26 जून, 2026 | देहरादून/ऋषिकेश | Uttarakhand Border Tension: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब पंजाब से आ रहे निहंग सिखों के समूहों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ दिया और सीधे उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गए। इस घटना के बाद राजधानी देहरादून से लेकर सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं।
हाल ही में चमोली जिले के कर्णप्रयाग (Karnaprayag) में स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया था . हालांकि, घंटों चली लंबी बातचीत और प्रशासनिक सूझबूझ के बाद गुरुवार देर रात इस गंभीर गतिरोध को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया और निहंगों के जत्थे को वापस भेज दिया गया.
बैरिकेड्स तोड़े और पुलिस को चकमा देकर देहरादून में एंट्री
पुलिस प्रशासन के मुताबिक, पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के तहत निहंग सिखों का यह जत्था श्री हेमकुंड साहिब (Sri Hemkund Sahib) की यात्रा के लिए रवाना हुआ था. लेकिन कर्णप्रयाग की हालिया घटना के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से पुलिस ने हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर पाउंटा साहिब (Paonta Sahib) के पास भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की.
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बॉर्डर पर टकराव: रोके जाने से नाराज निहंगों के समूह ने कथित तौर पर पारंपरिक कृपाणें लहराते हुए पुलिस के बैरिकेड्स हटा दिए और सीधे देहरादून जिले की सीमा में दाखिल हो गए.
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सुरक्षा अलर्ट: इस अचानक हुए घटनाक्रम से पूरी राजधानी में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया। प्रेमनगर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों को भारी पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया.
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रास्ता बदला: पुलिस टीमें लगभग दो घंटे तक प्रेमनगर में निहंगों का इंतजार करती रहीं, लेकिन निहंगों ने मुख्य मार्ग की बजाय वैकल्पिक रास्ता चुन लिया. वे पाउंटा साहिब-देहरादून हाईवे और गोरखपुर-शिमला बाईपास से होते हुए शहर के भीतर दाखिल होने में कामयाब रहे.
रेसकोर्स गुरुद्वारे में आधी रात तक चली हाई-लेवल बैठक
शहर में प्रवेश करने के बाद निहंगों का यह समूह देहरादून के रेसकोर्स (Race Course) स्थित एक गुरुद्वारे में इकट्ठा हो गया. इसकी जानकारी मिलते ही देहरादून के जिलाधिकारी (DM) आशीष चौहान और एसएसपी (SSP) अजय सिंह (या तात्कालिक एसएसपी परमेंद्र डोभाल) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे.
वरिष्ठ अधिकारियों ने निहंगों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की वार्ता की. पुलिस का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह के सीधे टकराव को टालना और कानून व्यवस्था बनाए रखना था.
क्यों हो रहा था यह विरोध? कर्णप्रयाग विवाद से क्या है कनेक्शन?
इस पूरे तनाव की जड़ें चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक पुरानी घटना से जुड़ी हैं. कुछ दिनों पहले कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय निवासियों के बीच एक तीखी झड़प हुई थी, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए थे. इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार निहंग सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था.
प्रदर्शनकारियों की मांग:
प्रदर्शन कर रहे निहंग समूहों का साफ कहना था कि जब तक कर्णप्रयाग मामले में गिरफ्तार किए गए उनके साथियों को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे पंजाब वापस नहीं लौटेंगे.
प्रशासन की सूझबूझ रंग लाई; देर रात वापस लौटे निहंग
गुरुद्वारे में कई घंटों तक चली मैराथन बातचीत के बाद आखिरकार प्रशासन निहंग समूहों को समझाने में सफल रहा. निहंगों का जत्था वापस हिमाचल प्रदेश लौटने के लिए राजी हो गया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वापसी की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हुई:
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रात 1:15 बजे: 12 से 15 निहंगों का पहला समूह अपनी गाड़ियों (कार, यूटिलिटी व्हीकल और मोटरसाइकिल) के साथ पाउंटा साहिब गुरुद्वारे की तरफ रवाना हुआ.
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रात 2:40 बजे: इसके बाद निहंगों का दूसरा समूह भी दो चार पहिया वाहनों और एक बाइक के साथ रेसकोर्स गुरुद्वारे से पाउंटा साहिब के लिए निकल गया.
देहरादून के एसएसपी परमेंद्र डोभाल ने आधिकारिक बयान में कहा:
“गुरुवार देर रात कुछ निहंग श्रद्धालु विभिन्न रास्तों से होते हुए देहरादून पहुंचे थे और रेसकोर्स गुरुद्वारे में ठहरे थे। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने उनसे विस्तार से बातचीत की। सकारात्मक चर्चा के बाद, उन सभी को शांतिपूर्ण ढंग से हिमाचल प्रदेश के पाउंटा साहिब की ओर वापस भेज दिया गया है।”
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं से भी किसी तरह की अप्रिय घटना या हिंसा की कोई खबर नहीं है.
उत्तराखंड-निहंग विवाद 2026: मुख्य बिंदु
उत्तराखंड प्रशासन और पुलिस ने जिस तरह इस संवेदनशील मामले को बिना किसी बल प्रयोग या टकराव के केवल बातचीत के जरिए सुलझाया, वह काबिले तारीफ है। चारधाम यात्रा के इस व्यस्त सीजन में धार्मिक भावनाओं और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। फिलहाल पूरे रूट पर शांति बनी हुई है।
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