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Rahul Gandhi on CBSE Controversy: ‘प्रधानमंत्री का घमंड तोड़ेगी यह जेन-ज़ी (Gen Z)!’ सीबीएसई विवाद पर भड़के राहुल गांधी; डिजिटल चेकिंग (OSM) के चक्कर में 3 साल में सबसे कम रहा पास प्रतिशत

नई दिल्ली | 26 मई, 2026 | Rahul Gandhi on CBSE Controversy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी संग्राम का रूप ले चुका है। इस साल लागू किए गए नए डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में आई तकनीकी गड़बड़ियों और छात्रों की शिकायतों पर केंद्र सरकार के रवैये को लेकर विपक्ष पूरी तरह आक्रामक है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि इस सरकार ने देश की एक और विश्वसनीय संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया है। राहुल गांधी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हक के लिए सवाल पूछने वाले ‘जनरेशन-ज़ी’ (Gen Z) यानी आज के युवा ही आने वाले समय में प्रधानमंत्री का घमंड चकनाचूर करेंगे।

“सवाल पूछने पर छात्र को बताया देशद्रोही और सोरोस एजेंट” – राहुल गांधी का ‘X’ पर फूटा गुस्सा

सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी ने सीबीएसई के री-इवैल्युएशन पोर्टल पर न्याय की गुहार लगा रहे एक 17 वर्षीय छात्र के ऑनलाइन उत्पीड़न का मुद्दा उठाया।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा:

“मोदी-शाह की जोड़ी ने एक और प्रतिष्ठित संस्थान को धांधली का प्रतीक बना दिया है। दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं पर इतने गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस साल 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी थी— और पिछले एक हफ्ते से डिजिटल चेकिंग (OSM), गलत नंबर चढ़ने और पोर्टल क्रैश होने की शिकायतें अनसुनी की जा रही हैं, जबकि शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी से चिपके हुए हैं। जब एक 17 साल के छात्र ने अपनी कॉपियों में गड़बड़ी के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई, तो मदद के बजाय उसे गालियां दी गईं। सत्तारूढ़ दल के आईटी सेल ने उसे ‘एंटी-नेशनल’, ‘सोरोस एजेंट’ (Soros Agent) और ‘डीप स्टेट’ का हिस्सा करार दे दिया।”

राहुल गांधी ने आगे कहा, “सच्चाई यह है कि मोदी सरकार देश के युवाओं और जेन-जी से डरती है, क्योंकि वे अब सीधे और तीखे सवाल पूछ रहे हैं। जो भी सवाल पूछता है, यह सरकार उसे बदनाम करती है, डराती है और कुचल देती है। लेकिन मोदी जी सुन लीजिए— यही युवा आपका अहंकार तोड़ेंगे।”

आंकड़ों की गवाही: डिजिटल चेकिंग (OSM) लागू होते ही अचानक गिरा पास प्रतिशत

सीबीएसई के इस साल के नतीजों के आंकड़े खुद ब खुद बयां कर रहे हैं कि नया डिजिटल सिस्टम कहीं न कहीं छात्रों के लिए जी का जंजाल साबित हुआ है। पिछले तीन वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े देखें तो पता चलता है कि जहां हर साल पास प्रतिशत बढ़ रहा था, वहीं इस साल इसमें ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

  • साल 2023: कुल 16,60,511 छात्र परीक्षा में बैठे थे, जिनमें से 14,50,174 छात्र पास हुए। कुल पास प्रतिशत 87.33% रहा।

  • साल 2024: सफलता का यह ग्राफ और ऊपर गया और पास प्रतिशत बढ़कर 87.98% पर पहुंच गया।

  • साल 2025: पिछले साल रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ सीबीएसई कक्षा 12वीं का पास प्रतिशत 88.39% दर्ज किया गया।

  • साल 2026 (मौजूदा वर्ष): जैसे ही इस साल बोर्ड ने पारंपरिक कॉपियों के बजाय ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल सिस्टम को लागू किया, पास प्रतिशत अचानक भारी गिरावट के साथ 85.20% पर सिमट गया।

छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि कॉपियों की जल्दबाजी में की गई स्कैनिंग, धुंधली पीडीएफ और सर्वर एरर के कारण हजारों होनहार बच्चों के नंबर कम हुए हैं, जिसका सीधा असर उनके पूरे रिजल्ट पर पड़ा है।

जनाक्रोश के आगे झुका सीबीएसई: तारीख बढ़ाई और एक्स्ट्रा फीस रिफंड का एलान

देश भर में सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से और छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए सीबीएसई को बैकफुट पर आना पड़ा है। बोर्ड ने रविवार को दो बड़ी राहतों की घोषणा की:

  1. एक्स्ट्रा फीस होगी वापस: बोर्ड ने माना कि रिजल्ट के बाद स्क्रूटनी और कॉपियों की स्कैन कॉपी डाउनलोड करने की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी खराबी की वजह से कई छात्रों से गलती से अतिरिक्त या गलत शुल्क (Extra Fees) वसूल लिया गया था। सीबीएसई यह पूरा पैसा प्रभावित छात्रों को वापस (Refund) करेगा।

  2. डेडलाइन में विस्तार: छात्रों और सर्वर क्रैश की समस्या को देखते हुए मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 25 मई, 2026 की आधी रात तक कर दिया गया था।

आईआईटी के वैज्ञानिक संभालेंगे मोर्चा, धर्मेंद्र प्रधान बोले- “छात्र हित सर्वोपरि”

विवाद को बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने स्थिति को संभालने के लिए देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों को मोर्चे पर लगा दिया है। शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार, आईआईटी मद्रास (IIT Madras) और आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के प्रोफेसरों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की विशेष टीमों को प्रतिनियुक्त किया गया है।

यह एक्सपर्ट टीम सीबीएसई के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों, पोर्टल की स्थिरता (Portal Stability), सर्वर परफॉर्मेंस और डिजिटल वर्कफ़्लो की गहन जांच करेगी ताकि भविष्य में री-इवैल्युएशन की प्रक्रिया पूरी तरह ग्लिच-फ्री (Glitch-free) हो सके। शिक्षा मंत्री ने दोहराया कि “छात्रों के हित हमारे लिए सर्वोपरि हैं” और एक पारदर्शी, कुशल और छात्र-अनुकूल प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए सभी सुधारात्मक कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जा रहे हैं।

CBSE बोर्ड परीक्षा और OSM विवाद 2026: एक नज़र में मुख्य फैक्ट्स

मूल्यांकन का पहलू पिछले वर्षों का ट्रेंड (2023-2025) साल 2026 की वर्तमान स्थिति (नया सिस्टम)
मूल्यांकन पद्धति शिक्षकों द्वारा पारंपरिक रूप से फिजिकल कॉपियों की मैन्युअल चेकिंग। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM); कॉपियों को स्कैन कर कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा गया।
कक्षा 12वीं का पास प्रतिशत लगातार वृद्धि (87.33% से बढ़कर 2025 में 88.39% तक पहुंचा)। अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई, पास प्रतिशत घटकर 85.20% पर आया।
तकनीकी और सर्वर शिकायतें न के बराबर; प्रक्रिया ऑफलाइन और सुचारू रूप से चलती थी। पोर्टल का लगातार क्रैश होना, धुंधली स्कैन कॉपी और एक्स्ट्रा फीस कटने की गंभीर समस्याएं।
सरकार का डैमेज कंट्रोल सामान्य प्रशासनिक देखरेख। IIT मद्रास और IIT कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों को सिस्टम सुधारने का जिम्मा सौंपा गया।

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