
2029 के लोकसभा चुनाव को अभी काफी समय बाकी है, लेकिन विपक्षी INDIA ब्लॉक के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया। राहुल गांधी को 2029 के लिए विपक्ष का PM चेहरा बनाए जाने के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा कि इस तरह के सवाल अभी नहीं पूछे जाने चाहिए और गठबंधन के नेता सही समय आने पर इस पर फैसला करेंगे।
ममता बनर्जी का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब INDIA ब्लॉक की हालिया बैठक में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया। 30 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठक में विपक्षी दलों ने आगे की राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा की।
राहुल गांधी के PM चेहरे पर ममता का सीधा जवाब नहीं
ममता बनर्जी से जब पूछा गया कि क्या वह 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर समर्थन देंगी, तो उन्होंने इस सवाल को टाल दिया। उनका कहना था कि ऐसे सवाल अभी नहीं पूछे जाने चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों के रिश्ते को एक परिवार की तरह बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पद के चेहरे का फैसला समय आने पर किया जाएगा।
ममता बनर्जी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि INDIA ब्लॉक में कांग्रेस के साथ कई क्षेत्रीय दल शामिल हैं और अलग-अलग राज्यों में इन दलों के बीच राजनीतिक समीकरण एक जैसे नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में TMC और वाम दल लंबे समय से एक-दूसरे के राजनीतिक विरोधी रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों पर वे विपक्षी गठबंधन के मंच पर साथ दिखाई देते हैं।
इस वजह से 2029 के लिए विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, इसका सवाल अभी खुला हुआ है। फिलहाल ममता बनर्जी ने किसी एक नेता के नाम पर अपनी सहमति सार्वजनिक रूप से नहीं जताई है।
INDIA Bloc की बैठक में ममता की सक्रिय भूमिका
हालिया INDIA ब्लॉक बैठक से पहले ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने में भूमिका निभाई थी। बैठक का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग, विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद थे।
रिपोर्टों के मुताबिक ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और CPI(M) महासचिव एमए बेबी समेत अन्य विपक्षी नेताओं से बातचीत की थी। इसके बाद 30 सितंबर को नई दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक आयोजित हुई। बैठक में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर मिलकर आगे बढ़ने की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता को केवल मौजूदा गठबंधन तक सीमित रखने के बजाय अन्य राजनीतिक दलों और समूहों तक पहुंच बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। India Today की बैठक संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने विभिन्न विपक्षी और गैर-गठबंधन दलों से संपर्क बढ़ाने की बात कही।
बंगाल की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति पर नजर?
ममता बनर्जी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी दलों के बीच समन्वय की चर्चाओं का हिस्सा रही हैं। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भी विपक्षी दलों के बीच रणनीतिक बातचीत में उनकी भूमिका रही थी।
हालांकि, यह कहना कि वह 2029 के लिए स्वयं को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश कर रही हैं, मौजूदा सार्वजनिक बयानों से सीधे तौर पर साबित नहीं होता। अभी तक उन्होंने 2029 के प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
उनके ताजा बयान से इतना स्पष्ट है कि वह प्रधानमंत्री पद के चेहरे का फैसला अभी करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने गठबंधन के सामूहिक निर्णय की बात कही है। इसलिए आने वाले समय में INDIA ब्लॉक के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा जारी रह सकती है।
पहले भी उठ चुका है विपक्ष के PM चेहरे का मुद्दा
विपक्षी गठबंधन में प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर चर्चा नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से विपक्षी दलों के बीच यह सवाल उठता रहा है कि लोकसभा चुनाव में BJP के सामने संयुक्त विपक्ष किस नेता को प्रमुख चेहरा बनाएगा।
2019 और 2024 के चुनावों से पहले भी अलग-अलग विपक्षी नेताओं के नामों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हुई थीं। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच सीटों, नेतृत्व और रणनीति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं।
ममता बनर्जी भी इन चर्चाओं के केंद्र में रही हैं। लेकिन उनके ताजा बयान में उन्होंने किसी एक नेता के नाम का समर्थन करने के बजाय फैसला सही समय पर सामूहिक रूप से लेने की बात कही है।
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्षी एकजुटता
हालिया INDIA ब्लॉक बैठक का तत्काल मुद्दा 2029 का प्रधानमंत्री पद का चेहरा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद थे।
विपक्षी दलों ने SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर अपनी आपत्तियां जताई हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर संयुक्त राजनीतिक अभियान चलाने की दिशा में चर्चा की। 30 सितंबर की बैठक के बाद गठबंधन की ओर से आगे की संयुक्त गतिविधियों की रूपरेखा सामने आई।
ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को एक साथ आने की जरूरत बताई। खास बात यह रही कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC और वाम दलों के बीच लंबे समय से मुकाबला होने के बावजूद इस मुद्दे पर दोनों पक्ष एक ही मंच पर नजर आए।
क्या Kolkata में TMC और CPM साथ आएंगे?
INDIA ब्लॉक की राजनीति में पश्चिम बंगाल का समीकरण खास महत्व रखता है। राज्य में TMC और CPI(M) के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला रहा है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर INDIA ब्लॉक की बैठकों में दोनों दलों के नेता एक साथ दिखाई दे रहे हैं।
ममता बनर्जी से जब पूछा गया कि क्या INDIA ब्लॉक की ओर से कोलकाता में संयुक्त रैली आयोजित की जा सकती है, जहां TMC और CPM के नेता एक ही मंच पर नजर आएंगे, तो उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया।
यह स्थिति बंगाल की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि राज्य में दोनों दलों की अलग राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक संरचना है। हालांकि, संयुक्त कार्यक्रम को लेकर अंतिम निर्णय और उसका स्वरूप अलग-अलग दलों की सहमति पर निर्भर करेगा।
ममता ने DMK, AAP और SP के लिए प्रचार की बात कही
INDIA ब्लॉक की बैठक के बाद ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों के बीच व्यापक समन्वय की बात की। उन्होंने संकेत दिया कि यदि उनसे कहा जाता है तो वह तमिलनाडु की DMK, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करने के लिए तैयार हैं।
इससे उनके बयान में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच सहयोग का पहलू सामने आया। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में इन दलों के चुनावी समीकरण अलग हैं और किसी भी संयुक्त अभियान का फैसला संबंधित दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।
INDIA Bloc में आगे क्या होगा?
30 सितंबर की बैठक के बाद INDIA ब्लॉक ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर सामूहिक राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने का संकेत दिया है। गठबंधन के नेताओं ने संयुक्त रूप से अभियान और विरोध कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की है।
वहीं, 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का चेहरा कौन होगा, इस सवाल पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। ममता बनर्जी का ताजा बयान भी यही संकेत देता है कि इस मुद्दे पर तत्काल घोषणा के बजाय भविष्य में सामूहिक निर्णय की राह अपनाई जा सकती है।
राहुल गांधी की भूमिका विपक्षी राजनीति में महत्वपूर्ण बनी हुई है, लेकिन विपक्षी गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर अलग-अलग दलों की स्थिति और प्राथमिकताएं अभी सार्वजनिक रूप से एक जैसी नहीं हैं।
इसलिए फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि INDIA ब्लॉक अपने साझा मुद्दों पर कितना समन्वय कायम रखता है और अलग-अलग राज्यों में मौजूद राजनीतिक मतभेदों के बावजूद किस तरह की संयुक्त रणनीति बनाता है। 2029 के चुनाव से पहले नेतृत्व, सीटों के तालमेल और साझा अभियान को लेकर आने वाले वर्षों में तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।



