जयपुर/बेंगलुरु | 22 मई, 2026 | NEET UG Congress Protest: देशभर के चिकित्सा शिक्षा अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े नीट-यूजी 2026 (NEET-UG) पेपर लीक विवाद को लेकर देश की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। परीक्षा रद्द होने और सीबीआई जांच शुरू होने के बावजूद छात्रों और विपक्षी दलों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में गुरुवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर भारी सियासी ड्रामा और उग्र प्रदर्शन देखने को मिला, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प हुई।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और युवा जयपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश मुख्यालय का घेराव करने निकले थे। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इस प्रदर्शन में कुछ कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें भी आईं, जिन्हें इलाज के लिए तुरंत सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल ले जाया गया।
जयपुर में ‘हल्ला बोल’: बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, डोटासरा को कंधे पर उठाया
हाथों में पोस्टर, बैनर और तख्तियां लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम जब ‘शहीद स्मारक’ के पास पहुंचा, तो पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस कमिश्नरेट के पास कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।
जब प्रदर्शनकारी युवाओं और महिला कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स को तोड़कर भाजपा मुख्यालय की तरफ बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने वॉटर कैनन चला दी। पानी की तेज बौछारों के बीच एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जब उत्साहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को अपने कंधों पर उठा लिया और नारेबाजी जारी रखी। वहीं, सूबे के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास पुलिस कार्रवाई के विरोध में कमिश्नरेट के ठीक सामने सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और मेडिकल छात्रों की पोशाक पहने युवाओं ने हिस्सा लिया।
“NTA को तुरंत भंग करो और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें” — गोविंद सिंह डोटासरा
मार्च शुरू होने से पहले शहीद स्मारक पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने केंद्र की मोदी सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में लगातार हो रही गड़बड़ियों ने देश की सबसे बड़ी टेस्टिंग एजेंसी की साख को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
डोटासरा ने कड़े लहजे में कहा:
“नीट परीक्षा का यह महा-घोटाला देश के करीब 22 लाख छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। केंद्र सरकार इस जिम्मेदारी से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमारी साफ मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें और इस पूरी तरह नाकाम हो चुकी एजेंसी (NTA) को तुरंत भंग किया जाए। इसके साथ ही, वर्तमान में चल रही सीबीआई (CBI) जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।”
कांग्रेस नेता अभिषेक चौधरी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पुलिस के दम पर युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक छात्रों को इंसाफ नहीं मिल जाता।
कर्नाटक में भी फूटा गुस्सा: बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में सड़कों पर उतरे सीएम सिद्धारमैया
नीट पेपर लीक का यह मुद्दा अब केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दक्षिण भारत में भी इसने बड़ा राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में यूथ कांग्रेस (Youth Congress) द्वारा आयोजित एक विशाल विरोध प्रदर्शन में खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) शामिल हुए।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर बैठकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि देश के 23 लाख से अधिक डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों के साथ यह बहुत बड़ा विश्वासघात है। मुख्यमंत्री के इस प्रदर्शन में सीधे शामिल होने से केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर सीधा टकराव शुरू हो गया है। कर्नाटक कांग्रेस ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे और प्रभावित छात्रों के लिए उचित न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
नीट-यूजी 2026 विवाद और आंदोलन: मुख्य तथ्य
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