
CJP Protest Core Committee Controversy: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन ने संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को सामने ला दिया है। CJP की नई कोर कमेटी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर जगह नहीं दिए जाने के विरोध में दो युवाओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। कई दिनों तक जारी रही भूख हड़ताल के बाद सोमवार को दोनों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं की पहचान मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या के रूप में हुई है। दोनों ने CJP नेतृत्व पर कथित पक्षपात का आरोप लगाते हुए संगठन में अधिक आंतरिक लोकतंत्र और राज्यों के स्वयंसेवकों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।
CJP की कोर कमेटी को लेकर क्यों शुरू हुआ विवाद?
मिली जानकारी के अनुसार, मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या 6 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे थे। दोनों छत्रपति संभाजीनगर के वालुज MIDC इलाके में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के घर के बाहर धरने पर बैठे थे।
बताया गया कि इसी स्थान पर CJP की कोर टीम ने आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर बैठकें की थीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संगठन की नई कोर कमेटी तैयार करते समय जमीनी स्तर पर आंदोलन से जुड़े रहे कई स्वयंसेवकों को नजरअंदाज किया गया, जबकि संस्थापक के करीबी लोगों को कमेटी में प्राथमिकता दी गई।
इसी मुद्दे को लेकर दोनों युवाओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। उनका कहना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं, बल्कि देशभर के युवाओं से जुड़ा अभियान है। ऐसे में संगठन के महत्वपूर्ण फैसलों में अलग-अलग राज्यों और जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी होनी चाहिए।
अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी आंदोलन जारी रखने का दावा
भूख हड़ताल के कई दिनों बाद सोमवार को मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मीडिया से बातचीत में मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें जबरन अस्पताल लेकर गई। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपना आंदोलन खत्म करने से इनकार किया। मनीष का कहना था कि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उनकी मांगें जारी रहेंगी और वे अपने विरोध से पीछे नहीं हटेंगे।
दोनों प्रदर्शनकारियों के अस्पताल पहुंचने के बाद विरोध स्थल पर दो अन्य स्वयंसेवक पहुंचे। उन्होंने घोषणा की कि वे भी भूख हड़ताल को आगे बढ़ाएंगे और CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखेंगे।
इस घटनाक्रम ने CJP के आंदोलन के भीतर नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
मनीष और राहुल का दावा- जंतर-मंतर आंदोलन में थे सक्रिय
मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनका दावा है कि उस दौरान वे अभिजीत दीपके और दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर आंदोलन में शामिल रहे।
दोनों का आरोप है कि आंदोलन के शुरुआती दौर में कई स्वयंसेवकों ने बिना किसी पद या व्यक्तिगत पहचान की परवाह किए अपना योगदान दिया था। लेकिन अब जब संगठन की रणनीति और भविष्य की दिशा तय करने के लिए कोर कमेटी बनाई गई है, तो उन्हीं जमीनी कार्यकर्ताओं में से कई लोगों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
उनका सवाल है कि अगर आंदोलन में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण थी, तो संगठन की अहम बैठकों और कमेटी में उन्हें प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया गया।
‘सिर्फ करीबी लोगों को बैठक में बुलाया गया’
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि CJP की रणनीतिक बैठकों में अभिजीत दीपके के करीबी लोगों को ही बुलाया गया। उनका कहना है कि संगठन के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और लोकतांत्रिक होनी चाहिए।
मनीष और राहुल की मांग है कि देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़े स्वयंसेवकों को कोर कमेटी में प्रतिनिधित्व मिले। उनके मुताबिक, इससे संगठन की निर्णय प्रक्रिया में केवल एक क्षेत्र या सीमित समूह का प्रभाव नहीं रहेगा और देशभर में काम कर रहे कार्यकर्ताओं की आवाज भी सामने आएगी।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि CJP को किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित संगठन के बजाय सामूहिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
‘हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए’
अहमदाबाद से आए मनीष ब्रह्मभट्ट ने संगठन की नेतृत्व शैली को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आंदोलन की शुरुआत में CJP का कोई एक स्पष्ट चेहरा नहीं था। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान उन्होंने और कई अन्य स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से योगदान दिया।
मनीष का आरोप है कि बाद में जब उन्होंने CJP की टीम से संपर्क करने और संगठन की बैठकों में शामिल होने की कोशिश की, तो उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनका कहना है कि उन्हें रणनीति से जुड़ी बैठक में भी शामिल नहीं किया गया।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि उन्हें संगठन में ऐसा नेतृत्व मॉडल नहीं चाहिए, जिसमें सारी शक्ति किसी एक व्यक्ति के आसपास केंद्रित हो। उन्होंने इसी बात को रखते हुए कहा, “हमें एक और केजरीवाल नहीं चाहिए।”
यह बयान CJP के भीतर नेतृत्व को लेकर प्रदर्शनकारियों की असहमति को स्पष्ट करता है। हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों का आरोप और राजनीतिक दृष्टिकोण है, जिस पर CJP नेतृत्व की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
CJP नेतृत्व पर पक्षपात का आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या का सबसे बड़ा आरोप CJP की नई कोर कमेटी के गठन को लेकर है। उनका कहना है कि कमेटी में चयन के दौरान सभी सक्रिय कार्यकर्ताओं को समान अवसर नहीं दिया गया।
दोनों युवाओं के मुताबिक, आंदोलन में जमीन पर काम करने वाले स्वयंसेवकों की भागीदारी को नजरअंदाज करना संगठन के भविष्य के लिए सही नहीं होगा। वे चाहते हैं कि कोर कमेटी में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतिनिधि शामिल किए जाएं, ताकि फैसले लेने की प्रक्रिया ज्यादा व्यापक हो।
उनका कहना है कि आंदोलन की सफलता सिर्फ नेतृत्व पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उन हजारों स्वयंसेवकों पर भी निर्भर करती है जो जमीन पर लोगों के बीच काम करते हैं।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CJP की कोर कमेटी में अधिक पारदर्शिता और व्यापक प्रतिनिधित्व को लेकर है। उनका कहना है कि कमेटी के गठन की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए और आंदोलन में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में जगह मिलनी चाहिए।
इसके अलावा वे चाहते हैं कि अलग-अलग राज्यों के कार्यकर्ताओं को संगठन के महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रतिनिधित्व दिया जाए। उनका तर्क है कि अगर CJP का आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं से जुड़ा है, तो संगठन की रणनीति तय करने वाली टीम में भी देश के अलग-अलग हिस्सों की आवाज सुनाई देनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने नेतृत्व पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा है कि संगठन को आंतरिक लोकतंत्र मजबूत करने की जरूरत है।
अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया का इंतजार
मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या के अस्पताल में भर्ती होने के बाद सामने आए आरोपों पर सोमवार शाम तक CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
इस वजह से फिलहाल विवाद के दोनों पक्षों का पूरा पक्ष सामने नहीं आया है। प्रदर्शनकारी जहां कोर कमेटी के गठन और नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं CJP नेतृत्व की ओर से इन आरोपों पर जवाब आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों के समर्थकों ने विरोध जारी रखने की घोषणा की है। इससे संकेत मिलता है कि कोर कमेटी को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल खत्म नहीं हुआ है।
आंदोलन के भीतर बढ़ती असहमति बनी चुनौती
CJP Protest का यह घटनाक्रम संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है। किसी भी आंदोलन के विस्तार के साथ उसके भीतर नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन जब कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से नेतृत्व पर पक्षपात का आरोप लगाते हैं और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाते हैं, तो यह संगठन के लिए गंभीर आंतरिक चुनौती बन जाती है।
मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या की भूख हड़ताल तथा उनके अस्पताल में भर्ती होने के बाद अब सबकी नजर CJP नेतृत्व की अगली प्रतिक्रिया पर है। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या संगठन कोर कमेटी के गठन पर पुनर्विचार करता है या प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई बातचीत शुरू होती है।
फिलहाल विवाद का केंद्र यही सवाल है कि CJP की आगे की रणनीति कुछ चुनिंदा लोगों के जरिए तय होगी या आंदोलन से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को भी उसमें बराबर की भूमिका मिलेगी। आने वाले दिनों में संगठन की ओर से लिया जाने वाला फैसला इस विवाद की दिशा तय कर सकता है।



