
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और INDI गठबंधन का विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने पहले लंच के दौरान बैठक की और इसके बाद जंतर-मंतर की ओर कूच किया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शन से पहले कहा कि विपक्षी सांसदों की मांग स्पष्ट है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देश की जनता के सामने आना चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि विपक्ष के करीब 300 सांसद चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया गया।
राहुल गांधी ने कहा कि सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखना चाहते थे। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने उनकी बात सुनने के बजाय उनसे मिलने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी दलों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया।
राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार हमारे लिए वैध चुनाव आयुक्त नहीं
जंतर-मंतर पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। उनके मुताबिक, मंगलवार को भी विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग तक जाने से रोका गया था।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर अपनी बात रखेगा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को लेकर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनके लिए ज्ञानेश कुमार देश के वैध चुनाव आयुक्त नहीं हैं।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और SIR से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग को विपक्ष की चिंताओं का जवाब देना चाहिए। पार्टी लगातार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
मंगलवार को भी हुआ था बड़ा प्रदर्शन
यह विरोध प्रदर्शन अचानक शुरू नहीं हुआ है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस और INDI गठबंधन के नेताओं ने प्रदर्शन किया था। विपक्षी नेताओं ने आकाशवाणी भवन के पास धरना दिया था।
बताया गया कि मंगलवार का प्रदर्शन कई घंटे तक चला। देर शाम पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में रात करीब 10 बजे के बाद उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया गया।
मंगलवार की कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया था। पार्टी का कहना था कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के अधिकार को रोका जा रहा है।
चुनाव आयोग के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा
बुधवार को विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। जब INDI गठबंधन के सांसद सेंट्रल दिल्ली में एकत्र होने लगे, उस समय चुनाव आयोग के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात दिखाई दिए।
विपक्षी नेताओं के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए चुनाव आयोग की ओर जाने वाले कई रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग भी की।
कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार और चुनाव आयोग तक पहुंचाना चाहते हैं। वहीं पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
जंतर-मंतर पहुंचे राहुल गांधी, पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
राहुल गांधी के जंतर-मंतर पहुंचने के बाद प्रदर्शन का माहौल और गर्म हो गया। पुलिस ने कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इसके बाद मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई।
कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस की कार्रवाई का विरोध करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। कई प्रदर्शनकारी पैदल ही आगे बढ़ते नजर आए। इस दौरान पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए कार्रवाई की।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उन्हें सड़क से उठाकर पुलिस बस में बैठाया गया। कुछ समय बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया।
प्रियंका गांधी की तबीयत बिगड़ी, बाद में पुलिस ने लिया हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर मौजूद थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के बीच उन्होंने अस्वस्थ महसूस किया और कुछ समय के लिए सड़क पर लेट गईं।
इसके बाद पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। प्रियंका गांधी ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ खींचतान की और उन्हें जमीन पर पटक दिया।
प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस नेता संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अपने मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है।
मनोज कुमार झा ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए राजद सांसद मनोज कुमार झा ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया।
मनोज कुमार झा ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने पुलिस कार्रवाई को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे दृश्य लंबे समय बाद देखने को मिले हैं। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी को ले जा रही बस के सामने भी हंगामा
राहुल गांधी को हिरासत में लेकर जिस बस से ले जाया जा रहा था, उसके आसपास भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान बस के टायर को नुकसान पहुंचाए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद जंतर-मंतर के आसपास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव और बढ़ गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने की कोशिश की।
घटना के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देखा।
कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन का किया ऐलान
लगातार दो दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने अब आंदोलन को और व्यापक बनाने का फैसला किया है। पार्टी ने 8 अक्टूबर को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
कांग्रेस का कहना है कि SIR, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर वह जनता के बीच जाएगी। पार्टी इन मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।
कांग्रेस ने पुलिस द्वारा विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने को भी लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला बताया है। पार्टी का दावा है कि उसका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उसके सवालों का जवाब नहीं मिलता।
SIR और वोट चोरी का मुद्दा बना राजनीतिक टकराव की वजह
दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
कांग्रेस इसी मुद्दे को कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जोड़ रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।
अब राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क से संसद और संसद से जनता के बीच ले जाने की रणनीति अपनाई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
निष्कर्ष
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस तथा INDI गठबंधन का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी सुर्खियों में रहा। जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत तथा विपक्षी नेताओं के आरोपों ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार विपक्ष के इन आरोपों और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।



