अपराध

18 महीने से लापता ‘लेडी डॉन’ की कुएं में मिली लाश, पति-बेटे पर हत्या का आरोप

राजस्थान की राजधानी जयपुर में करीब 18 महीने से रहस्यमय तरीके से लापता महिला की कहानी ने अब एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। शहर के अपराध जगत में ‘लेडी डॉन’ के नाम से पहचानी जाने वाली सीमा उर्फ मिंटू चौधरी की सड़ी-गली लाश एक कुएं से बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक, मिंटू की हत्या मई 2025 में कथित तौर पर उसके पति लालाराम और बेटे हरिओम ने की थी। आरोप है कि हत्या के बाद शव को कपड़े में लपेटकर ऑटो से करीब पांच किलोमीटर दूर एक कुएं में फेंक दिया गया।

मिंटू के अचानक गायब होने के बाद करीब डेढ़ साल तक परिवार और पुलिस के सामने उसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। इस दौरान उसके परिजनों को अलग-अलग बातें बताई जाती रहीं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की कि मिंटू कहीं चली गई है और वह अभी जिंदा है। लेकिन 23 सितंबर को कुएं से बरामद हुई उसकी लाश ने इस लंबे समय से चले आ रहे रहस्य से पर्दा उठा दिया।

18 महीने बाद कुएं से बरामद हुआ शव

पुलिस के अनुसार, 23 सितंबर की दोपहर मिंटू चौधरी का शव एक कुएं से बरामद किया गया। लंबे समय तक पानी में पड़े रहने के कारण शव की हालत काफी खराब हो चुकी थी। शरीर सड़ जाने के कारण उसकी पहचान करना भी पुलिस के लिए आसान नहीं था।

सिविल डिफेंस टीम की मदद से पुलिस ने कुएं से शव को बाहर निकाला। इसके बाद परिजनों को बुलाया गया। बताया गया कि मिंटू के परिवार ने उसके पहने हुए कपड़ों, खास तौर पर शर्ट और पायजामे के आधार पर शव की पहचान की।

शव मिलने के बाद पुलिस को मामला सामान्य गुमशुदगी का नहीं लगा। परिस्थितियां संदिग्ध थीं और इसी आधार पर जांच को हत्या के एंगल से आगे बढ़ाया गया। पुलिस ने मिंटू के परिवार और उसके करीबी लोगों से पूछताछ शुरू की। जांच धीरे-धीरे उसके पति लालाराम तक पहुंची।

पूछताछ में खुली कथित हत्या की कहानी

पुलिस के मुताबिक, लगातार पूछताछ के दौरान लालाराम से मिली जानकारी के आधार पर मिंटू की कथित हत्या का राज सामने आया। पुलिस का कहना है कि 25 मई 2025 को लालाराम और उसके बेटे हरिओम ने कथित तौर पर मिंटू की गला दबाकर हत्या कर दी।

आरोप है कि हत्या के बाद शव को कपड़े में लपेटा गया और फिर मिंटू के ही ऑटो में रखकर करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाया गया। इसके बाद शव को एक कुएं में फेंक दिया गया। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद मुख्य वजहों में से एक था। लालाराम को कथित तौर पर अपनी पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध होने का शक था। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत होने वाले साक्ष्यों से होगी।

पति से अलग रह रही थी मिंटू

मिंटू चौधरी अपने पति लालाराम के साथ नहीं रह रही थी। वह अपने छोटे बेटे के साथ अलग रहती थी। पारिवारिक संबंधों में तनाव के बीच दोनों के बीच दूरी बढ़ गई थी।

पुलिस की जांच में सामने आया कि घटना के बाद छोटा बेटा भी अपने पिता के साथ रहने चला गया था। इसी बीच मिंटू के लापता होने की बात सामने आई, लेकिन परिवार की ओर से लंबे समय तक पुलिस और रिश्तेदारों को उसकी सही स्थिति की जानकारी नहीं दी गई।

जांच में पुलिस ने इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना कि मिंटू के गायब होने के बाद उसके बारे में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जानकारी दी गई थी।

बेटे ने पिता के साथ जाकर दर्ज कराई थी गुमशुदगी

इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि पुलिस के मुताबिक, मिंटू के लापता होने के करीब सात महीने बाद उसके बेटे हरिओम ने अपने पिता लालाराम के साथ थाने पहुंचकर उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पुलिस का आरोप है कि यह पूरी कवायद मिंटू की कथित हत्या के बाद एक ऐसा भ्रम पैदा करने के लिए की गई, जिससे लोगों को लगे कि वह कहीं चली गई है। परिवार और परिचितों के बीच भी उसकी लोकेशन को लेकर अलग-अलग बातें बताई गईं।

कुछ लोगों को कथित तौर पर बताया गया कि मिंटू तिहाड़ जेल में बंद है और किसी मामले में वहां रह रही है। इस वजह से उसके लंबे समय तक दिखाई नहीं देने को लेकर भी तत्काल कोई स्पष्ट संदेह पैदा नहीं हुआ।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मिंटू के लापता होने के बाद आरोपियों ने किस तरह की जानकारी किन-किन लोगों को दी और क्या इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।

कौन थी जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी?

मिंटू चौधरी का वास्तविक नाम सीमा चौधरी बताया गया है। पुलिस के अनुसार, उसका बचपन आर्थिक कठिनाइयों के बीच बीता। उसके माता-पिता मजदूरी करते थे। बचपन में ही उसकी मां की मौत हो गई थी। इसके बाद उसके पिता मोतीराम उसे जयपुर के पास मदारामपुरा गांव ले आए।

पिता के काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहने के कारण सीमा का जीवन धीरे-धीरे मुश्किल परिस्थितियों से घिरता गया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, किशोरावस्था में वह गलत संगत के संपर्क में आ गई थी।

करीब 15 साल की उम्र में उसने ऑटो चलाना शुरू कर दिया था। इसके बाद धीरे-धीरे उसका नाम जयपुर के अपराध जगत में सामने आने लगा। छोटे बालों के कारण भी वह अलग पहचान रखती थी और इसी दौरान उसका नाम मिंटू चौधरी के रूप में चर्चित हुआ।

2009 में पहली बार दर्ज हुआ था मामला

पुलिस के अनुसार, मिंटू का नाम पहली बार वर्ष 2009 में मारपीट से जुड़े एक मामले में सामने आया था। इसके बाद अगले कई वर्षों में उसका नाम अलग-अलग आपराधिक मामलों में दर्ज होता रहा।

करीब 15 वर्षों के दौरान उसके खिलाफ कुल 11 मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें मारपीट, लूट और धमकी जैसे आरोपों से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं। उसके खिलाफ दर्ज ज्यादातर मामले 2010 से 2015 के बीच के बताए जा रहे हैं।

इन्हीं मामलों के कारण जयपुर के अपराध जगत में वह मिंटू चौधरी के नाम से पहचानी जाने लगी और मीडिया तथा स्थानीय स्तर पर उसे ‘लेडी डॉन’ भी कहा जाने लगा।

हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले और किसी अपराध में अदालत द्वारा दोषसिद्धि अलग-अलग कानूनी बातें हैं। इसलिए उसके खिलाफ दर्ज मामलों को उसके खिलाफ लगे आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक किसी मामले में अदालत का अंतिम फैसला उपलब्ध न हो।

पति लालाराम से बिगड़ गए थे रिश्ते

समय के साथ मिंटू ने लालाराम से शादी की, लेकिन दोनों के वैवाहिक संबंध लंबे समय तक सामान्य नहीं रहे। पारिवारिक विवाद के चलते दोनों अलग-अलग रहने लगे थे।

पुलिस की जांच के मुताबिक, इसी पारिवारिक तनाव के बीच पति को मिंटू के कथित दूसरे संबंध को लेकर शक था। पुलिस इसी विवाद को हत्या के पीछे बताए जा रहे कारणों में शामिल मान रही है।

जयपुर के डीसीपी राजर्षि राज वर्मा के अनुसार, पूछताछ के दौरान लालाराम ने अपनी पत्नी की हत्या से जुड़ी जानकारी दी। जांच में उसके बेटे हरिओम की कथित भूमिका भी सामने आई।

18 महीने की तलाश के बाद सामने आया सच

मिंटू चौधरी के लापता होने के बाद करीब 18 महीने तक उसके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी। परिवार और पुलिस के सामने उसकी मौजूदगी को लेकर अलग-अलग बातें आती रहीं। लेकिन 23 सितंबर को कुएं से शव मिलने के बाद पूरे मामले की दिशा बदल गई।

अब पुलिस कथित हत्या, शव को ठिकाने लगाने और गुमशुदगी की झूठी कहानी बनाए रखने से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या के बाद आरोपियों ने किस तरह सबूत छिपाए और करीब डेढ़ साल तक मामले को सामने आने से कैसे रोके रखा।

इस तरह जयपुर की चर्चित मिंटू चौधरी की गुमशुदगी का रहस्य 18 महीने बाद कुएं से मिली लाश के साथ खुला। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सामने आई कहानी में पति और बेटे की कथित भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। अब आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और पोस्टमार्टम समेत अन्य रिपोर्टों पर निर्भर करेगी।

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