टेक्नोलॉजी

Dark Matter Discovery: वैज्ञानिकों को मिला रहस्यमयी कण, क्या पहली बार पकड़ा गया ‘अदृश्य पदार्थ’?

Dark Matter Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में शामिल Dark Matter यानी डार्क मैटर को लेकर वैज्ञानिकों को एक बेहद दिलचस्प संकेत मिला है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वे शायद उस अदृश्य पदार्थ की पहचान के एक कदम और करीब पहुंच गए हैं, जिसके बारे में माना जाता है कि वह ब्रह्मांड के कुल पदार्थ का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हो सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी इसे डार्क मैटर की खोज घोषित करने से साफ तौर पर बच रहे हैं।

अमेरिका की एक बेहद संवेदनशील अंडरग्राउंड प्रयोगशाला में किए गए प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने एक ऐसी कणीय घटना दर्ज की है, जो संभावित रूप से Weakly Interacting Massive Particle यानी WIMP के कारण हो सकती है। WIMP उन प्रमुख कणों में शामिल हैं जिन्हें वैज्ञानिक लंबे समय से डार्क मैटर के संभावित घटक के रूप में तलाश रहे हैं।

यह संकेत जितना रोमांचक है, उतना ही सावधानी बरतने वाला भी है। शोधकर्ताओं के पास फिलहाल केवल एक ऐसी घटना है, जिसे संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। इसके अलावा परिणामों की स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षा यानी peer review अभी बाकी है। इसलिए फिलहाल इसे डार्क मैटर की पहली प्रत्यक्ष खोज कहना जल्दबाजी होगी।

क्या वैज्ञानिकों ने पहली बार Dark Matter देखा?

डार्क मैटर का नाम सुनते ही सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर वैज्ञानिक इसे सीधे देख क्यों नहीं पाते। दरअसल, डार्क मैटर सामान्य पदार्थ की तरह प्रकाश को उत्सर्जित, परावर्तित या अवशोषित नहीं करता। यही वजह है कि इसे सीधे टेलीस्कोप से देखना संभव नहीं है।

इसके बावजूद वैज्ञानिकों को लंबे समय से विश्वास है कि डार्क मैटर मौजूद है। इसके अस्तित्व के पीछे ब्रह्मांड में दिखाई देने वाले कई गुरुत्वाकर्षण संबंधी प्रभावों के प्रमाण हैं। आकाशगंगाओं की गति और उनके गुरुत्वाकर्षण व्यवहार को समझाने के लिए वैज्ञानिकों को ऐसे अदृश्य पदार्थ की आवश्यकता पड़ती है, जो बड़ी मात्रा में मौजूद हो लेकिन सीधे दिखाई न देता हो।

अब तक दुनिया भर में कई प्रयोगों के बावजूद डार्क मैटर के किसी कण को प्रत्यक्ष रूप से पकड़ने में वैज्ञानिक सफल नहीं हुए हैं। यही कारण है कि LUX-ZEPLIN प्रयोग से मिला यह नया संकेत वैज्ञानिक समुदाय में खास दिलचस्पी पैदा कर रहा है।

LUX-ZEPLIN प्रयोग में मिला रहस्यमयी संकेत

डार्क मैटर की तलाश के लिए वैज्ञानिकों ने अमेरिका में मौजूद LUX-ZEPLIN यानी LZ detector का इस्तेमाल किया। यह दुनिया के सबसे संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टरों में से एक है।

LZ प्रयोग अमेरिका के दक्षिण डकोटा में स्थित Sanford Underground Research Facility में किया जा रहा है। यह प्रयोगशाला जमीन के करीब एक मील नीचे स्थित है। इतनी गहराई में प्रयोग करने का मकसद बाहरी विकिरण और दूसरी ऐसी घटनाओं को कम करना है, जो डिटेक्टर में होने वाली बेहद सूक्ष्म कणीय गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।

LZ में बेहद संवेदनशील प्रकाश डिटेक्टर लगाए गए हैं। इनका काम तब पैदा होने वाले बेहद छोटे प्रकाश संकेतों को रिकॉर्ड करना है, जब कोई कण डिटेक्टर के अंदर मौजूद पदार्थ से टकराता है।

इसी प्रक्रिया के दौरान शोधकर्ताओं को एक ऐसी particle interaction दिखाई दी, जिसे लेकर वैज्ञानिकों ने आगे जांच शुरू की।

WIMP हो सकता है इस रहस्यमयी घटना का कारण?

वैज्ञानिकों ने जिस घटना को रिकॉर्ड किया है, उसके पीछे संभावित कारणों में WIMP भी शामिल है। WIMP का पूरा नाम Weakly Interacting Massive Particle है। लंबे समय से इसे डार्क मैटर के संभावित कणों में से एक माना जाता रहा है।

सैद्धांतिक रूप से WIMP ऐसे कण हो सकते हैं जो सामान्य पदार्थ के साथ बेहद कमजोर तरीके से संपर्क करते हैं। यही वजह है कि इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल है।

LZ डिटेक्टर में दर्ज घटना WIMP से जुड़ी हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों के पास अभी इतना प्रमाण नहीं है कि वे इसे निश्चित रूप से डार्क मैटर का कण घोषित कर सकें। एक संभावना यह भी है कि यह घटना किसी अन्य ज्ञात या अभी पूरी तरह समझे न गए भौतिक कारण से हुई हो।

यही वैज्ञानिक सावधानी इस खोज को महत्वपूर्ण बनाती है। शोधकर्ता उत्साहित जरूर हैं, लेकिन वे किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ज्यादा डेटा का इंतजार कर रहे हैं।

छह देशों के 250 वैज्ञानिकों ने किया विश्लेषण

इस शोध को किसी एक प्रयोगशाला या कुछ वैज्ञानिकों की छोटी टीम का काम नहीं माना जा सकता। करीब दो वर्षों तक लगभग 250 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने LZ से प्राप्त आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया।

इस अंतरराष्ट्रीय टीम में छह देशों के 39 संस्थानों से जुड़े शोधकर्ता शामिल रहे। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल समेत कई संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भी इस डेटा के विश्लेषण में योगदान दिया।

शोधकर्ताओं ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि डिटेक्टर में दिखाई दिया असामान्य संकेत किसी पहले से ज्ञात कारण, तकनीकी समस्या या अन्य सामान्य particle interaction का परिणाम तो नहीं है।

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल से जुड़े प्रयोगात्मक particle physicist प्रोफेसर हेनिंग फ्लेचर के अनुसार, टीम ने इस घटना की संभावित सामान्य व्याख्याओं को खोजने में काफी समय लगाया। फिलहाल उन्हें ऐसा कोई कारण नहीं मिला है जो इस असामान्य प्रतिक्रिया की पूरी तरह संतोषजनक व्याख्या कर सके।

फिर वैज्ञानिक इसे Dark Matter की खोज क्यों नहीं मान रहे?

यहीं इस पूरे शोध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। विज्ञान में किसी भी असाधारण खोज को स्वीकार करने के लिए केवल एक संकेत पर्याप्त नहीं माना जाता। वैज्ञानिकों को यह साबित करना होता है कि परिणाम संयोग या statistical fluctuation की वजह से नहीं आया है।

इस शोध में दर्ज संकेत की statistical significance 2.6 sigma बताई गई है। जबकि भौतिक विज्ञान में किसी नए particle या बड़ी खोज को आमतौर पर स्वीकार करने के लिए करीब 5 sigma का स्तर अपेक्षित होता है।

इसका मतलब यह है कि मौजूदा आंकड़े दिलचस्प जरूर हैं, लेकिन अभी खोज की पुष्टि के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं हैं।

Brown University के प्रोफेसर रिक गैट्सकेल ने भी इसी सावधानी पर जोर दिया। उनका कहना है कि केवल एक घटना के आधार पर वैज्ञानिक यह दावा नहीं करना चाहते कि उन्होंने डार्क मैटर देख लिया है। उनके मुताबिक यह एक दिलचस्प घटना है, जिसे वैज्ञानिक समुदाय के सामने रखा गया है ताकि दूसरे विशेषज्ञ भी इसका अध्ययन कर सकें।

Peer Review के बाद ही तस्वीर और साफ होगी

इस शोध के नतीजे जापान में आयोजित एक वैज्ञानिक सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए। लेकिन अभी तक इसे स्वतंत्र वैज्ञानिकों द्वारा peer review की प्रक्रिया से नहीं गुजारा गया है।

Peer review वैज्ञानिक शोध की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें अन्य विशेषज्ञ अध्ययन की पद्धति, आंकड़ों और निष्कर्षों की जांच करते हैं। इसके बाद ही किसी शोध के दावे को वैज्ञानिक समुदाय में ज्यादा मजबूती मिलती है।

इसलिए वर्तमान स्थिति में सबसे सही निष्कर्ष यही है कि वैज्ञानिकों ने Dark Matter से जुड़ी एक संभावित उम्मीदवार घटना देखी है, लेकिन डार्क मैटर की प्रत्यक्ष खोज अभी साबित नहीं हुई है।

वैज्ञानिक अब और डेटा का इंतजार कर रहे हैं

इस खोज का अगला चरण बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि भविष्य में LUX-ZEPLIN के डेटा में इसी तरह की और घटनाएं दिखाई देती हैं और उनके गुण इस पहले संकेत से मेल खाते हैं, तो वैज्ञानिकों के पास अपने दावे को मजबूत करने के लिए बेहतर आधार होगा।

अगर ऐसी घटनाएं बार-बार दर्ज होती हैं और अन्य संभावित कारणों को भी खारिज किया जा सकता है, तो यह आधुनिक भौतिक विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बन सकती है।

इसके उलट यदि आगे के डेटा में ऐसा कोई दूसरा संकेत नहीं मिलता, तो यह संभावना बढ़ जाएगी कि वर्तमान घटना किसी अन्य particle interaction या statistical fluctuation का परिणाम थी।

Dark Matter की खोज क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

डार्क मैटर को समझना केवल एक नए कण की खोज तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों के लिए यह ब्रह्मांड की संरचना और उसके विकास को समझने की कुंजी हो सकता है।

माना जाता है कि ब्रह्मांड में मौजूद सामान्य पदार्थ वह सब कुछ नहीं है जिसे हम देखते हैं। तारों, ग्रहों, गैस और आकाशगंगाओं के अलावा बड़ी मात्रा में ऐसा अदृश्य पदार्थ मौजूद हो सकता है जो गुरुत्वाकर्षण के जरिए अपना प्रभाव डालता है।

अगर वैज्ञानिक कभी Dark Matter के कण की प्रत्यक्ष पहचान करने में सफल होते हैं, तो इससे particle physics और cosmology दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना और उसके विकास से जुड़े कई सवालों के जवाब तलाशने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल LUX-ZEPLIN से मिला संकेत उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन वैज्ञानिक खुद इसे अंतिम खोज नहीं मान रहे हैं। आने वाले डेटा, स्वतंत्र समीक्षा और नए प्रयोग ही तय करेंगे कि यह घटना वास्तव में Dark Matter की ओर इशारा करती है या ब्रह्मांड के किसी दूसरे अनसुलझे रहस्य की ओर।

Related Articles

Back to top button