
अगर आप परिवार के साथ बैठकर कोई ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं, जिसमें इमोशन के साथ कहानी का रोमांच भी बना रहे, तो कन्नड़ सिनेमा की एक बेहतरीन फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है। यह उन फिल्मों में से है, जिन्हें देखने के लिए बड़े बजट, महंगे सेट या जबरदस्त एक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। मजबूत कहानी, बेहतरीन कलाकार और रिश्तों की संवेदनशील कहानी इसे खास बनाती है।
हम बात कर रहे हैं साल 2016 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ (Godhi Banna Sadharana Mykattu) की। फिल्म में एक बुजुर्ग पिता के अचानक गायब हो जाने के बाद उसके बेटे की तलाश को कहानी का केंद्र बनाया गया है। शुरुआत में यह एक सामान्य फैमिली ड्रामा लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसमें क्राइम, सस्पेंस और थ्रिलर का रंग भी गहराता जाता है। यही वजह है कि फिल्म आज भी कन्नड़ सिनेमा की चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है।
2016 में रिलीज हुई थी ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’
‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ साल 2016 में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन हेमंत राव ने किया था और इसकी कहानी को बेहद संवेदनशील तरीके से पर्दे पर पेश किया गया है। फिल्म ने बिना किसी बड़े स्टारडम या भव्य प्रोडक्शन के अपनी कहानी के दम पर दर्शकों का ध्यान खींचा।
फिल्म की खास बात यह है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति के लापता होने की कहानी नहीं है। इसके पीछे परिवार, उम्र, याददाश्त, अकेलापन और बदलती जीवनशैली जैसे कई भावनात्मक पहलू जुड़े हुए हैं। कहानी दर्शकों को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि आधुनिक जिंदगी की भागदौड़ में हम अपने सबसे करीबी रिश्तों को कितना समय दे पा रहे हैं।
फिल्म को IMDb पर 8.6 की शानदार रेटिंग मिलने की बात कही जाती है। हालांकि, IMDb की रेटिंग समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इसे मौजूदा रेटिंग के रूप में प्लेटफॉर्म पर जांचना बेहतर होगा।
क्या है ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ की कहानी?
फिल्म की कहानी वेंकोब राव नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है। वेंकोब राव अल्जाइमर से जूझ रहे हैं और उनकी याददाश्त कमजोर होती जा रही है। उनकी जिंदगी में उम्र और बीमारी के कारण कई तरह की परेशानियां हैं।
वेंकोब राव का बेटा शिवा अपनी कॉर्पोरेट नौकरी और आधुनिक शहरी जीवन में व्यस्त रहता है। काम और जिम्मेदारियों के बीच पिता के साथ उसका रिश्ता पहले जैसा नहीं रह गया है। दोनों एक ही परिवार का हिस्सा होने के बावजूद उनके बीच एक भावनात्मक दूरी दिखाई देती है।
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब वेंकोब राव अचानक घर से गायब हो जाते हैं। परिवार के लिए यह बेहद चिंता का विषय बन जाता है। इसके बाद उनका बेटा शिवा उन्हें खोजने निकलता है। पिता की तलाश में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे शिवा की अपनी जिंदगी और रिश्तों को समझने की यात्रा भी बन जाता है।
अनंत नाग ने जीता दर्शकों का दिल
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं और इनमें दिग्गज अभिनेता अनंत नाग का प्रदर्शन विशेष रूप से यादगार है। उन्होंने वेंकोब राव का किरदार निभाया है। अल्जाइमर से प्रभावित एक बुजुर्ग व्यक्ति की मानसिक स्थिति, मासूमियत और असहायता को उन्होंने बेहद सहज तरीके से पर्दे पर उतारा है।
उनके अभिनय में बनावटीपन नजर नहीं आता। कई दृश्यों में उनका किरदार बिना ज्यादा संवाद बोले ही अपनी भावनाएं दर्शकों तक पहुंचा देता है। यही इस फिल्म की खूबसूरती भी है। वेंकोब राव का किरदार दर्शकों के मन में धीरे-धीरे जगह बनाता है और उनकी स्थिति के साथ भावनात्मक जुड़ाव महसूस होने लगता है।
अनंत नाग का अभिनय इस फिल्म को सिर्फ एक थ्रिलर बनने से रोकता है और इसे एक संवेदनशील पारिवारिक कहानी में बदल देता है।
रक्षित शेट्टी बने बेटे शिवा
फिल्म में रक्षित शेट्टी ने शिवा का किरदार निभाया है। शिवा एक ऐसा युवा है, जो अपने करियर और कॉर्पोरेट जिंदगी में पूरी तरह व्यस्त है। शुरुआत में वह अपने पिता के साथ उतना जुड़ा हुआ नहीं दिखाई देता, जितना एक बेटे और पिता के रिश्ते में होना चाहिए।
लेकिन पिता के गायब होने के बाद उसकी प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं। वह उन्हें ढूंढने के लिए निकलता है और इस तलाश के दौरान उसे अपने पिता के साथ बिताए समय और अपने व्यवहार को लेकर कई एहसास होते हैं।
शिवा का किरदार फिल्म की भावनात्मक रीढ़ है। उसके जरिए कहानी यह सवाल उठाती है कि क्या हम अपने परिवार के साथ रहते हुए भी उनसे भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं? काम और करियर जरूरी हैं, लेकिन रिश्तों के लिए समय निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पिता-पुत्र के रिश्ते को अलग अंदाज में दिखाती है फिल्म
‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ की सबसे खास बात इसका पिता-पुत्र वाला एंगल है। आमतौर पर फिल्मों में पिता और बेटे के रिश्ते को भावुक संवादों या बड़े ड्रामे के जरिए दिखाया जाता है, लेकिन यहां कहानी ज्यादा स्वाभाविक नजर आती है।
शिवा और वेंकोब राव के बीच की दूरी धीरे-धीरे सामने आती है। पिता की बीमारी और उनके गायब होने की घटना बेटे को यह समझने का मौका देती है कि वह अपने पिता से कितना दूर हो चुका था।
यही वजह है कि फिल्म सिर्फ बुजुर्गों या परिवारों से जुड़ी कहानी नहीं रह जाती। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में व्यस्त रहने वाले हर व्यक्ति को इसमें अपने रिश्तों की एक झलक दिखाई दे सकती है।
इमोशन के साथ क्राइम और थ्रिलर का तड़का
अगर आपको लगता है कि यह केवल पिता और बेटे की इमोशनल कहानी है, तो फिल्म का दूसरा पहलू आपको चौंका सकता है। वेंकोब राव के लापता होने के बाद कहानी में क्राइम और सस्पेंस का एंगल जुड़ जाता है।
वेंकोब राव की मुलाकात ऐसे लोगों से होती है, जिनका संबंध अपराध की दुनिया से है। इनमें एक कॉन्ट्रैक्ट किलर और उसका साथी भी शामिल है। इसके बाद कहानी दो अलग-अलग ट्रैक पर आगे बढ़ती है।
एक तरफ शिवा अपने पिता को ढूंढ रहा होता है और दूसरी तरफ वेंकोब राव ऐसे घटनाक्रम में फंस जाते हैं, जिसका उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं होता। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कई सवाल सामने आते हैं और दर्शक यह जानने के लिए उत्सुक रहता है कि आखिर वेंकोब राव के साथ क्या हुआ।
फिल्म का यही मिश्रण इसे खास बनाता है। भावनात्मक कहानी के बीच आने वाला क्राइम और सस्पेंस फिल्म की गति को बनाए रखता है।
कम बजट की फिल्म, लेकिन कहानी में दम
कन्नड़ सिनेमा ने कई बार यह साबित किया है कि अच्छी फिल्म बनाने के लिए केवल बड़ा बजट या सुपरस्टार जरूरी नहीं होता। ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ भी इसी सोच का एक अच्छा उदाहरण है।
फिल्म की कहानी जमीन से जुड़ी हुई है और इसके किरदार आम जिंदगी के लोगों जैसे लगते हैं। इसमें रिश्तों की जटिलता है, बीमारी की संवेदनशीलता है और अपराध की दुनिया का रोमांच भी है। इन सभी पहलुओं को एक साथ जोड़कर फिल्म को एक अलग अनुभव दिया गया है।
यही कारण है कि रिलीज के कई साल बाद भी यह फिल्म सिनेमा प्रेमियों की वॉचलिस्ट में बनी हुई है।
क्यों देखनी चाहिए ‘Godhi Banna Sadharana Mykattu’?
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें कहानी धीरे-धीरे खुलती है और किरदारों के साथ भावनात्मक जुड़ाव पैदा होता है, तो यह फिल्म आपके लिए अच्छी पसंद हो सकती है। इसमें जबरदस्ती का एक्शन या अनावश्यक ग्लैमर नहीं है। फिल्म अपने किरदारों और कहानी के दम पर दर्शक को जोड़े रखती है।
खासकर पिता और बेटे के रिश्ते को जिस संवेदनशीलता से दिखाया गया है, वह फिल्म की सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। वहीं अल्जाइमर से जूझ रहे बुजुर्ग की कहानी फिल्म को एक गंभीर भावनात्मक आधार देती है।
इसके साथ क्राइम और सस्पेंस का जुड़ना कहानी को और दिलचस्प बना देता है। यानी अगर आप फैमिली ड्रामा, इमोशनल कहानी और थ्रिलर का मिश्रण देखना चाहते हैं, तो ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं।
कहां देखें ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’?
अगर आप इस कन्नड़ फिल्म को देखना चाहते हैं, तो उपलब्ध जानकारी के अनुसार ‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ JioHotstar पर उपलब्ध है। हालांकि OTT प्लेटफॉर्म पर फिल्मों की उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है, इसलिए देखने से पहले प्लेटफॉर्म पर फिल्म का नाम सर्च करके उपलब्धता की पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
‘गोधी बन्ना साधारण मायकट्टू’ उन फिल्मों में शामिल है, जो अपनी सादगी के बावजूद लंबे समय तक याद रहती हैं। एक बुजुर्ग पिता का गायब होना कहानी की शुरुआत करता है, लेकिन उसके बाद फिल्म परिवार, रिश्तों, पछतावे, बीमारी और इंसानी संवेदनाओं की गहराई तक पहुंचती है।
अनंत नाग और रक्षित शेट्टी का अभिनय कहानी को मजबूत आधार देता है, जबकि क्राइम और सस्पेंस का ट्रैक फिल्म को सिर्फ इमोशनल ड्रामा बनने से बचाता है। अगर आप बड़ी स्टारकास्ट और भारी-भरकम एक्शन से अलग कुछ सार्थक और रोमांचक देखना चाहते हैं, तो यह 2016 की कन्नड़ फिल्म आपकी वॉचलिस्ट में जगह पाने की हकदार है।



