मथुरा | 23 मई, 2026 | Mathura Unique Protest: उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी मथुरा में यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण और शहर की बदहाली को लेकर एक बेहद ही अजीबोगरीब और अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। सालों से यमुना की सफाई के झूठे वादों और प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अधिकारियों की आंखें खोलने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया।
शुक्रवार, 22 मई, 2026 को मथुरा के नगर निगम कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक शख्स ‘कॉकरोच’ (Cockroach) की पोशाक पहनकर दफ्तर के भीतर दाखिल हो गया। यह शख्स सिर्फ कॉकरोच बनकर वहां आया ही नहीं, बल्कि उसने अधिकारियों के कमरों के बाहर फिल्मी गानों पर नाचते और गाते हुए जमकर तंज कसा। दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों और आम जनता के लिए यह नजारा बेहद कौतूहल भरा था, और देखते ही देखते लोगों ने अपने मोबाइल से इसके वीडियो बनाने शुरू कर दिए, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
Mathura: नगर निगम में Cockroach बन एक्टिविस्ट का अनोखा प्रदर्शन
Mathura में सोशल एक्टिविस्ट Deepak Sharma कॉकरोच की वेशभूषा पहनकर नगर निगम पहुंचे और यमुना में गिर रहे गंदे नालों के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। pic.twitter.com/ynvTMEXXIT— Public Vani News (@publicvaninews) May 23, 2026
कौन है यह ‘कॉकरोच’ और क्यों करना पड़ा ऐसा प्रदर्शन?
कॉकरोच की ड्रेस पहनकर अनोखा विरोध दर्ज कराने वाले इस शख्स का नाम दीपक शर्मा (Deepak Sharma) है, जो मथुरा के एक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
दीपक शर्मा ने बताया कि वे मथुरा और वृंदावन में यमुना जी की दुर्दशा और चारों तरफ फैली गंदगी से बेहद आहत हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“हम ब्रजवासी हैं और हमारे लिए यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था का केंद्र हैं। हम यमुना के जल से ‘आचमन’ (धार्मिक अनुष्ठान के तहत पानी पीना) करते हैं। लेकिन आज स्थिति यह है कि मथुरा और वृंदावन के गंदे नाले और सीवेज का पानी खुलेआम सीधे यमुना जी में बहाया जा रहा है। इन ‘नाकारा’ अधिकारियों को जगाने के लिए मुझे यह रूप धारण करना पड़ा, क्योंकि इंसान की आवाज तो ये सुन नहीं रहे हैं, शायद किसी कीड़े-मकौड़े को देखकर ही इनकी आंखें खुल जाएं।”
दीपक शर्मा यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारियों की गाड़ियों के आगे खड़े होकर उन्हें रोकने का प्रयास भी किया। हालांकि, इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम पर नगर निगम के किसी भी बड़े अधिकारी ने अब तक कोई आधिकारिक बयान या टिप्पणी नहीं की है।
पर्यावरण कानूनों का हवाला: अधिकारियों पर FIR दर्ज कराने की मांग
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने देश के सख्त पर्यावरण कानूनों का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया।
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जल प्रदूषण अधिनियम (Water Act): उन्होंने ‘जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून विशेष रूप से देश की नदियों को बचाने के लिए बनाया गया है। इसके तहत किसी भी नदी में गंदा पानी या सीवेज छोड़ना एक दंडनीय अपराध है।
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सुप्रीम कोर्ट और NGT के आदेश: उन्होंने याद दिलाया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी स्पष्ट किया है कि नदियों में सीधा सीवेज डालना एक आपराधिक कृत्य (Criminal Act) है।
शर्मा ने ब्रजवासियों और आम जनता से अपील की कि जो अधिकारी खुद नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और अदालती आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं, उनके खिलाफ एकजुट होकर पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जानी चाहिए।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और NEET विवाद का कनेक्शन
मथुरा का यह प्रदर्शन सोशल मीडिया पर सक्रिय एक नए व्यंग्यात्मक (Satirical) ट्रेंड से भी जुड़ा हुआ है। दरअसल, पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक पैरोडी अकाउंट और प्लेटफॉर्म काफी चर्चा में आया है। इस डिजिटल मुहिम के तहत ‘नीट-यूजी 2026’ (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की जा रही है।
कहाँ से शुरू हुआ यह ‘कॉकरोच’ शब्द का विवाद?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट में वकीलों को ‘सीनियर’ का दर्जा देने से जुड़ी एक सुनवाई चल रही थी। आरोप है कि सुनवाई के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया, जिसमें ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का जिक्र था। हालांकि, बाद में मुख्य न्यायाधीश ने खुद स्थिति साफ करते हुए कहा था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उनकी टिप्पणी वास्तव में उन लोगों के खिलाफ थी जो ‘फर्जी और जाली डिग्रियों’ के सहारे कानूनी पेशे में घुसने की कोशिश करते हैं। इसी कानूनी और राजनीतिक विवाद के बीच मथुरा में इस शब्द का इस्तेमाल प्रदूषण के खिलाफ एक बड़े प्रतीक के रूप में कर लिया गया।
मथुरा यमुना प्रदूषण आंदोलन: मुख्य बिंदु
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