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Monsoon Alert IMD Forecast on Rainfall | महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत कई राज्यों में कम होगी बारिश

Monsoon Alert IMD Forecast on Rainfall: देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों की भारी बारिश के बाद अब भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर नई चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले लगभग दो सप्ताह तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे धान, कपास, सोयाबीन और मक्का की बुआई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल ही में पश्चिमी तट पर हुई तेज बारिश से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यदि इसके तुरंत बाद लंबा शुष्क दौर आता है तो फसलों के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है।


मौसम विभाग ने क्यों जताई कम बारिश की आशंका?

भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले पखवाड़े में मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (Madden-Julian Oscillation – MJO) की स्थिति मानसून के लिए अनुकूल नहीं रहने वाली है। इसके अलावा इस अवधि में किसी मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure System) के बनने की संभावना भी काफी कम है।

आमतौर पर जब एमजेओ सक्रिय रहता है तो मानसून मजबूत होता है और कई राज्यों में अच्छी बारिश होती है। लेकिन इसकी निष्क्रिय अवस्था के दौरान बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ जाती हैं और कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगते हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यही वजह है कि पश्चिम और दक्षिण भारत के कई राज्यों में अगले दो सप्ताह तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है।


किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना?

IMD के अनुमान के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल ऐसे राज्य हैं जहां सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है।

इन राज्यों की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और यहां खरीफ फसलों की खेती मुख्य रूप से मानसून पर आधारित होती है। यदि बारिश लंबे समय तक नहीं होती है तो खेतों में नमी की कमी हो सकती है, जिससे नई बोई गई फसलों की वृद्धि प्रभावित होगी।


जून की कमजोर बारिश का असर अब भी जारी

इस वर्ष जून महीने में देशभर में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। कमजोर मानसून के कारण कई किसानों को समय पर बुआई शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

हालांकि जुलाई के शुरुआती आठ दिनों में पश्चिमी तटीय इलाकों में अच्छी बारिश हुई, जिससे देश में वर्षा की कुल कमी कुछ हद तक कम हुई। इसके बावजूद मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून के कमजोर पड़ने से बारिश की कमी फिर बढ़ सकती है।

यही कारण है कि मौसम विभाग किसानों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है।


खरीफ फसलों की बुआई पिछड़ गई

कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुआई पर साफ दिखाई दे रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 5 जुलाई तक देश में लगभग 3.5 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 21 प्रतिशत कम है।

धान, कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की बुआई कई राज्यों में अभी भी पिछड़ी हुई है। किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि खेतों में नमी बनी रहे और बीज अच्छी तरह अंकुरित हो सकें।


किसानों के लिए सरकार की सलाह

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मौसम को देखते हुए फसल चयन में सावधानी बरतने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में बारिश में देरी हो रही है, वहां किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें लगाने पर विचार करना चाहिए।

विशेष रूप से मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलें ऐसे मौसम में बेहतर विकल्प मानी जा रही हैं। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और कम बारिश की स्थिति में भी इनका उत्पादन संभव है।


बारिश के बाद सूखा दौर बना सकता है मुश्किल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में हुई बारिश के बाद कई किसान बुआई शुरू करेंगे। लेकिन यदि इसके तुरंत बाद लंबा सूखा दौर आ गया तो नई फसलों की जड़ों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाएगी।

ऐसी स्थिति में पौधों की शुरुआती वृद्धि प्रभावित हो सकती है और बाद में उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। खासतौर पर वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में यह स्थिति किसानों के लिए आर्थिक चुनौती बन सकती है।


भारतीय कृषि के लिए मानसून कितना महत्वपूर्ण?

भारत की लगभग आधी कृषि भूमि आज भी सिंचाई की स्थायी व्यवस्था से नहीं जुड़ी है। ऐसे में किसानों की बड़ी आबादी पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहती है।

देश में सालभर होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान ही होता है। यही बारिश जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर को भी भरने का काम करती है।

यदि मानसून कमजोर पड़ता है तो इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता बल्कि खाद्यान्न उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महंगाई और देश की आर्थिक वृद्धि पर भी दिखाई देता है।


बाजार और खाद्य कीमतों पर भी पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो कृषि उत्पादन घट सकता है। इससे बाजार में अनाज, दालों और खाद्य तेलों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

कम उत्पादन होने पर कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है। इसलिए सरकार और मौसम विभाग लगातार मानसून की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।


किसानों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखें और कृषि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

जहां संभव हो वहां नमी संरक्षण की तकनीकों का इस्तेमाल करें, खेतों में जल संरक्षण के उपाय अपनाएं और कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता दें। इससे संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


आने वाले दो सप्ताह रहेंगे बेहद अहम

अगले 10 से 15 दिन देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि इस दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो खरीफ फसलों की बुआई और उनकी शुरुआती बढ़वार दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की स्थिति लगातार बदलती रहती है। इसलिए किसानों और राज्य सरकारों को मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

फिलहाल पश्चिम और दक्षिण भारत के कई राज्यों के लिए कम बारिश की चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में किसानों के लिए सावधानी और सही कृषि रणनीति अपनाना बेहद जरूरी होगा ताकि फसलों को होने वाले संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

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