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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा SIR के खिलाफ विरोध, 1 नवंबर को INDIA गठबंधन की रैली

पर चुनाव आयोग

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना होता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान नाम हटाने, नाम जोड़ने और पात्र मतदाताओं की पहचान से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आए हैं।

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कुछ अन्य दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जा रही है और कई पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को ऐसी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी योग्य नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि विपक्ष लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल कर रहा है। उनके मुताबिक, यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने से जुड़ी है।

दूसरी ओर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में किसी भी गड़बड़ी या अनियमितता की पुष्टि के लिए संबंधित चुनावी रिकॉर्ड, शिकायतों और अधिकारियों के जवाब का परीक्षण जरूरी है। विपक्ष के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय उनकी स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण होगी।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली

SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की है। इसी क्रम में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बनाई गई है। विपक्षी दलों का उद्देश्य मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के अनुसार, INDIA गठबंधन में शामिल 21 राजनीतिक दलों ने 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक ‘जन इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। इसे 1 नवंबर की रैली से पहले आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा था।

हालांकि, इस कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कांग्रेस का आरोप है कि पहले अशोक होटल में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद अनुमति नहीं मिली।

इसके बाद कांग्रेस ने रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया। वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी ने 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक रामलीला मैदान की बुकिंग कराई है। उन्होंने दिल्ली कांग्रेस के नेताओं के साथ मैदान का दौरा कर 1 नवंबर की रैली की तैयारियों का जायजा भी लिया।

कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप

केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी चल रही थी, तो अचानक रोक लगाने की जरूरत क्यों पड़ी।

कांग्रेस महासचिव ने इस कार्रवाई के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने और चुनावी व्यवस्था पर उठ रहे सवालों से बचने की कोशिश कर रही है।

वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी और किसी भी तरह के दबाव के सामने नहीं झुकेगी।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि विपक्ष को रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने से रोका गया, तो पार्टी अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने के विकल्प तलाशेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के आवास के बाहर धरना देने की संभावना का भी उल्लेख किया।

कांग्रेस नेता के मुताबिक, पार्टी का उद्देश्य ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को आगे बढ़ाना है।

हालांकि, कार्यक्रम की अनुमति से जुड़े विवाद पर कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों और पुलिस या संबंधित प्रशासन के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।

‘कितनी बार अनुमति देने से रोकेंगे?’ वेणुगोपाल ने उठाए सवाल

कार्यक्रम की अनुमति को लेकर सवाल पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस अपना कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पार्टी किसी भी परिस्थिति में अपने आंदोलन को बीच में नहीं छोड़ेगी। उनके अनुसार, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त के पद और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।

कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों और नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने का अधिकार है। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि एक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं मिलती, तो दूसरे स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

इस पूरे विवाद के बीच 1 नवंबर की रैली को विपक्ष की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस रैली के जरिए कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सहयोगी दल SIR, मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने और चुनावी निष्पक्षता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं।

क्या है विपक्ष की मांग और आगे क्या होगा?

कांग्रेस और INDIA गठबंधन की मुख्य मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें या उन्हें पद से हटाया जाए। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दल जनसुनवाई, सार्वजनिक कार्यक्रमों और रैलियों के माध्यम से लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

राहुल गांधी के बयान और केसी वेणुगोपाल के आरोपों से स्पष्ट है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहीं, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली के जरिए विपक्ष अपनी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

अब इस पूरे मामले में सबकी नजरें प्रस्तावित रैली, कार्यक्रम की अनुमति से जुड़े विवाद और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर उठाए गए सवालों के जवाब पर रहेंगी। यदि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करता है, तो यह मुद्दा आगे भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

फिलहाल, कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी। दूसरी ओर, आरोपों की वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित रिकॉर्ड, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

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