
दुमका जिले के मसलिया प्रखंड क्षेत्र में बीते शनिवार को आई तेज आंधी और बारिश ने ग्रामीण इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। तूफानी हवा के कारण कई कच्चे मकानों की छतें क्षतिग्रस्त हो गईं, वहीं खेतों में खड़ी फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। सबसे अधिक प्रभावित किसानों की करेला की फसल हुई है। तेज हवा के कारण बांस-बल्लियों से बनाए गए करेला के मचान गिर गए और फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
आंधी-बारिश के बाद प्रभावित किसान अब प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई महीनों की मेहनत और पूंजी लगाकर करेला की खेती तैयार की थी। फसल से होने वाली आमदनी पर कई परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें निर्भर थीं, लेकिन अचानक आए तूफान ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।
तेज आंधी में उजड़ गए कच्चे मकानों के छप्पर
शनिवार को मौसम अचानक बदला और तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते हवा इतनी तेज हो गई कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई कमजोर और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचा। कई घरों की छतें और छप्पर उड़ गए, जिससे लोगों को बारिश के बीच काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिन परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचा है, उनका कहना है कि उनके लिए दोबारा छत की व्यवस्था करना आसान नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार प्रशासन से सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ितों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करे और सरकारी प्रावधान के अनुसार उन्हें राहत उपलब्ध कराई जाए।
करेला की खेती पर पड़ी सबसे बड़ी मार
मसलिया क्षेत्र में आंधी-बारिश का सबसे गंभीर असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिला है। खासकर करेला की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान हुआ है। करेला की बेल को सहारा देने के लिए किसानों ने खेतों में बांस-बल्लियों की मदद से मचान तैयार किए थे। तेज हवा के झोंकों ने इन मचानों को जमीन पर गिरा दिया।
मचान गिरने के साथ ही करेला की बेलें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। कई खेतों में फसल पूरी तरह जमीन पर बिखर गई। किसानों के मुताबिक, फसल को दोबारा खड़ा करना या मचान तैयार करना भी आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए अतिरिक्त खर्च और मजदूरी की जरूरत होगी। ऐसे में जिन किसानों की फसल पहले ही खराब हो चुकी है, उनके सामने आगे की खेती को लेकर भी चिंता खड़ी हो गई है।
सुरेश यादव समेत कई किसानों की फसल बर्बाद
आंधी-बारिश से मसलिया क्षेत्र के कई किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। किसान सुरेश यादव, भीम सिंह, काजल रजक सहित दर्जनों किसानों ने अपनी करेला की फसल बर्बाद होने की जानकारी दी है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने करेला की खेती पर काफी मेहनत की थी। खेत तैयार करने से लेकर मचान बनाने, बीज लगाने और फसल की देखभाल तक लगातार खर्च किया गया। अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन तेज आंधी ने कुछ ही समय में खेतों की स्थिति बदल दी।
किसानों के सामने अब सबसे बड़ी समस्या यह है कि फसल का नुकसान होने के बाद उनकी लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है। जिन किसानों ने बाजार में करेला बेचकर परिवार का खर्च चलाने की योजना बनाई थी, उन्हें अचानक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
अगस्त से दिसंबर तक होती थी करेला की कमाई
स्थानीय किसानों के अनुसार, करेला की फसल उनके लिए केवल एक मौसमी खेती नहीं बल्कि परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन है। किसान अगस्त से दिसंबर तक करेला की तुड़ाई कर उसे स्थानीय बाजारों में बेचते थे। लगातार तुड़ाई होने के कारण कई महीनों तक आमदनी बनी रहती थी।
किसानों को उम्मीद थी कि इस सीजन में अच्छी फसल होने पर उन्हें बेहतर आय मिलेगी। इसी उम्मीद में उन्होंने खेतों में मेहनत की और मचान तैयार करने सहित खेती पर खर्च किया। लेकिन आंधी-बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाकर किसानों की आय का बड़ा स्रोत ही खत्म कर दिया।
किसानों का कहना है कि अचानक हुई प्राकृतिक आपदा के कारण अब परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है। खेती पर निर्भर परिवारों के लिए यह नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाला है।
फसल बर्बादी के साथ करेला के दाम भी गिरे
किसानों को इस बार नुकसान की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ आंधी-बारिश ने खेतों में लगी करेला की फसल को बर्बाद कर दिया, वहीं दूसरी तरफ बाजार में करेला के भाव भी काफी नीचे आ गए हैं।
किसानों के मुताबिक, कुछ दिन पहले तक करेला करीब 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था। उस समय किसानों को उम्मीद थी कि अच्छी कीमत मिलने से उनकी लागत और मेहनत की भरपाई हो जाएगी। लेकिन वर्तमान में करेला का भाव घटकर लगभग 8 से 10 रुपये प्रति किलो रह गया है।
कीमत में आई इस बड़ी गिरावट ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। जिन किसानों की कुछ फसल बची भी है, उन्हें बाजार में अपेक्षित कीमत नहीं मिल रही है। ऐसे में प्राकृतिक नुकसान और बाजार भाव में गिरावट दोनों ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है।
किसानों ने प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग की
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल फसल और मकानों को हुए नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर नुकसान का सही आकलन होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि कितने किसानों की कितनी फसल बर्बाद हुई है और किन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
किसानों ने आपदा प्रबंधन मद से सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान की भरपाई अकेले करना उनके लिए संभव नहीं है। यदि प्रशासन की ओर से समय पर सर्वे कराकर आर्थिक सहायता दी जाती है तो प्रभावित परिवारों को काफी राहत मिल सकती है।
मसलिया के किसानों के सामने बढ़ी आर्थिक चुनौती
कृषि पर निर्भर ग्रामीण परिवारों के लिए फसल का नुकसान सीधे उनकी आय से जुड़ा होता है। करेला की फसल तैयार होने के बाद किसान लगातार इसकी तुड़ाई कर बाजार में बेचते हैं। इससे उन्हें एक निश्चित अवधि तक आमदनी होती रहती है। ऐसे में फसल का अचानक नष्ट होना पूरे कृषि चक्र को प्रभावित कर सकता है।
मसलिया के प्रभावित किसान अब प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। किसानों की मांग है कि नुकसान का जमीनी स्तर पर आकलन किया जाए और पात्र किसानों को सरकारी नियमों के तहत राहत दी जाए। साथ ही जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
फिलहाल आंधी-बारिश के बाद खेतों में हुए नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि उन्होंने जिस उम्मीद के साथ करेला की खेती की थी, वह प्राकृतिक आपदा के कारण टूट गई है। अब उन्हें राहत और मुआवजे का इंतजार है।
निष्कर्ष
मसलिया प्रखंड में आंधी-बारिश से करेला की फसल को हुए नुकसान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फसल बर्बादी के साथ बाजार में करेला के दाम में भारी गिरावट ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। प्रभावित किसान प्रशासन से जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और आपदा प्रबंधन मद से उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। अब किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।



