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म्यांमार के पास बना डिप्रेशन कमजोर, अब लो प्रेशर एरिया में बदला; जानें आगे कैसा रहेगा मौसम

बंगाल की खाड़ी और म्यांमार के तटीय इलाके के पास बना मौसम का सिस्टम अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, म्यांमार के तटीय क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के आसपास सक्रिय डिप्रेशन ने उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ना जारी रखा है। अब इसके कमजोर होकर Well-Marked Low Pressure Area यानी अच्छी तरह बने कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की स्थिति बन गई है। ताजा मौसम अपडेट में भी इस सिस्टम के आगे बढ़ते हुए कमजोर होने की जानकारी सामने आई है।

इस मौसम प्रणाली को लेकर पिछले कुछ दिनों से बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर भारत के मौसम पर नजर रखी जा रही थी। इससे पहले यह सिस्टम डिप्रेशन से मजबूत होकर डीप डिप्रेशन की स्थिति तक पहुंचा था, लेकिन म्यांमार के ऊपर आगे बढ़ने के दौरान इसकी ताकत में कमी आने लगी। IMD के 29 सितंबर के बुलेटिन में भी इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और बाद में Well-Marked Low Pressure Area में कमजोर होने का अनुमान जताया गया था।

डिप्रेशन की ताकत अब क्यों हो रही कम?

मौसम प्रणालियों की ताकत उनके आसपास के वातावरण पर काफी निर्भर करती है। समुद्र के ऊपर पर्याप्त नमी और अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर कम दबाव का क्षेत्र मजबूत होकर डिप्रेशन या डीप डिप्रेशन बन सकता है। वहीं, जब कोई सिस्टम समुद्र से आगे बढ़कर जमीन के ऊपर पहुंचता है तो उसे मिलने वाली नमी और ऊर्जा में बदलाव आता है। ऐसे में उसकी तीव्रता धीरे-धीरे कम हो सकती है।

म्यांमार के तटीय क्षेत्र से आगे बढ़ने के बाद इस सिस्टम की स्थिति में भी इसी तरह का बदलाव देखने को मिला है। IMD के अनुसार, 29 सितंबर को यह सिस्टम तेजी से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था और बाद में इसकी गति कम हुई। 29 सितंबर की रात तक यह लगभग 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इसी दिशा में आगे बढ़ रहा था।

पहले डीप डिप्रेशन बना, फिर हुआ कमजोर

इस मौसम प्रणाली ने बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास से अपनी यात्रा शुरू की थी। 28 सितंबर को यह सिस्टम डिप्रेशन के रूप में सक्रिय था और बाद में डीप डिप्रेशन में मजबूत हुआ। इसके बाद यह म्यांमार के तटीय इलाकों की ओर बढ़ा।

IMD के बुलेटिन के अनुसार, 29 सितंबर की सुबह तक डीप डिप्रेशन कमजोर होकर दोबारा डिप्रेशन में बदल गया था। इसके बाद यह उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता रहा। IMD ने अनुमान जताया था कि यह आगे चलकर म्यांमार के तटीय हिस्सों और दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश के आसपास Well-Marked Low Pressure Area में बदल सकता है।

यानी इस सिस्टम की पूरी यात्रा में इसकी तीव्रता लगातार बदलती रही। पहले कम दबाव का क्षेत्र मजबूत हुआ, फिर डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन बना, लेकिन जमीन की ओर बढ़ने के बाद इसकी ताकत कम होने लगी।

30 सितंबर को क्या है मौसम सिस्टम की स्थिति?

30 सितंबर की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह सिस्टम अब कमजोर होकर Well-Marked Low Pressure Area की स्थिति में पहुंच चुका है। म्यांमार के मौसम विभाग ने भी 30 सितंबर की सुबह इसे Well-Marked Low Pressure Area बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह म्यांमार में NyaungU के पश्चिम से गुजरने के बाद कमजोर हुआ और अब भी उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसके आगे म्यांमार के चिन क्षेत्र, दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश और मिजोरम की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है। आगे बढ़ने के साथ इसकी ताकत और कम होने का अनुमान है। इसलिए फिलहाल इस सिस्टम के फिर से मजबूत होकर चक्रवाती तूफान बनने की स्थिति नहीं दिख रही है।

बंगाल की खाड़ी में इसका कितना असर?

डिप्रेशन के कमजोर होने के बावजूद बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में इसके मौसम संबंधी प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ऐसे सिस्टम वातावरण में नमी और हवा के पैटर्न को प्रभावित कर सकते हैं, जिसके कारण कुछ इलाकों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

IMD के 29 सितंबर के समुद्री मौसम बुलेटिन में उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और म्यांमार के आसपास सिस्टम के आगे बढ़ने का उल्लेख किया गया था। पश्चिम बंगाल के तट पर एक-दो स्थानों पर बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना भी बताई गई थी।

हालांकि, इस सिस्टम के कमजोर होने के कारण इसके प्रभाव को पहले की तुलना में सीमित माना जा रहा है। मौसम की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता अलग रह सकती है।

पूर्वोत्तर राज्यों पर भी नजर

यह मौसम सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए म्यांमार के अंदरूनी हिस्सों से होते हुए दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश और भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों की ओर बढ़ सकता है। म्यांमार के मौसम विभाग ने भी इसके आगे बढ़ने की दिशा में चिन क्षेत्र, दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश और मिजोरम का उल्लेख किया है।

ऐसे में पूर्वोत्तर राज्यों के मौसम पर नजर रखना जरूरी है। खासकर मिजोरम और आसपास के क्षेत्रों में सिस्टम की स्थिति के आधार पर बारिश की गतिविधियों में बदलाव हो सकता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में सिस्टम के कमजोर पड़ने की प्रक्रिया जारी है।

पश्चिम बंगाल और आसपास के इलाकों में क्या असर?

पश्चिम बंगाल के लिए उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में इस सिस्टम से बड़े पैमाने पर खराब मौसम की संभावना नहीं बताई गई है। 30 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार दक्षिण बंगाल में भारी बारिश की संभावना कम है, जबकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।

इसका मतलब यह है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सिस्टम का नाम सुनकर पूरे पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की आशंका मानना सही नहीं होगा। किसी भी क्षेत्र में बारिश की स्थिति स्थानीय मौसम प्रणालियों और नमी की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

समुद्र में जाने वाले लोगों के लिए क्या स्थिति?

डिप्रेशन के कमजोर होने के बावजूद समुद्री इलाकों में मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है। IMD के समुद्री बुलेटिन में बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में स्वेल यानी लंबी अवधि वाली समुद्री लहरों का उल्लेख किया गया था। पश्चिम बंगाल तट के लिए समुद्री स्थिति सामान्य से थोड़ी अलग हो सकती है और बारिश के दौरान दृश्यता भी प्रभावित हो सकती है।

मछुआरों और समुद्र में जाने वाले अन्य लोगों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह के अनुसार ही गतिविधियां करने की जरूरत है। समुद्र में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए केवल सिस्टम के कमजोर होने के आधार पर सावधानी खत्म करना उचित नहीं होगा।

क्या यह सिस्टम फिर से मजबूत हो सकता है?

मौजूदा उपलब्ध जानकारी में सिस्टम के लगातार कमजोर होने का संकेत है। IMD ने इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए Well-Marked Low Pressure Area में कमजोर होने का अनुमान दिया था, और 30 सितंबर की रिपोर्टों में इसके कमजोर होने की पुष्टि भी हुई है।

इसलिए वर्तमान स्थिति में मुख्य संभावना यही है कि यह सिस्टम आगे बढ़ते हुए और कमजोर होगा। हालांकि, मौसम प्रणालियों की स्थिति लगातार बदल सकती है, इसलिए किसी भी नए बदलाव के लिए IMD के ताजा बुलेटिन को देखना महत्वपूर्ण रहेगा।

मानसून की वापसी के बीच बदला मौसम का मिजाज

यह मौसम सिस्टम ऐसे समय सक्रिय हुआ है जब भारत के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी चल रही है। मौसम विशेषज्ञों के लिए सितंबर के अंत में बनने वाली ऐसी प्रणालियां महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण तेजी से बदलता है।

एक ओर कुछ राज्यों में मानसून की वापसी के कारण मौसम शुष्क होने लगता है, वहीं बंगाल की खाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में सक्रिय सिस्टम बारिश की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। 30 सितंबर को देश के कुछ पूर्वोत्तर और दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश की संभावना भी दर्ज की गई थी।

आगे कैसा रहेगा मौसम?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर म्यांमार के पास बना यह सिस्टम कमजोर पड़ चुका है और आगे भी इसके कमजोर होने की संभावना है। इसका अगला रास्ता उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में रहने की उम्मीद है। इसके म्यांमार, दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत के आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करते हुए आगे बढ़ने की संभावना है।

सिस्टम के कमजोर होने का मतलब यह नहीं है कि इससे जुड़े सभी मौसम प्रभाव तुरंत समाप्त हो जाएंगे। कुछ इलाकों में बारिश, गरज-चमक और बादलों की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इसलिए स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी है।

निष्कर्ष

म्यांमार के तटीय क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के पास बना डिप्रेशन अब कमजोर होकर Well-Marked Low Pressure Area में बदल चुका है। IMD के अनुसार, यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसकी ताकत में लगातार कमी आने की संभावना है। आगे यह म्यांमार के चिन क्षेत्र, दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश और मिजोरम के आसपास बढ़ सकता है। फिलहाल इसके दोबारा मजबूत होने के संकेत नहीं हैं, लेकिन इसके प्रभाव वाले क्षेत्रों में बारिश और मौसम में बदलाव जारी रह सकता है।

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