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Ashok Mittal ED Raid: LPU तक पहुंची जांच, सियासत में हड़कंप

Ashok Mittal ED Raid: पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब Enforcement Directorate (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत चल रही जांच के सिलसिले में की गई है। जैसे ही यह खबर सामने आई, राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

यह छापेमारी ऐसे समय पर हुई है जब पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की चर्चा तेज हो रही है, जिससे इस कार्रवाई को लेकर सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं।


किन-किन जगहों पर हुई ED की कार्रवाई?

सूत्रों के अनुसार, ED की टीमों ने पंजाब और गुरुग्राम में करीब 8 से 9 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इनमें जालंधर और फगवाड़ा जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। जांच एजेंसी ने न केवल व्यावसायिक परिसरों बल्कि आवासीय संपत्तियों और एक फार्महाउस को भी खंगाला, जो अशोक मित्तल और उनके परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं।

इस कार्रवाई के दौरान उनके बेटे और अन्य पारिवारिक सदस्यों से जुड़े ठिकानों की भी तलाशी ली गई। उनके भाइयों रमेश मित्तल और नरेश मित्तल से संबंधित स्थान भी जांच के दायरे में आए।


Lovely Group पर जांच की आंच

ED की यह कार्रवाई खास तौर पर मित्तल के नेतृत्व वाले लवली ग्रुप पर केंद्रित रही। यह समूह शिक्षा और व्यापार के कई क्षेत्रों में सक्रिय है। जांच के दायरे में Lovely Professional University (LPU), Lovely Autos, Lovely Sweets और Lovely Distance Education Centre जैसे संस्थान शामिल हैं।

जालंधर स्थित LPU कैंपस में भी ED अधिकारियों की मौजूदगी देखी गई, जहां दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी फंड फ्लो और वित्तीय लेनदेन में संभावित अनियमितताओं की पड़ताल कर रही है।


FEMA के तहत क्या है मामला?

यह पूरी कार्रवाई FEMA यानी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत की जा रही है। यह कानून विदेशी मुद्रा लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय फंड ट्रांसफर से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। यदि किसी संस्था या व्यक्ति द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो ED जांच शुरू कर सकती है।

इस मामले में भी आशंका जताई जा रही है कि लवली ग्रुप के कुछ लेनदेन FEMA के नियमों के अनुरूप नहीं थे, जिसकी जांच अब तेज कर दी गई है।


AAP का आरोप: राजनीतिक बदले की कार्रवाई

इस छापेमारी के बाद आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने कहा कि यह कार्रवाई आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

AAP नेताओं का आरोप है कि केंद्र की एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि पंजाब के मतदाता इस तरह की राजनीति का जवाब चुनाव में देंगे।


संजय सिंह और अन्य नेताओं का बयान

AAP के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले एजेंसियों का इस्तेमाल करना एक पैटर्न बन गया है। उनके अनुसार, इससे भाजपा को कोई राजनीतिक फायदा नहीं मिलेगा।


भगवंत मान का BJP पर निशाना

पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने भी ED की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “चुनाव की तैयारी” का संकेत है।

उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सही संकेत नहीं है।


क्या राघव चड्ढा से जुड़ा है मामला?

AAP के पंजाब अध्यक्ष Aman Arora ने इस मामले को पार्टी के हालिया फैसलों से जोड़ते हुए कहा कि अशोक मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई है। उन्होंने इशारों-इशारों में Raghav Chadha के स्थान पर मित्तल की नियुक्ति को भी इस कार्रवाई से जोड़ा।

उनका कहना है कि जो भी भाजपा के खिलाफ खड़ा होता है, उसके खिलाफ जांच शुरू हो जाती है।


क्या आगे बढ़ेगी जांच?

फिलहाल ED की जांच जारी है और एजेंसी दस्तावेजों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक ED की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से यह मामला काफी महत्वपूर्ण बन गया है और इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


निष्कर्ष

अशोक मित्तल से जुड़े ठिकानों पर ED की छापेमारी ने पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर जांच एजेंसी इसे कानूनी कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी ओर AAP इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति मान रही है। आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और अधिक स्पष्ट करेंगी। फिलहाल, यह मुद्दा राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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