
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन छठे दिन भी जारी रहने के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत एमपीएससी के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के आचरण और कार्यप्रणाली की जांच के लिए एक समिति गठित करने की सिफारिश राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से की है।
सरकार की इस पहल को एमपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्र लंबे समय से परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
MPSC छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा फैसला
पुणे में एमपीएससी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी पिछले छह दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां सामने आई हैं और कथित प्रश्नपत्र लीक की घटना ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन में विपक्षी नेताओं और मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने भी पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से राज्यपाल को भेजी गई सिफारिश के मुताबिक, एमपीएससी के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज और आचरण की जांच के लिए समिति बनाई जा सकती है। प्रस्ताव है कि इस समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाए और समिति को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सरकार को देनी होगी।
अनुच्छेद 317 के तहत होगी जांच
एमपीएससी विवाद में संविधान का अनुच्छेद 317 काफी महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार इसी प्रावधान के तहत आयोग के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों के आचरण और कार्यप्रणाली की जांच कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सरकार की ओर से प्रस्तावित समिति एमपीएससी के कामकाज से जुड़े मामलों की पड़ताल करेगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला किया जाएगा।
सरकार पहले भी संकेत दे चुकी थी कि एमपीएससी के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों एवं सदस्यों के कामकाज की न्यायिक जांच कराई जा सकती है। अब मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को औपचारिक सिफारिश भेजे जाने से इस मामले में प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
किस परीक्षा के बाद शुरू हुआ पूरा विवाद?
एमपीएससी विवाद की शुरुआत ड्रग इंस्पेक्टर पदों की भर्ती परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद हुई। आयोग ने 29 जुलाई 2025 को ड्रग इंस्पेक्टर के 506 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था।
इसके बाद 22 मार्च को राज्य के छह संभागीय मुख्यालयों पर स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा का परिणाम 12 जून को घोषित किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद कुल 506 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए योग्य माना गया था।
इनमें से 488 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच आयोजित किए गए। इसके बाद आयोग ने 485 पात्र और तीन अपात्र उम्मीदवारों वाली एक अस्थायी सामान्य योग्यता सूची जारी की।
हालांकि, इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।
उम्मीदवारों ने लगाए पेपर लीक के आरोप
22 से 26 जुलाई के बीच एमपीएससी को अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से कई शिकायतें मिलीं। शिकायतों में दावा किया गया कि कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र या परीक्षा में पूछे जाने वाले कुछ प्रश्नों की जानकारी मिल गई थी।
आरोप यह भी था कि परीक्षा से पहले प्राप्त प्रश्नों को बाद में सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए प्रसारित किया गया। शिकायतों के सामने आने के बाद आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया और आखिरकार संबंधित भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि कथित पेपर लीक कैसे हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आयोग की व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे।
MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग
पुणे में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा भी शामिल है। इसके अलावा छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और कथित पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी उम्मीदवार एमपीएससी की परीक्षाओं के प्रारूप को लेकर भी बदलाव चाहते हैं। छात्रों की मांग है कि आयोग परीक्षा के वस्तुनिष्ठ और वर्णनात्मक प्रारूप से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट नीति बनाए और उम्मीदवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
महेंद्र हरपालकर की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त
एमपीएससी विवाद के बीच सरकार ने आयोग के सचिव पद पर प्रतिनियुक्त महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति भी समाप्त कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एमपीएससी अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद सरकार ने 30 सितंबर को जांच का आश्वासन दिया था। अब राज्यपाल को जांच समिति गठित करने की सिफारिश भेजे जाने के बाद छात्रों की मांगों पर सरकार की कार्रवाई का अगला चरण शुरू हो गया है।
रोहित पवार और विपक्षी नेताओं ने क्या कहा?
एमपीएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का समाधान करने की अपील की है।
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आह्वाड ने भी आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि कथित पेपर लीक एमपीएससी अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान हुआ है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी या पदाधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
मनोज जरांगे पाटिल ने भी छात्रों का किया समर्थन
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल भी पुणे में आंदोलन कर रहे एमपीएससी उम्मीदवारों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों से एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखने की अपील की।
जरांगे ने सरकार से भी छात्रों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने का आग्रह किया। उनके आंदोलन में शामिल होने के बाद एमपीएससी विवाद को लेकर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।
इससे पहले एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार भी सरकार से आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की अपील कर चुके हैं।
राहुल गांधी के पुणे पहुंचने की संभावना
एमपीएससी छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल आगे भी बढ़ सकती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 7 या 8 अक्टूबर को पुणे पहुंचकर आंदोलन कर रहे एमपीएससी अभ्यर्थियों से मुलाकात करने की संभावना जताई जा रही है।
यदि राहुल गांधी छात्रों से मुलाकात करते हैं तो यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल छात्रों की नजर सरकार की प्रस्तावित जांच पर है और वे चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो तथा दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
तीन महीने में आ सकती है जांच रिपोर्ट
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सिफारिश के अनुसार प्रस्तावित जांच समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को दिए जाने का प्रस्ताव है। समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
अब इस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि एमपीएससी की परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में वास्तव में क्या गड़बड़ियां हुईं और कथित पेपर लीक के आरोपों में कितनी सच्चाई है। समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
MPSC उम्मीदवारों के लिए आगे क्या?
एमपीएससी अभ्यर्थियों के लिए यह पूरा घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता सीधे उनके भविष्य से जुड़ी है। हजारों छात्र वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता की खबरें उनके भरोसे को प्रभावित करती हैं।
सरकार की जांच समिति अगर समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से काम करती है तो इससे एमपीएससी की परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधारों का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल पुणे में छात्रों का आंदोलन जारी है और सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
निष्कर्ष: एमपीएससी पेपर लीक विवाद अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से राज्यपाल को अनुच्छेद 317 के तहत जांच समिति गठित करने की सिफारिश किए जाने के बाद मामला व्यापक जांच के दायरे में आ गया है। अब सबसे अहम सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है और सरकार उसकी रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई करती है।



