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Reliance Venezuela Crude Deal: रिलायंस वेनेजुएला क्रूड डील और ईरान पर सरकार का बयान

Reliance Venezuela Crude Deal: भारत की ऊर्जा रणनीति को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। Reliance Industries की एक यूनिट ने वेनेजुएला से भारी कच्चे तेल (Heavy Crude) की एक बड़ी खेप की लोडिंग शुरू कर दी है। यह खेप करीब 20 लाख बैरल (2 मिलियन बैरल) की बताई जा रही है और इसे सीधे वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से खरीदा गया है।

शिपिंग डेटा और कंपनी दस्तावेजों के मुताबिक, यह डील भारत के लिए खास महत्व रखती है क्योंकि इससे देश अपने तेल स्रोतों को और विविध बना रहा है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल रिफाइनिंग के लिए अलग तरह की तकनीक मांगता है, जिसमें रिलायंस जैसी कंपनियां माहिर मानी जाती हैं।


ईरान से तेल आयात को लेकर सरकार का साफ बयान

इसी बीच भारत सरकार ने ईरान से तेल आयात को लेकर चल रही अटकलों पर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। Ministry of Petroleum and Natural Gas ने कहा है कि ईरान से तेल खरीदने में किसी भी तरह की भुगतान समस्या नहीं है।

सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि भारत के रिफाइनर अलग-अलग देशों से तेल खरीदते हैं और यह पूरी तरह व्यावसायिक निर्णय होता है। इसलिए किसी एक देश से जुड़े भुगतान या सप्लाई को लेकर गलतफहमियां फैलाना सही नहीं है।


टैंकर रूट बदलने की खबरों को बताया गलत

हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान का कच्चा तेल लेकर आ रहा एक टैंकर भारत की बजाय चीन की ओर मुड़ गया है, और इसके पीछे भुगतान से जुड़ी समस्या बताई गई थी। लेकिन सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक तेल व्यापार में टैंकरों का रास्ता बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है। यह कई बार लॉजिस्टिक्स, बाजार कीमतों या अन्य व्यावसायिक कारणों से होता है। इसलिए इसे किसी संकट या भुगतान विवाद से जोड़ना गलत है।


भारत की रणनीति: 40 से अधिक देशों से तेल आयात

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदता है। सरकार का कहना है कि भारतीय कंपनियों को पूरी स्वतंत्रता है कि वे अपनी जरूरत और बाजार की स्थिति के हिसाब से किसी भी देश से तेल खरीद सकें।

इस रणनीति का मकसद है कि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो और वैश्विक उतार-चढ़ाव का असर कम से कम पड़े।


ईरान से तेल आयात का इतिहास

भारत पहले ईरान से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदता था। एक समय ऐसा भी था जब कुल आयात का करीब 11.5 प्रतिशत हिस्सा ईरान से आता था। साल 2018 में भारत ने लगभग 5,18,000 बैरल प्रतिदिन (BPD) ईरानी तेल आयात किया था।

हालांकि, 2019 में अमेरिका द्वारा लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के बाद भारत को ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा। इसके बाद भारत ने मध्य पूर्व, अमेरिका और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ा दिया।


अमेरिकी प्रतिबंध और हालिया छूट

हाल ही में अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने को लेकर सीमित छूट दी है। यह छूट 30 दिनों के लिए है और इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है। यह छूट 19 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल समुद्र में करीब 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जिसमें से लगभग 51 मिलियन बैरल भारत की ओर आ सकता है। यह भारत के लिए एक अवसर भी है और चुनौती भी, क्योंकि उसे वैश्विक राजनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए निर्णय लेना होगा।


टैंकर मूवमेंट और बाजार की वास्तविकता

शिप ट्रैकिंग कंपनी Kpler के मुताबिक, “Ping Shun” नाम का एक अफ्रामैक्स टैंकर, जिसे 2025 में अमेरिका ने प्रतिबंधित किया था, अब चीन के डोंगयिंग पोर्ट की ओर बढ़ रहा है।

पहले यह टैंकर गुजरात के वाडिनार पोर्ट की ओर आ रहा था, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि भारत ईरानी तेल की खरीद फिर से शुरू कर सकता है। हालांकि, सरकार ने साफ कर दिया कि इस तरह के रूट बदलाव सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।


एलपीजी आयात भी जारी

ईरान से केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि एलपीजी (LPG) का आयात भी जारी है। “Sea Bird” नाम का एक जहाज 44,000 टन एलपीजी लेकर 2 अप्रैल को मंगलुरु पोर्ट पहुंचा और फिलहाल वहां अनलोडिंग की प्रक्रिया चल रही है।

इससे साफ होता है कि भारत ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों का उपयोग कर रहा है।


ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत का कदम

भारत की यह पूरी रणनीति ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रिलायंस द्वारा वेनेजुएला से तेल खरीदना और सरकार द्वारा ईरान के साथ व्यापार को लेकर स्पष्टता देना यह दर्शाता है कि भारत संतुलित और व्यावहारिक नीति अपना रहा है।

देश की कोशिश है कि वैश्विक राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितता के बीच भी ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।

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