक सीमित नहीं रहने वाली है। बार-बार नियम तोड़ने वाले मामलों में संबंधित चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को भी निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
क्यों जरूरी है बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती?
सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए यातायात नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। तेज गति, गलत दिशा में वाहन चलाना, सिग्नल का उल्लंघन, बिना जरूरी दस्तावेज वाहन चलाना या अन्य नियमों की अनदेखी सड़क पर जोखिम बढ़ा सकती है।
केवल चालान काटने से समस्या का समाधान तभी संभव है जब वाहन चालक जुर्माना जमा करने के साथ भविष्य में नियमों का पालन भी करे। लेकिन जब एक ही वाहन का दर्जनों बार चालान हो जाए, तो यह सवाल उठता है कि पहले की कार्रवाई का उस चालक पर कितना प्रभाव पड़ा।
इसी वजह से परिवहन विभाग की ओर से बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान कर उनके पंजीयन और चालकों के लाइसेंस पर कार्रवाई की जा रही है।
ई-चालान के बाद आगे क्या होगा?
ई-चालान व्यवस्था में नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जाता है। वाहन मालिक को जुर्माना जमा करने का अवसर मिलता है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर मामला आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जा सकता है।
गोरखपुर में परिवहन विभाग की मौजूदा कार्रवाई से संकेत मिलता है कि अब बार-बार चालान वाले वाहनों की निगरानी और सख्त की जा रही है। 30 या उससे अधिक चालान वाले वाहनों को नोटिस और 50 या उससे अधिक चालान वाले वाहनों पर पंजीयन निलंबन जैसी कार्रवाई की जा रही है।
आने वाले समय में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। इससे उन वाहन चालकों पर असर पड़ सकता है जो लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
निष्कर्ष
गोरखपुर में सामने आए ई-चालान के आंकड़े सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की चुनौती को दिखाते हैं। एक साल में 19,887 चालान होने के बावजूद 14,633 मामलों का लंबित रहना और कई वाहनों के खिलाफ दर्जनों बार कार्रवाई होना बताता है कि सिर्फ चालान काटना पर्याप्त नहीं है।
अब परिवहन विभाग ने बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों के पंजीयन और चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई शुरू की है। इसका उद्देश्य केवल बकाया जुर्माने की वसूली करना नहीं, बल्कि ऐसे वाहन चालकों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना भी है, जिनके खिलाफ लगातार यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं।
सड़क सुरक्षा तभी बेहतर हो सकती है जब चालान के साथ-साथ वाहन चालक भी यातायात नियमों को गंभीरता से लें और बार-बार होने वाले उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो।



