
वॉशिंगटन/तेहरान, 28 मई 2026 | US-Iran Israel War: अमेरिका, ईरान और इजरायल से जुड़ा सैन्य तनाव एक बार फिर खाड़ी क्षेत्र में गंभीर रूप लेता दिख रहा है। ईरान के दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के पास अमेरिकी कार्रवाई के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर “संप्रभुता के उल्लंघन” का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओमान पर दी गई चेतावनी ने कूटनीतिक विवाद को और गहरा कर दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यूएस सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास चार ईरानी वन-वे अटैक ड्रोन मार गिराए, जिन्हें अमेरिकी बलों और वाणिज्यिक समुद्री यातायात के लिए खतरा बताया गया। इसके अलावा अमेरिका ने बंदर अब्बास में एक ईरानी ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को निशाना बनाया, जिसके बारे में दावा किया गया कि वहां से पांचवां ड्रोन लॉन्च होने वाला था। 1
IRGC का दावा: अमेरिकी एयरबेस को बनाया निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया। IRGC के अनुसार, बंदर अब्बास एयरपोर्ट के बाहरी क्षेत्र में अमेरिकी हमले के बाद सुबह 4:50 बजे उस एयरबेस पर कार्रवाई की गई, जिसे ईरान ने हमले का स्रोत बताया। हालांकि, किस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक स्पष्ट नहीं है। यूरोन्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत की सेना ने भी उसी समय के आसपास मिसाइल और ड्रोन खतरों से निपटने की बात कही, लेकिन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। 2
ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि यह कार्रवाई अमेरिका के लिए “गंभीर चेतावनी” है। तेहरान ने संकेत दिया है कि अगर आगे कोई हमला हुआ, तो प्रतिक्रिया और कठोर हो सकती है। दूसरी तरफ, वॉशिंगटन अपनी कार्रवाई को “रक्षात्मक” बता रहा है और कह रहा है कि उसका उद्देश्य खाड़ी में समुद्री मार्गों और अमेरिकी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ओमान को लेकर ट्रंप की चेतावनी से नया विवाद
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओमान को लेकर टिप्पणी ने क्षेत्रीय कूटनीति को और संवेदनशील बना दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन से जुड़े संभावित ईरान-ओमान समझौते पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं रहेगा। उनके बयान में ओमान को लेकर कठोर भाषा इस्तेमाल की गई, जिस पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। 3
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिकी अधिकारियों की “धमकी भरी भाषा” की निंदा की और ओमान की सरकार व जनता के साथ एकजुटता जताई। ईरान का कहना है कि क्षेत्रीय देशों को धमकाने से तनाव कम नहीं होगा, बल्कि संवाद की गुंजाइश और कमजोर होगी। गार्जियन की लाइव रिपोर्ट के अनुसार, बघाई ने बंदर अब्बास पर अमेरिकी हमलों और ओमान को लेकर अमेरिकी बयान दोनों की निंदा की। 3
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे ऊर्जा बाजारों, तेल कीमतों और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है। अमेरिका इस मार्ग को खुला रखने की बात कर रहा है, जबकि ईरान अपने क्षेत्रीय अधिकारों और सुरक्षा चिंताओं पर जोर दे रहा है।
इसी संदर्भ में अमेरिका ने ईरान द्वारा बनाई गई Persian Gulf Strait Authority पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि यह संस्था होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के निर्देशों के तहत समुद्री मार्गों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी ट्रेजरी ने इस संस्था को प्रतिबंधित सूची में डालते हुए उससे जुड़ी संपत्तियों और लेनदेन पर रोक लगाने की बात कही है। 4
बातचीत और सैन्य दबाव साथ-साथ
राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका अभी प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका “काम पूरा” करने का विकल्प रखता है। AP की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने ईरान को लेकर कहा कि वह “negotiating on fumes” यानी कमजोर स्थिति में बातचीत कर रहा है, जबकि बातचीत अभी भी अनिश्चित दौर में है। 1
यह स्थिति दिखाती है कि एक तरफ अमेरिका कूटनीतिक समाधान की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंध भी जारी हैं। ईरान भी जवाबी कार्रवाई के दावे कर रहा है और अपनी संप्रभुता की रक्षा का संदेश दे रहा है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में युद्धविराम या शांति समझौते की संभावनाएं फिलहाल नाजुक दिखाई दे रही हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका, ईरान या इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा। तेल कीमतों में तेजी, समुद्री बीमा लागत में बढ़ोतरी, वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और मध्य पूर्व में नए सैन्य मोर्चों के खुलने का खतरा पैदा हो सकता है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकाल पाएंगे, या बंदर अब्बास और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य टकराव और तेज होगा। ओमान जैसे मध्यस्थ देश इस संकट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन ट्रंप की धमकी के बाद उनकी भूमिका भी कूटनीतिक दबाव में आ गई है।


