
UPI MDR Charges: भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक बार फिर चर्चा में है। संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव पेश होने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट फीस यानी Merchant Discount Rate (MDR) लागू हो सकती है।
हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन संसद में पेश किए गए संशोधन ने इस संभावना को कानूनी आधार देने का रास्ता जरूर खोल दिया है। यदि भविष्य में इस प्रस्ताव को लागू किया जाता है, तो इसका असर खासतौर पर बड़े कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर देखने को मिल सकता है।
दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क में शामिल है UPI
पिछले कुछ वर्षों में UPI ने भारत में भुगतान की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारियों तक, लगभग हर वर्ग के लोग इसका उपयोग कर रहे हैं।
जुलाई महीने के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार UPI के जरिए 23.6 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। यह आंकड़ा बताता है कि भारत का डिजिटल भुगतान बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा है।
PhonePe और Google Pay जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म इस नेटवर्क के सबसे बड़े हिस्सेदार हैं और करोड़ों लोग रोजमर्रा के भुगतान के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं।
आखिर क्या है Merchant Discount Rate (MDR)?
Merchant Discount Rate यानी MDR वह शुल्क होता है जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले व्यापारी से लिया जाता है। यह राशि बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और भुगतान नेटवर्क के बीच साझा की जाती है।
वर्तमान में भारत में क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर व्यापारियों को MDR देना पड़ता है। डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी सीमित शुल्क लागू होता है। लेकिन UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर अभी तक व्यापारियों से कोई MDR नहीं लिया जाता।
यही वजह है कि UPI देश का सबसे लोकप्रिय और कम लागत वाला भुगतान माध्यम बन गया है।
सरकार क्यों कर रही है नए नियमों पर विचार?
डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से यह मांग कर रही है कि UPI पर किसी न किसी रूप में MDR लागू किया जाए।
पेमेंट कंपनियों का तर्क है कि जब हर ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं मिलता, तब नेटवर्क का विस्तार, नई तकनीक में निवेश और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
उनका कहना है कि लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के बावजूद राजस्व न होने से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर MDR लागू करने का अधिकार मिल सके।
क्या आम लोगों को UPI इस्तेमाल करने के लिए पैसे देने होंगे?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है कि आम उपभोक्ताओं से UPI पेमेंट पर शुल्क लिया जाएगा।
सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें फोकस मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों पर है। यानी यदि भविष्य में MDR लागू भी होता है तो संभव है कि उसका भार सीधे ग्राहकों पर न पड़े।
हालांकि अंतिम नियम बनने के बाद ही इसकी स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
किन व्यापारियों पर लागू हो सकता है नया नियम?
सूत्रों के अनुसार सरकार दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही है।
पहला विकल्प यह है कि केवल एक निश्चित राशि से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जाए।
दूसरा विकल्प व्यापारियों के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय करने का है। यानी छोटे कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जबकि बड़े व्यापारिक संस्थानों पर MDR लागू किया जा सकता है।
इस मॉडल का उद्देश्य छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना और बड़े व्यवसायों से सीमित शुल्क लेना बताया जा रहा है।
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर लग सकता है MDR
सरकारी स्तर पर जिन प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है, उनमें एक सुझाव यह भी है कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लगाया जाए।
बताया जा रहा है कि जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, उन पर 0.3% से 0.5% तक का MDR लागू किया जा सकता है।
हालांकि यह केवल विचाराधीन प्रस्ताव है और अभी इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बड़े ट्रांजैक्शन का कितना है हिस्सा?
वित्तीय विश्लेषकों की रिपोर्ट के अनुसार UPI पर 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से काफी कम हैं।
कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत बताई जाती है, लेकिन कुल भुगतान मूल्य में इनका योगदान करीब 67 प्रतिशत है।
यही वजह है कि सरकार यदि बड़े ट्रांजैक्शन पर सीमित MDR लागू करती है तो उसका असर केवल चुनिंदा व्यापारियों तक सीमित रह सकता है, जबकि अधिकांश छोटे भुगतान पहले की तरह मुफ्त बने रह सकते हैं।
डिजिटल पेमेंट कंपनियों को क्या होगा फायदा?
यदि भविष्य में MDR लागू होता है तो पेमेंट कंपनियों, बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है।
इससे साइबर सुरक्षा, बेहतर सर्वर क्षमता, नई तकनीकों और ग्राहक सेवाओं में निवेश बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत वित्तीय मॉडल से डिजिटल भुगतान नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।
छोटे व्यापारियों और ग्राहकों के लिए क्या संकेत हैं?
सरकार की मौजूदा सोच यह बताती है कि छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों को किसी अतिरिक्त बोझ से बचाने की कोशिश की जाएगी।
यदि MDR केवल बड़े व्यापारियों और उच्च मूल्य वाले ट्रांजैक्शन तक सीमित रहता है, तो रोजमर्रा की छोटी खरीदारी और सामान्य UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त रह सकते हैं।
हालांकि अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या अभी UPI पर कोई चार्ज देना होगा?
इस समय देश में UPI के जरिए किए जाने वाले सामान्य भुगतान पर कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है।
संसद में पेश किया गया संशोधन केवल भविष्य में MDR लागू करने की कानूनी संभावना तैयार करता है। शुल्क कब, कितना और किन परिस्थितियों में लागू होगा, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
इसलिए आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को फिलहाल किसी बदलाव की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
निष्कर्ष
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को बेहद आसान और सुलभ बनाया है। अब सरकार द्वारा कानून में प्रस्तावित संशोधन के बाद Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल यह केवल एक संभावित व्यवस्था है और सरकार ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। यदि भविष्य में MDR लागू होता भी है, तो संभावना है कि इसका दायरा बड़े व्यापारियों और उच्च मूल्य वाले ट्रांजैक्शन तक सीमित रखा जाए, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पहले की तरह सुविधाजनक बना रहे।



