
Article 370 Anniversary: Article 370 हटाए जाने की वर्षगांठ के अवसर पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच जुबानी बयानबाज़ी तेज हो गई है। पाकिस्तान द्वारा 5 अगस्त को ‘यौम-ए-इस्तेहसल’ (शोषण दिवस) के रूप में मनाए जाने पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े संवैधानिक फैसले पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला हैं और इस पर किसी दूसरे देश को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।
भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के ऐसे बयान वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं और इनका भारत की नीति या निर्णयों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के दावों को किया खारिज
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बातचीत में पाकिस्तान के ‘यौम-ए-इस्तेहसल’ कार्यक्रम और उससे जुड़े बयानों को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश करता है, जबकि उसे अपने देश के मानवाधिकारों और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह के राजनीतिक बयान केवल प्रचार का हिस्सा हैं और भारत इन्हें गंभीरता से नहीं लेता।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और भविष्य में भी रहेंगे।
क्या है 5 अगस्त का महत्व?
5 अगस्त 2019 भारतीय राजनीति और संवैधानिक इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख मानी जाती है। इसी दिन केंद्र सरकार ने संसद में प्रस्ताव लाकर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त किया था और राज्य का पुनर्गठन करते हुए जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य क्षेत्र में समान संवैधानिक अधिकार, बेहतर प्रशासन और विकास को बढ़ावा देना था। वहीं इस फैसले को लेकर राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं।
पाकिस्तान हर साल क्यों मनाता है ‘यौम-ए-इस्तेहसल’?
भारत द्वारा 5 अगस्त 2019 को किए गए संवैधानिक बदलाव के बाद से पाकिस्तान हर वर्ष इस दिन को ‘यौम-ए-इस्तेहसल’ के रूप में मनाता है।
इस अवसर पर पाकिस्तान की ओर से विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर बयान जारी किए जाते हैं। भारत लगातार इन कार्यक्रमों और बयानों को खारिज करता आया है और इसे अपने आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप मानता है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री के बयान पर भारत की प्रतिक्रिया
हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति और जटिल हो गई है तथा इसका असर दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता पर पड़ा है।
भारत ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारत के संवैधानिक निर्णयों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि यह निर्णय भारत के संविधान और संसद की प्रक्रिया के तहत लिया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने फैसले को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास की नई संभावनाएं खुली हैं। उन्होंने लिखा कि पिछले वर्षों में दोनों क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता तथा खेल जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के सभी प्रावधान पूरी तरह लागू होने से महिलाओं, अनुसूचित वर्गों और अन्य वंचित समुदायों को वे अधिकार मिले हैं, जिनसे वे पहले वंचित थे।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता के प्रति उनका दृष्टिकोण और योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत है। प्रधानमंत्री के अनुसार, जिस एक भारत की कल्पना डॉ. मुखर्जी ने की थी, वह 5 अगस्त 2019 के फैसले के बाद और मजबूत हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार विकसित भारत के साथ-साथ समृद्ध जम्मू-कश्मीर और खुशहाल लद्दाख के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में शांति, विकास और समान अवसरों का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय एकता के प्रति उनके योगदान को याद किया।
भाजपा अध्यक्ष का बयान
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी इस अवसर पर संदेश जारी किया।
उन्होंने कहा कि 5 अगस्त आधुनिक भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। उनके अनुसार, इस निर्णय ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को नई दिशा दी और देश की एकजुटता को और मजबूत किया।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्या बदला?
केंद्र सरकार का कहना है कि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में कई परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है। सरकार का दावा है कि निवेश, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की अलग-अलग राय भी रही है। कुछ इसे ऐतिहासिक सुधार मानते हैं, जबकि कुछ इसके प्रभावों पर अलग दृष्टिकोण रखते हैं।
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जुड़े संवैधानिक फैसले पूरी तरह उसके आंतरिक अधिकार क्षेत्र में आते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से दिए जाने वाले बयान या प्रतीकात्मक कार्यक्रम भारत की नीति को प्रभावित नहीं कर सकते।
सरकार का कहना है कि उसका ध्यान क्षेत्र में विकास, सुशासन और नागरिकों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
निष्कर्ष
अनुच्छेद 370 हटाए जाने की वर्षगांठ पर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी देखने को मिली। पाकिस्तान द्वारा ‘यौम-ए-इस्तेहसल’ मनाने और जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी करने के बाद भारत ने स्पष्ट शब्दों में इसे खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा नेतृत्व ने इस अवसर पर 2019 के फैसले को सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल बताते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास और समान अवसरों पर जोर दिया। आने वाले समय में भी यह मुद्दा भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रह सकता है।



