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SCO Summit 2026: पाकिस्तान ने मोदी को फोटो से किया क्रॉप?

SCO Summit 2026: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान एक बार फिर सोशल मीडिया पर दिखाई दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा की गई SCO नेताओं की ग्रुप फोटो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर नहीं आए। तस्वीर को इस तरह क्रॉप किया गया था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बीच में दिखाई दे रहे थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के इस कदम को लेकर जमकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से साझा की गई तस्वीर में SCO के सभी नेता एक साथ दिखाई दे रहे थे। बाद में शहबाज शरीफ ने भी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से पूरी ग्रुप फोटो पोस्ट कर दी। इस घटनाक्रम ने एक साधारण तस्वीर को भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही राजनीतिक और कूटनीतिक तनातनी से जोड़ दिया।

SCO Summit में ग्रुप फोटो बनी चर्चा का विषय

SCO Summit के दौरान सदस्य देशों के प्रमुख नेताओं ने मंगलवार को सामूहिक तस्वीर के लिए एक साथ पोज दिया। इस तस्वीर में संगठन के 10 सदस्य देशों के नेता दिखाई दे रहे थे। कार्यक्रम के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसी तस्वीर का एक क्रॉप किया हुआ संस्करण सोशल मीडिया पर साझा किया।

इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और कुछ अन्य नेताओं को भी फ्रेम से हटा दिया गया था। तस्वीर की क्रॉपिंग ऐसी थी कि शहबाज शरीफ समूह के बीच अधिक प्रमुख स्थान पर दिखाई दे रहे थे।

जैसे ही यह तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई, लोगों ने इसकी तुलना प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा की गई मूल तस्वीर से करनी शुरू कर दी। मूल तस्वीर में सभी नेता अपने वास्तविक स्थान पर नजर आ रहे थे और शहबाज शरीफ समूह में दाईं ओर से चौथे स्थान पर दिखाई दे रहे थे।

मोदी की पूरी तस्वीर ने बढ़ाई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई तस्वीर में SCO Summit में मौजूद सभी प्रमुख नेता नजर आए। इसमें शहबाज शरीफ भी शामिल थे। यही अंतर सोशल मीडिया पर चर्चा का सबसे बड़ा कारण बना।

लोगों ने सवाल उठाया कि यदि तस्वीर सिर्फ सामान्य सोशल मीडिया पोस्ट के लिए थी, तो उसे इस तरह से क्रॉप करने की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं कुछ यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को तस्वीर में कम प्रमुख दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा।

बाद में शहबाज शरीफ ने अपने निजी X अकाउंट से पूरी तस्वीर साझा की। इसके बाद विवाद कुछ हद तक शांत हुआ, लेकिन तब तक क्रॉप की गई तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी थी।

वीडियो में भी क्रॉपिंग का दावा

मामला सिर्फ ग्रुप फोटो तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से SCO नेताओं की राउंडटेबल बैठक का एक वीडियो भी साझा किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखाई नहीं दे रहे थे।

इस कथित क्रॉपिंग को लेकर भी सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए। कुछ लोगों ने पाकिस्तान की सोशल मीडिया रणनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की एडिटिंग से अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई वास्तविक राजनीतिक फायदा हासिल नहीं किया जा सकता।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मूल तस्वीरें दोबारा पोस्ट कर यह दिखाने की कोशिश की कि SCO Summit की वास्तविक तस्वीर क्या थी।

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जमकर किया रिएक्ट

क्रॉप की गई तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने इसे पाकिस्तान की प्रधानमंत्री कार्यालय की सोशल मीडिया टीम की अपरिपक्वता बताया, जबकि कुछ ने इसे जानबूझकर की गई राजनीतिक प्रस्तुति करार दिया।

कई लोगों ने पूरी तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि मूल तस्वीर में सभी नेता मौजूद हैं और पाकिस्तान की ओर से जारी तस्वीर सिर्फ एक एडिटेड फ्रेम है।

कुछ यूजर्स ने इस पूरे मामले पर व्यंग्यात्मक पोस्ट भी किए। एक वर्ग ने शहबाज शरीफ की तस्वीर को एडिट करके उनके हाथ में ‘कटोरा’ दिखाया और इसे पाकिस्तान की आर्थिक मदद के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता से जोड़कर देखा। हालांकि, इस तरह की एडिटेड तस्वीरें सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं हैं और इन्हें आधिकारिक तस्वीर नहीं माना जाना चाहिए।

शहबाज शरीफ और पुतिन की मुलाकात भी चर्चा में

SCO Summit में सिर्फ ग्रुप फोटो ही चर्चा का विषय नहीं बनी। सम्मेलन के दौरान शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

ग्रुप फोटो के बाद जब पुतिन मंच से आगे बढ़ रहे थे, तब शहबाज शरीफ उन्हें रोकते हुए नजर आए। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत की तस्वीरें भी सामने आईं।

तीनों नेताओं के बीच हाथ मिलाने और बातचीत का दृश्य इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि 2025 के SCO Summit में भी मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की अनौपचारिक बातचीत और हंसी-मजाक की तस्वीरें काफी वायरल हुई थीं।

मोदी-पुतिन-शी की तिकड़ी पर दुनिया की नजर

SCO Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीनों देशों के बीच अलग-अलग स्तर पर रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं और ऐसे बहुपक्षीय मंचों पर उनकी अनौपचारिक बातचीत का अपना महत्व होता है।

पिछले SCO Summit में भी इन तीनों नेताओं की साथ में तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही थीं। इस बार भी उनके बीच बातचीत और हाथ मिलाने के दृश्य ने लोगों का ध्यान खींचा।

भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली एक तरफ रूस के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं चीन के साथ सीमा और अन्य मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रखता है।

आतंकवाद के मुद्दे पर पीएम मोदी का सख्त संदेश

SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आतंकवाद से जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड को स्वीकार नहीं करने की बात कही।

हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संदेश आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों के लिए स्पष्ट माना गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए केवल हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। इसमें आतंकवाद की फंडिंग, उसे समर्थन देने वाला ढांचा और उसे बढ़ावा देने वाली व्यवस्था भी शामिल है।

मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं या आतंकवादियों को समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी भी देश के लिए रणनीतिक हथियार नहीं बन सकता।

भारत-पाकिस्तान रिश्ते पहले से तनावपूर्ण

SCO Summit में पाकिस्तान से जुड़ी घटनाओं को भारत-पाकिस्तान संबंधों के मौजूदा तनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।

पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया था। इसके बाद कूटनीतिक संबंधों में भी खटास बढ़ी।

भारत ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर लगातार कड़ा रुख अपनाया है। इसी पृष्ठभूमि में SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर प्रधानमंत्री मोदी का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश खास महत्व रखता है।

सिंधु जल संधि भी बना बड़ा मुद्दा

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू सिंधु जल संधि भी है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए और सिंधु जल संधि को लेकर भी अपना रुख सख्त किया।

भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद के माहौल में सामान्य संबंध बनाए रखना संभव नहीं है। पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराता रहा है।

ऐसे माहौल में SCO Summit के दौरान दोनों देशों के नेताओं की मौजूदगी ने सम्मेलन को दक्षिण एशियाई राजनीति के नजरिए से भी महत्वपूर्ण बना दिया।

फोटो विवाद से ज्यादा अहम रहा SCO Summit का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी को ग्रुप फोटो से क्रॉप करने का विवाद भले ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, लेकिन SCO Summit का महत्व इससे कहीं बड़ा है। संगठन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत कई महत्वपूर्ण देश शामिल हैं और यह मंच क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग तथा वैश्विक राजनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत के लिए इस सम्मेलन में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख रहा। वहीं मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की बातचीत ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा।

जहां पाकिस्तान की ओर से साझा की गई क्रॉप तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी, वहीं प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा की गई पूरी तस्वीर ने घटनाक्रम का दूसरा पक्ष सामने रखा। बाद में शहबाज शरीफ की ओर से पूरी तस्वीर पोस्ट किए जाने के बाद यह साफ हो गया कि विवाद का केंद्र मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर तस्वीर पेश करने के तरीके को लेकर था।

कुल मिलाकर SCO Summit 2026 में एक तरफ भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना सख्त रुख दोहराया, वहीं दूसरी तरफ मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की बातचीत ने वैश्विक राजनीति में इस बैठक की अहमियत बढ़ा दी। पाकिस्तान की ओर से सामने आई तस्वीर की क्रॉपिंग भले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का कारण बनी हो, लेकिन सम्मेलन के बड़े कूटनीतिक संदेश आने वाले दिनों में ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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