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Jharkhand JPSC Protest: 14वें दिन सरकार झुकी

Jharkhand JPSC Protest: झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच अभ्यर्थियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच और राज्य सरकार के बीच शुक्रवार रात अहम बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक को लेकर हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे आंदोलन की दिशा तय हो सकती है।

हालांकि छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि केवल बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।


14वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, छह अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर

JPSC भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन शुक्रवार को 14वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र और अभ्यर्थी जुटे रहे, जबकि छह अभ्यर्थी लगातार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का कहना है कि यह केवल उनके भविष्य का सवाल नहीं है, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के विश्वास और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की लड़ाई भी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।

आंदोलन के दौरान छात्रों ने सरकार से जल्द से जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग दोहराई और कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।


सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया छात्र प्रतिनिधिमंडल

लगातार बढ़ते आंदोलन और छात्रों के दबाव के बाद झारखंड सरकार ने पहल करते हुए आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। जानकारी के अनुसार, राज्य अतिथि गृह (स्टेट गेस्ट हाउस) में शुक्रवार रात सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बैठक होगी।

इस बैठक में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया है। माना जा रहा है कि सरकार छात्रों की मांगों को सुनने के साथ-साथ आंदोलन समाप्त करने का रास्ता तलाशने की कोशिश करेगी।


छात्रों ने दोहराई सबसे बड़ी मांग, 14वीं JPSC परीक्षा रद्द हो

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रविंद्र पासवान ने कहा कि सरकार से बातचीत के लिए जाना आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हो जातीं।

छात्रों की सबसे बड़ी मांग 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की है। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में पारदर्शिता नहीं रही तो योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित होगा और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा भी कमजोर पड़ेगा।


CBI या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों से जांच की मांग

प्रदर्शनकारी केवल परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच भी चाहते हैं।

छात्रों का कहना है कि मामले की जांच या तो केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए या फिर झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की समिति गठित की जाए। उनका तर्क है कि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच होने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई संभव हो सकेगी।

छात्र नेताओं का कहना है कि यदि जांच राज्य स्तर पर ही सीमित रही तो निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।


सरकार की ओर से पांच सदस्यीय समिति करेगी बातचीत

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से पांच सदस्यीय समिति छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत करेगी। इस समिति में राज्य सरकार के दो मंत्री दीपिका पांडे सिंह और सुदिव्य कुमार शामिल रहेंगे।

इसके अलावा समिति में चमरा लिंडा, संजय प्रसाद और स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह भी मौजूद रहेंगे। सरकार की कोशिश होगी कि छात्रों की चिंताओं को समझकर किसी सहमति तक पहुंचा जाए।

हालांकि अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बैठक के बाद सरकार कोई बड़ा फैसला लेती है या केवल जांच और समीक्षा का भरोसा देती है।


झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

झारखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई बार विवाद सामने आए हैं। पेपर लीक, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और परिणामों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

इसी वजह से युवाओं में भर्ती एजेंसियों के प्रति भरोसा कमजोर हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस मामले में पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई करती है तो भर्ती प्रक्रिया में लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत किया जा सकता है।


बैठक से क्या निकल सकता है समाधान?

शुक्रवार रात होने वाली बैठक को आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। यदि सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं यदि बातचीत बेनतीजा रहती है, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार पर अब दोहरी जिम्मेदारी है। एक ओर छात्रों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है, तो दूसरी ओर भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी कायम रखनी होगी। ऐसे में बैठक के बाद लिए जाने वाले फैसले पर पूरे राज्य की नजर रहेगी।


अभ्यर्थियों की उम्मीदें अब सरकार के फैसले पर टिकीं

झारखंड के हजारों युवा इस समय सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली वार्ता का इंतजार कर रहे हैं। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार केवल औपचारिक बातचीत तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस और पारदर्शी निर्णय लेकर भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए।

यदि सरकार छात्रों की चिंताओं का संतोषजनक समाधान निकालने में सफल होती है, तो यह न केवल मौजूदा विवाद को खत्म करने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य की भर्ती परीक्षाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं यदि समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

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