
Trump Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद एक बार फिर तनाव बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को “कड़ा जवाब” देगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान के हमले के बाद ट्रंप की बड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को Fox News के चीफ फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट ट्रे यिंगस्ट से बातचीत में ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी जवाब की पुष्टि की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “उन्हें कड़ा जवाब देगा” और साफ किया कि ईरानी हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब पश्चिम एशिया में पहले से जारी संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है।
ट्रंप के बयान से यह संकेत मिल रहा है कि वॉशिंगटन फिलहाल ईरान की कार्रवाई को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में जवाबी कार्रवाई की सटीक तारीख, स्थान या सैन्य रणनीति के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को बनाया गया निशाना
ईरान के इस हमले की शुरुआत अमेरिकी कार्रवाई के बाद हुई। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित लारक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था। अमेरिका का कहना था कि इन लॉन्चरों से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़े हथियारों को तैनात करने की तैयारी की जा रही थी।
इसके बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। ईरानी पक्ष के मुताबिक हमले में किंग हुसैन और अल-अजराक एयरबेस को निशाना बनाया गया। ईरान ने इसे अमेरिका की लारक द्वीप पर की गई कार्रवाई का जवाब बताया।
ईरान की ओर से दावा किया गया कि इन ठिकानों पर मौजूद तकनीकी और रखरखाव संबंधी सुविधाओं के साथ अमेरिकी सैन्य विमानों की तैनाती वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। हालांकि हमले से हुए नुकसान को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
जॉर्डन ने 8 ईरानी मिसाइलें मार गिराने का दावा किया
हमले के बाद जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इससे संकेत मिलता है कि जॉर्डन ने संभावित बड़े नुकसान को रोकने के लिए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय किया।
अमेरिकी अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के पास भी मिसाइल हमलों से निपटने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। रिपोर्टों में Patriot और THAAD जैसे सिस्टम का उल्लेख किया गया है। इन प्रणालियों का इस्तेमाल आने वाली मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकने के लिए किया जाता है।
ट्रंप से बातचीत के दौरान ट्रे यिंगस्ट ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार लगभग सभी आने वाली मिसाइलों को अमेरिकी एयर डिफेंस ने रोक दिया। एक मिसाइल को इसलिए आगे जाने दिया गया क्योंकि उसे तत्काल किसी महत्वपूर्ण लक्ष्य के लिए खतरा नहीं माना गया था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर सीमित है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई के बाद कुछ समय तक तनाव अपेक्षाकृत कम रहा था। अब लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को फिर से गंभीर बना दिया है।
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि अमेरिका अब ईरान पर बड़े स्तर की सैन्य कार्रवाई करता है और तेहरान फिर जवाब देता है, तो संघर्ष केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। जॉर्डन और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने पहले से ही इस संघर्ष में संभावित लक्ष्य बन चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
इस पूरे घटनाक्रम में Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा और समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव इस क्षेत्र से गुजरने वाले तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई पर सीधा असर डाल सकता है।
अमेरिकी कार्रवाई के पीछे भी इसी क्षेत्र में संभावित समुद्री बारूदी सुरंगों और रॉकेट तैनाती को लेकर चिंता बताई गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि लारक द्वीप पर मौजूद लॉन्चरों से समुद्री मार्ग के लिए खतरा पैदा हो सकता था। दूसरी तरफ ईरान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अपनी संप्रभुता के खिलाफ हमला बता रहा है।
यही वजह है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बड़े व्यवधान से वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। सोमवार को नए सैन्य घटनाक्रम के बीच तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई।
ईरान ने क्या कहा?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी हमले के सामने चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान की ओर से जवाब देने की बात कही है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी हमले के खिलाफ उनकी सैन्य प्रतिक्रिया को आत्मरक्षा के रूप में देखा जाना चाहिए।
ईरानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अमेरिका आगे कोई हमला करता है तो तेहरान जवाब देने के लिए तैयार है। ऐसे बयानों से साफ है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
UAE में भी अमेरिकी ठिकानों को लेकर बढ़ी चिंता
जॉर्डन के अलावा ईरान की ओर से संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी सैन्य परिसंपत्तियों को ड्रोन से निशाना बनाने का दावा भी सामने आया है। ईरानी सेना ने कहा कि उसने अल-मिनहाद एयरबेस में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया। हालांकि UAE के रक्षा मंत्रालय ने एयरबेस पर हमले के ईरानी दावे को खारिज किया और कहा कि उसकी वायुसेना ने अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहे एक ड्रोन का जवाब दिया था।
इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का दायरा एक देश तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति वाले कई स्थान संभावित रूप से संवेदनशील हो गए हैं।
क्या अमेरिका अब ईरान पर बड़ा हमला करेगा?
फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। ट्रंप ने केवल इतना कहा है कि अमेरिका ईरान को “कड़ा जवाब” देगा। अमेरिकी प्रशासन की अगली सैन्य कार्रवाई कितनी बड़ी होगी, इसका फैसला आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
हालांकि मौजूदा घटनाक्रम यह बताता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कूटनीति के लिए परिस्थितियां कठिन होती जा रही हैं। हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंधों की दिशा में भी कदम उठाए हैं। ऐसे में सैन्य कार्रवाई और आर्थिक दबाव, दोनों मोर्चों पर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
अमेरिका और ईरान के बीच अगला कदम पूरे क्षेत्र के लिए बेहद अहम होगा। यदि वॉशिंगटन सीमित जवाब देता है तो तनाव को नियंत्रित करने की संभावना बनी रह सकती है। लेकिन अगर अमेरिकी जवाब बड़े सैन्य अभियान में बदलता है, तो ईरान की ओर से और मिसाइल या ड्रोन हमलों की आशंका बढ़ सकती है।
जॉर्डन और UAE जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष के दायरे में ला रही है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रंप प्रशासन के अगले कदम और तेहरान की संभावित प्रतिक्रिया पर है। ट्रंप की “कड़ा जवाब” देने की चेतावनी ने यह साफ कर दिया है कि लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद शुरू हुआ यह नया टकराव अभी खत्म होने वाला नहीं दिख रहा। आने वाले कुछ घंटे और दिन अमेरिका-ईरान संघर्ष की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।



