
मुंबई | 22 मई, 2026 | Rupee vs Dollar Today: ग्लोबल मार्केट से मिल रहे सुस्त संकेतों और एशियाई मुद्राओं (Asian Currencies) में देखी जा रही कमजोरी का सीधा असर आज भारतीय करेंसी पर देखने को मिला है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (Indian Rupee) 6 पैसे की गिरावट के साथ 96.26 के स्तर पर खुला।
पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बाजार में किए गए बड़े हस्तक्षेप (Intervention) के बाद रुपये में कुछ सुधार देखा गया था, लेकिन आज सुबह बाजार खुलते ही वह रिकवरी बेअसर साबित हुई। विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर लगातार दबाव बना हुआ है।
97 के ऐतिहासिक मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंचा रुपया
अगर पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारतीय रुपया पिछले 9 कारोबारी सत्रों में करीब 2.5% तक टूट चुका है। गिरावट का यह सिलसिला इस कदर हावी था कि रुपया इतिहास में पहली बार 97 प्रति डॉलर के बेहद संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक स्तर को छूने की कगार पर पहुंच गया था।
हालांकि, इसी बीच आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की भारी बिकवाली की, जिससे रुपये की गिरावट को कुछ हद तक थामने और उसे स्थिर करने में मदद मिली। समाचार एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के दिग्गज और ट्रेडर्स इस समय बेहद सतर्क हैं और उनकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बाहरी दबावों से रुपये को बचाने के लिए केंद्रीय बैंक दोबारा मैदान में उतरेगा या नहीं।
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट से मिली थोड़ी राहत
भले ही रुपये पर वैश्विक दबाव है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई हालिया नरमी ने भारतीय मुद्रा के लिए एक सुरक्षा कवच (Buffer) का काम किया है।
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कच्चे तेल का भाव: ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का दाम गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया है।
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राहत की वजह: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा ईरान के साथ चल रही राजनयिक और शांति वार्ताओं को लेकर दिए गए सकारात्मक बयानों के बाद कमोडिटी मार्केट का सेंटिमेंट सुधरा है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल का सस्ता होना रुपये के लिए हमेशा राहत लेकर आता है।
दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) अपने 6 हफ्तों के उच्चतम स्तर (Peak) के करीब मजबूती से टिका हुआ है, जो रुपये की बड़ी रिकवरी की राह में रोड़ा बना हुआ है।
आरबीआई का मास्टरस्ट्रोक: मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए $5 बिलियन का स्वैप ऑक्शन
रुपये में जारी इस उथल-पुथल और बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) की स्थिति को संभालने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। आरबीआई आगामी 26 मई, 2026 को 5 अरब डॉलर ($5 Billion) की बाय-सेल स्वैप नीलामी (Buy-Sell Swap Auction) आयोजित करेगा।
इस कदम से बाजार में क्या बदलाव आएगा?
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लिक्विडिटी में सुधार: इस स्वैप ऑक्शन के जरिए देश के बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति में काफी सुधार होने की उम्मीद है।
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वोलाटिलिटी पर लगाम: विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से आरबीआई डॉलर-रुपये की विनिमय दर में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव (Forex Volatility) को अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकेगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बहाल होगा।
मजबूत आर्थिक संकेतक: विपरीत परिस्थितियों में भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत
वैश्विक स्तर पर चल रही तमाम उठापटक और चुनौतियों के बावजूद भारत के व्यापक आर्थिक संकेतक (Macroeconomic Indicators) काफी मजबूत और लचीले बने हुए हैं। मई महीने के लिए जारी हुआ HSBC कंपोजिट पीएमआई (Composite PMI) 58.1 के मजबूत स्तर पर रहा है, जो यह दर्शाता है कि देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर्स में ग्रोथ की रफ्तार काफी शानदार है।
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के मजबूत आंकड़ों के बाद वहां का केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ (US Federal Reserve) ब्याज दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर रख सकता है। अमेरिकी डॉलर के वैश्विक रूप से मजबूत रहने के कारण रुपये जैसी उभरती हुई मुद्राओं (Emerging Market Currencies) की बढ़त सीमित रहेगी।
फॉरेक्स मार्केट एनालिसिस मई 2026: एक नज़र में आंकड़े
एक्सपर्ट ओपिनियन: फॉरेक्स रीसर्च फर्म ‘सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स’ (CR Forex Advisors) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पाबरी के मुताबिक, हम आने वाले दिनों में USD/INR पेयर में भारी उतार-चढ़ाव (Elevated Volatility) के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। निकट भविष्य में भू-राजनीतिक बदलावों और वैश्विक संकेतों के चलते रुपये में 50 पैसे से लेकर 1 रुपये तक का गैप-अप या गैप-डाउन देखने को मिल सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आरबीआई के स्वैप उपाय या वैश्विक स्तर पर कोई सकारात्मक शांति डील फाइनल होती है, तो रुपये को मजबूती मिलेगी। लेकिन अगर ऐसे ट्रिगर नहीं मिलते हैं, तो रुपया धीरे-धीरे 97.00 के स्तर की तरफ बढ़ सकता है। रुपये में दीर्घकालिक ट्रेंड रिवर्सल (मजबूती) की शुरुआत तभी मानी जाएगी, जब यह टिकाऊ रूप से 94.80 के स्तर के नीचे बंद होना शुरू करे।
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