
Trishuli 3A Tunnel Rescue: नेपाल में त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्लांट की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को 10 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लगातार 10 दिनों तक अंधेरे, मलबे और बेहद मुश्किल परिस्थितियों के बीच जिंदगी की जंग लड़ने वाले इन दोनों मजदूरों का बच जाना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। मशहूर टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने इस ऑपरेशन को ‘असाधारण’ बताते हुए कहा है कि दुनिया में इस तरह का रेस्क्यू ऑपरेशन पहले कभी नहीं हुआ।
अर्नोल्ड डिक्स वही विशेषज्ञ हैं, जो साल 2023 में भारत के उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों के बचाव अभियान के दौरान काफी चर्चा में आए थे। इस बार वह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से नेपाल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को दूर से मार्गदर्शन दे रहे थे।
त्रिशूली-3A टनल में कैसे फंसे मजदूर?
नेपाल में 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ और अचानक बढ़े जलस्तर ने भारी तबाही मचाई थी। बाढ़ के कारण रसुवा क्षेत्र में मौजूद कई पावर प्लांट प्रभावित हुए। इसी दौरान त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में भी भारी मात्रा में चट्टान, कीचड़ और मलबा पहुंच गया।
सुरंग का एक हिस्सा मलबे और बड़े-बड़े पत्थरों से बंद हो गया। इसके कारण अंदर मौजूद कर्मचारी बाहर नहीं निकल सके। रेस्क्यू टीम को यह भी पता नहीं था कि सुरंग के अंदर कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लोग बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।
इसके बाद नेपाल आर्मी समेत कई बचाव दलों ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कई दिनों तक भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया और सुरंग के अंदर पाइप डालकर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई, ताकि अंदर ऑक्सीजन की कमी न हो और जहरीली गैसों का खतरा कम किया जा सके।
10 दिन बाद मिली जिंदगी की बड़ी खबर
लगातार कई दिनों की कोशिश के बाद आखिरकार रेस्क्यू टीम ने दो मजदूरों को सुरंग से जिंदा बाहर निकाल लिया। 10 दिनों तक बिना बिजली और रोशनी के सुरंग के अंदर रहने के बावजूद दोनों का जीवित मिलना बचाव दल के लिए बड़ी राहत लेकर आया।
रेस्क्यू विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने इस सफलता को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दो लोगों को जिंदा बाहर निकालना अपने आप में एक बड़ी जीत है। उनके मुताबिक, यह ऑपरेशन दुनिया के लिए एक ऐसा उदाहरण है, जिसने टनल रेस्क्यू की पुरानी समझ को भी चुनौती दी है।
डिक्स ने कहा कि कई पावर स्टेशनों के तबाह होने और एक साथ अलग-अलग सुरंगों में रेस्क्यू अभियान चलाने जैसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। इसलिए नेपाल में चलाया गया यह बचाव अभियान अपने आप में बेहद असाधारण है।
‘Goldilocks Zone’ ने बचाई मजदूरों की जान?
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विशेषज्ञों ने सुरंग के अंदर कुछ ऐसे संभावित हिस्सों की पहचान की थी, जहां परिस्थितियां इंसान के जीवित रहने के लिए अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती थीं। इन्हें अर्नोल्ड डिक्स ने ‘Goldilocks Zones’ बताया।
इन जगहों पर पानी का दबाव, मलबे की स्थिति और हवा की उपलब्धता ऐसी हो सकती थी कि कोई व्यक्ति कुछ समय तक जिंदा रह सके। अब दो मजदूरों के सुरक्षित मिलने के बाद इन संभावित सुरक्षित क्षेत्रों को लेकर रेस्क्यू टीम का भरोसा और मजबूत हुआ है।
डिक्स ने कहा कि दो लोगों के जिंदा मिलने से यह साबित हुआ है कि सुरंग के भीतर कुछ ऐसे हिस्से मौजूद हैं, जहां लोग कठिन परिस्थितियों के बावजूद जीवित रह सकते हैं। इससे अब अन्य लापता कर्मचारियों को खोजने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
बाढ़ से बचने के लिए ऊपर की ओर भागे होंगे मजदूर
अर्नोल्ड डिक्स के मुताबिक, जब बाढ़ का पानी तेजी से सुरंग में घुसा होगा, तो वहां काम कर रहे मजदूरों ने संभवतः जान बचाने के लिए सुरंग के ऊपरी हिस्से की ओर दौड़ लगाई होगी।
उनके सामने सिर्फ पानी का खतरा नहीं था। तेज बहाव के साथ बड़े पत्थर, कीचड़, चट्टान और भारी मलबा भी सुरंग के भीतर आगे बढ़ रहा था। ऐसी स्थिति में मजदूरों के पास बचने के लिए बहुत कम समय रहा होगा।
डिक्स ने बताया कि पहाड़ों में बने भूमिगत पावर स्टेशन आमतौर पर सुरंगों से जुड़े होते हैं। इन सुरंगों का इस्तेमाल रखरखाव के साथ-साथ हवा के आवागमन के लिए भी किया जाता है। संभव है कि मजदूर इसी रास्ते से ऊपर की ओर जाकर बाढ़ से बचने में सफल रहे हों।
दिलचस्प बात यह है कि सुरंग के अंदर जमा मलबा, जिसने मजदूरों को बाहर निकलने से रोक दिया, उसी ने शायद उन्हें तेज बहाव में बहने और डूबने से भी बचाया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में पहली बार करना पड़ा बड़ा विस्फोट
इस बचाव अभियान की कठिनाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेस्क्यू टीम को सुरंग में मौजूद बेहद बड़े पत्थरों को हटाने के लिए विस्फोट करना पड़ा।
अर्नोल्ड डिक्स के मुताबिक, कुछ चट्टानें इतनी बड़ी थीं कि उन्हें सामान्य तरीके से हटाना संभव नहीं था। इसलिए उन्हें नियंत्रित तरीके से तोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया कि इस स्तर की चट्टानों को सुरंग रेस्क्यू के दौरान विस्फोट से हटाना उनके अनुभव में बेहद असामान्य था।
इसके साथ ही टीम को यह भी ध्यान रखना था कि मलबा हटाने के दौरान सुरंग का कोई दूसरा हिस्सा अचानक न धंस जाए और अंदर मौजूद संभावित जीवित लोगों को नुकसान न पहुंचे। यही वजह है कि हर कदम बेहद सावधानी से उठाया गया।
10 दिन तक अंधेरे में कैसे जिंदा रहे दोनों मजदूर?
सुरंग के अंदर बिजली और रोशनी नहीं थी। ऐसे में दोनों मजदूरों को करीब 10 दिनों तक बेहद कठिन परिस्थितियों में रहना पड़ा। उनके पास उपलब्ध पानी और भोजन के सीमित संसाधनों के सहारे उन्होंने समय गुजारा।
अर्नोल्ड डिक्स का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए सिर्फ संसाधन ही नहीं, बल्कि इंसान की इच्छाशक्ति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि अंदर मौजूद लोगों के पास भोजन था या नहीं, इसका उन्हें पहले से पता नहीं था और सुरंग पूरी तरह अंधेरे में थी।
इतने लंबे समय तक अंधेरे, अकेलेपन और अनिश्चितता के बीच जीवित रहना अपने आप में असाधारण है। दोनों मजदूरों के बचने की खबर ने पूरे रेस्क्यू अभियान में नई उम्मीद पैदा कर दी है।
अब 35 से ज्यादा मजदूरों को बचाने की उम्मीद
दो लोगों के जिंदा मिलने के बाद रेस्क्यू टीम की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जानकारी के मुताबिक, इसी सुरंग में करीब 35 अन्य कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। अब बचाव दल उन संभावित इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे सकता है, जहां इंसानों के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना हो सकती है।
अर्नोल्ड डिक्स ने भी कहा कि दो लोगों के मिलने से यह विश्वास मजबूत हुआ है कि सुरंग के अंदर कुछ सुरक्षित पॉकेट मौजूद हैं। ऐसे में अन्य लोगों को खोजने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश जारी रखना बेहद जरूरी है।
कई पावर प्लांट प्रभावित, करीब 150 लोग लापता
नेपाल के त्रिशूली नदी बेसिन में आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ एक पावर प्लांट को प्रभावित नहीं किया। नदी घाटी में मौजूद कई जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है और अलग-अलग स्थानों पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित पावर प्लांटों और सुरंगों से जुड़े इलाकों में करीब 150 कर्मचारी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में त्रिशूली-3A सुरंग से दो लोगों का जिंदा निकलना राहत के साथ-साथ बाकी लापता लोगों के परिवारों के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण है।
‘यह रेस्क्यू ऑपरेशन इतिहास में दर्ज होगा’
अर्नोल्ड डिक्स के मुताबिक, नेपाल में चल रहा यह अभियान सामान्य टनल रेस्क्यू से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा है। एक तरफ बाढ़ और मलबे ने रास्ते बंद किए, वहीं दूसरी ओर कई पावर प्रोजेक्ट एक साथ प्रभावित हुए। रेस्क्यू टीम को सुरंगों के भीतर बड़े पत्थरों और कीचड़ से रास्ता बनाना पड़ा।
दो मजदूरों का 10 दिन बाद सुरक्षित मिलना इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। डिक्स का मानना है कि इससे यह साबित हुआ है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सुरंग के भीतर जीवन की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।
अब बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाकी लापता कर्मचारियों तक पहुंचना है। दो मजदूरों के सुरक्षित निकलने से उम्मीद जगी है कि सुरंग के अंदर अन्य लोग भी सुरक्षित स्थानों पर मौजूद हो सकते हैं। रेस्क्यू टीम मलबा हटाने और संभावित सुरक्षित क्षेत्रों की तलाश का काम जारी रखे हुए है।
नेपाल में त्रिशूली-3A टनल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा के बीच आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और इंसानी हौसले के साथ असंभव दिखने वाले मिशन को भी उम्मीद में बदला जा सकता है। 10 दिनों तक जिंदगी की लड़ाई लड़ने के बाद दो मजदूरों का बाहर आना न सिर्फ रेस्क्यू टीम की बड़ी सफलता है, बल्कि अंदर फंसे अन्य लोगों को लेकर भी नई उम्मीद पैदा करता है।



