
Nagpur MLC Election Result: महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस ने भाजपा को हराकर विधान परिषद की सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी अभिजीत वंजारी ने भाजपा उम्मीदवार और पूर्व विधायक सुधाकर कोहाले को 3,271 वोटों से हराया। यह नतीजा इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय होने के साथ-साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह शहर भी है।
नागपुर में जीत के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मोदी के उस तंज का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाया था। वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस ने फडणवीस के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी हमला बोला, जिसमें पार्टी के प्रदर्शन को ‘बिग फैट जीरो’ बताया गया था।
नागपुर में अभिजीत वंजारी ने कितने वोटों से दर्ज की जीत?
महाराष्ट्र विधान परिषद के नागपुर डिवीजन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने 67,231 वोट हासिल किए। भाजपा के सुधाकर कोहाले को 63,960 वोट मिले। इस तरह वंजारी ने 3,271 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा।
इस चुनाव की मतगणना काफी देर तक चली। शुरुआती दौर में भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहाले ने बढ़त बना ली थी। दूसरे दौर की पहली पसंद के वोटों की गिनती के बाद कोहाले, वंजारी से 4,294 वोट आगे थे। लेकिन चुनाव की प्रक्रिया में दूसरी पसंद के मतों की गिनती भी अहम साबित हुई और अंतिम परिणाम कांग्रेस के पक्ष में गया।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतों की गिनती सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग प्रक्रिया के तहत हो सकती है। जब किसी उम्मीदवार को निर्धारित कोटा नहीं मिलता, तो नियमों के अनुसार दूसरी पसंद के मतों की गिनती और उम्मीदवारों के बाहर होने के चरण परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। नागपुर में भी अंतिम नतीजा सामने आने तक मुकाबला दिलचस्प बना रहा।
RSS के गढ़ नागपुर में BJP को झटका
नागपुर का राजनीतिक महत्व इस चुनाव को और चर्चा में ले आया है। शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय स्थित है। इसके अलावा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का भी नागपुर से गहरा राजनीतिक जुड़ाव है। दोनों नेताओं ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहाले के समर्थन में प्रचार किया था।
ऐसे में भाजपा के लिए यह परिणाम स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस ने इस जीत को अपने लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया है, जबकि भाजपा को अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में सीट गंवानी पड़ी।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का भाजपा के साथ पुराना राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है। नितिन गडकरी ने जुलाई 1990 से मई 2014 तक करीब 24 वर्षों तक इस निर्वाचन क्षेत्र का महाराष्ट्र विधान परिषद में प्रतिनिधित्व किया था। बाद में अभिजीत वंजारी ने पिछले चुनाव में भाजपा के संदीप जोशी को हराकर यह सीट कांग्रेस के खाते में पहुंचाई थी। अब वंजारी ने दोबारा जीत हासिल करके सीट पर कांग्रेस का कब्जा बनाए रखा है।
PM मोदी के तंज पर जयराम रमेश का जवाब
विधान परिषद चुनावों के शुरुआती नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर कटाक्ष किया था। इसके बाद कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी।
जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को दूसरों को सलाह देने के बजाय अपने राजनीतिक प्रदर्शन पर भी आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस की जीती हुई सीटों की गिनती करने से पहले प्रधानमंत्री को यह भी देखना चाहिए कि उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा दोनों सीटें क्यों हार गई और RSS के मुख्यालय वाले नागपुर में कांग्रेस जीतने में कैसे सफल रही।
रमेश ने प्रधानमंत्री से राजनीतिक तंज छोड़कर महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की अपील भी की। उन्होंने दावा किया कि देश में कई परिवार महंगाई से परेशान हैं, युवाओं को रोजगार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और निजी निवेश की स्थिति पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने वाराणसी, नागपुर, लखनऊ, प्रयागराज और पटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन जगहों के नतीजों को सरकार की नीतियों के प्रति जनता की नाराजगी के रूप में देखा जाना चाहिए। यह जयराम रमेश की राजनीतिक प्रतिक्रिया है; चुनाव परिणामों से राष्ट्रीय स्तर पर जनता के रुख के बारे में कोई व्यापक निष्कर्ष निकालने के लिए अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की परिस्थितियों का विश्लेषण जरूरी है।
चार राज्यों के MLC चुनाव में किसे कितनी सीटें मिलीं?
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। उपलब्ध परिणामों के मुताबिक, भाजपा और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगियों ने कुल 16 सीटें जीतीं। कांग्रेस के खाते में एक सीट आई, जबकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की।
कांग्रेस के लिए नागपुर की जीत इसलिए अहम रही, क्योंकि शुरुआती चुनावी तस्वीर में पार्टी को कई राज्यों में सफलता नहीं मिलती दिखाई दे रही थी। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी के चारों संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में हार की खबरों के बाद भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा था।
नागपुर में अभिजीत वंजारी की जीत ने चुनावी बहस का रुख कुछ हद तक बदल दिया। कांग्रेस को इस चुनाव में केवल एक सीट मिली, लेकिन उसी जीत ने भाजपा के नेताओं के पहले के बयानों को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।
फडणवीस के ‘Big Fat Zero’ पोस्ट पर कांग्रेस का हमला
नागपुर का नतीजा घोषित होने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने देवेंद्र फडणवीस के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। कांग्रेस के मुताबिक, इस पोस्ट में विधान परिषद चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को ‘बिग फैट जीरो’ कहा गया था।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूरे नतीजे सामने आने से पहले ही फडणवीस ने कांग्रेस की हार को लेकर टिप्पणी कर दी थी। नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत के बाद पार्टी ने इसी पोस्ट को आधार बनाकर मुख्यमंत्री पर पलटवार किया।
कांग्रेस ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि फडणवीस को पोस्ट हटाना पड़ा और उनका राजनीतिक तंज उलटा पड़ गया। पार्टी ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में आगे होने वाले चुनावों में भाजपा को और चुनौती मिल सकती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि पोस्ट हटाने के कारण को लेकर कांग्रेस ने अपना राजनीतिक दावा पेश किया है। इसे फडणवीस की ओर से दिए गए किसी आधिकारिक स्पष्टीकरण के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, जब तक उनका पक्ष स्पष्ट रूप से सामने न हो।
महाराष्ट्र की पांच MLC सीटों में किस दल को मिली जीत?
महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महाविकास आघाड़ी के बीच मुकाबला रहा। भाजपा और शिवसेना ने एक-एक सीट जीती, जबकि विपक्षी गठबंधन के घटक दलों ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की।
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत हासिल की। पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने भाजपा की स्मिता जाधव को हराया। छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भी NCP (SP) के खाते में गया।
वहीं, अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना के किरण सरनाइक विजयी हुए और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के कौस्तुभ गावड़े ने जीत दर्ज की। इस तरह महाराष्ट्र की पांच सीटों में सत्तारूढ़ महायुति को दो और विपक्षी महाविकास आघाड़ी को तीन सीटें मिलीं।
नागपुर के नतीजे से क्यों बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी?
नागपुर की सीट पर कांग्रेस की जीत ने भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप को नया मुद्दा दे दिया है। भाजपा नेताओं ने शुरुआती नतीजों के आधार पर कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे, जबकि कांग्रेस अब नागपुर और वाराणसी के नतीजों का हवाला देकर भाजपा को जवाब दे रही है।
हालांकि, विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों की प्रकृति विधानसभा चुनावों से अलग होती है। इन सीटों पर मतदाता समूह, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की पकड़ और मतगणना की विशेष प्रक्रिया परिणामों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए इन नतीजों को पूरे राज्य या देश की राजनीतिक स्थिति का सीधा पैमाना मानना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, अभिजीत वंजारी की जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इसे भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र में मिली अहम सफलता बता रही है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस पर उसके हमले तेज हो गए हैं। आने वाले दिनों में दोनों दल इस परिणाम को अपने-अपने राजनीतिक तर्कों के समर्थन में पेश कर सकते हैं।



