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RBI Repo Rate 2026: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, GDP ग्रोथ 6.7% का अनुमान

RBI Repo Rate 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की घोषणा करते हुए रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक ने लगातार आर्थिक हालात का आकलन करने के बाद रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखने का फैसला लिया है। इसके साथ ही RBI ने अपनी ‘न्यूट्रल’ (Neutral) नीति का रुख भी कायम रखा है।

इस फैसले का सीधा असर बैंकिंग सेक्टर, होम लोन, ऑटो लोन, बिजनेस लोन और निवेशकों की उम्मीदों पर पड़ता है। हालांकि रेपो रेट में बदलाव नहीं होने से फिलहाल लोन की ब्याज दरों में तत्काल कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलने की संभावना कम है।


भारतीय अर्थव्यवस्था पर RBI का भरोसा पहले से ज्यादा मजबूत

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। उनके मुताबिक देश में मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों में सुधार और निर्यात में बेहतर प्रदर्शन की वजह से विकास की रफ्तार बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कई तरह की चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति अपेक्षा से बेहतर बनी हुई है।

GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया गया

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय बैंक का अनुमान इससे थोड़ा कम था।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। इसी सकारात्मक प्रदर्शन को देखते हुए विकास दर के अनुमान में संशोधन किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत विकास दर्ज कर सकता है।


महंगाई को लेकर भी राहत की खबर

भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई (CPI Inflation) को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान पहले के 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है।

RBI के अनुसार हाल के महीनों में महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी रही है। हालांकि व्यापक स्तर पर मांग बढ़ने की वजह से महंगाई नहीं बढ़ी है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरा संकेत माना जा रहा है।

यदि खाद्य आपूर्ति सामान्य रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो आने वाले महीनों में महंगाई पर और नियंत्रण संभव है।

रेपो रेट क्या होता है और इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के बदले धन उपलब्ध कराता है।

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा उधार लेना महंगा हो जाता है। इसका असर होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। वहीं, रेपो रेट घटने पर बैंकों के लिए फंड सस्ता हो जाता है, जिससे लोन भी अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।

इस बार रेपो रेट को स्थिर रखने का मतलब है कि फिलहाल ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।


वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति मजबूत

RBI ने माना कि दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।

गवर्नर ने कहा कि कई महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग और बेहतर आर्थिक नीतियों की बदौलत संतुलित बनी हुई है।

यही वजह है कि केंद्रीय बैंक ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास दर को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है।

विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार से मिली मजबूती

RBI के मुताबिक भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगातार मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में भी हाल के महीनों में सुधार देखने को मिला है।

केंद्रीय बैंक ने बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 693 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बना हुआ है। यह भंडार भारत को दस महीने से अधिक के आयात खर्च को पूरा करने की क्षमता देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का बड़ा संकेत माना जाता है और इससे रुपये की मजबूती बनाए रखने में भी मदद मिलती है।


जल्द बाजार में आएंगे Polymer Notes

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यदि तय समय के अनुसार सभी तैयारियां पूरी हो जाती हैं तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में Polymer Notes का प्रचलन शुरू किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पॉलिमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं। ये जल्दी खराब नहीं होते और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

RBI ने यह भी स्पष्ट किया कि इन नोटों की सुरक्षा विशेषताओं, डिजाइन और अन्य तकनीकी जानकारियों की घोषणा उचित समय पर की जाएगी।

Polymer Notes पहले भी कई देशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए जा रहे हैं और इन्हें नकली नोटों की चुनौती से निपटने के लिहाज से भी अधिक सुरक्षित माना जाता है।

CBDC और Unified Lending Interface का बढ़ रहा इस्तेमाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने डिजिटल बैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण अपडेट भी दिए।

उन्होंने बताया कि Central Bank Digital Currency (CBDC) यानी डिजिटल रुपये का इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। बैंक, व्यापारी और अन्य संस्थान इसे स्वीकार कर रहे हैं और इसका दायरा लगातार विस्तारित हो रहा है।

इसके साथ ही Unified Lending Interface (ULI) को भी वित्तीय क्षेत्र में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इससे भविष्य में डिजिटल लोन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और आसान बनने की उम्मीद है।


आने वाले समय में क्या रहेगा असर?

RBI के ताजा फैसलों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाना, महंगाई का अनुमान कम करना और रेपो रेट को स्थिर रखना यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्रीय बैंक का भरोसा मजबूत है। वहीं Polymer Notes और डिजिटल रुपये जैसे कदम भविष्य की आधुनिक वित्तीय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

अब बाजार, उद्योग और आम लोगों की नजर आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर RBI भविष्य में ब्याज दरों को लेकर अगला फैसला करेगा।

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