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Mirzapur The Movie Review: मिर्जापुर की दुनिया में फिर लौटा खौफ, सत्ता और बदले का खेल

Mirzapur The Movie Review: मिर्जापुर की वह दुनिया, जहां सत्ता हासिल करने के लिए डर, बंदूक और खून का इस्तेमाल होता है, अब वेब सीरीज के बाद बड़े पर्दे पर पहुंच गई है। Mirzapur: The Movie में मेकर्स ने पुरानी कहानी और किरदारों को एक बड़े सिनेमाई कैनवास पर पेश करने की कोशिश की है। फिल्म में पुराने चेहरों के साथ कुछ नए किरदार भी जोड़े गए हैं, जो कहानी को मिर्जापुर से राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों तक ले जाते हैं।

करीब तीन घंटे से ज्यादा लंबी यह फिल्म पूरी तरह से एक्शन, बदले, सत्ता की भूख और पारिवारिक रिश्तों के बीच चलती है। कहानी में कई ऐसे मोड़ हैं जो दर्शकों को चौंकाते हैं, हालांकि फिल्म का बड़ा हिस्सा उन लोगों के लिए काफी जाना-पहचाना महसूस हो सकता है, जिन्होंने Mirzapur के पिछले सीजन देखे हैं।

Mirzapur The Movie की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी साल 2018 के आसपास की घटनाओं को आगे बढ़ाती है। मिर्जापुर में सत्ता का सबसे बड़ा नाम अभी भी अखंडानंद ‘कालीन भैया’ त्रिपाठी है। वह पहले की तरह खुद हथियार उठाकर हर किसी को खत्म करने के बजाय अपने आदेश पर लोगों को मरवाने में विश्वास रखता है। उसके लिए डर ही सत्ता बनाए रखने का सबसे बड़ा हथियार है।

फिल्म की शुरुआत ही इस बात का संकेत देती है कि मिर्जापुर की दुनिया कितनी खतरनाक है। कालीन भैया की आवाज के साथ दिखाए गए शुरुआती दृश्यों में साफ हो जाता है कि यहां सत्ता सिर्फ कुर्सी नहीं, बल्कि लोगों के मन में पैदा किया गया खौफ है।

हालांकि इस बार कहानी सिर्फ मिर्जापुर तक सीमित नहीं रहती। फिल्म का बड़ा हिस्सा राजस्थान के जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके में भी जाता है। यही बदलाव फिल्म को वेब सीरीज से अलग सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश करता है।

रवि किशन का नया किरदार बढ़ाता है कहानी की मुश्किल

फिल्म में रवि किशन एक नए और बेहद महत्वपूर्ण किरदार बाब्बन ‘बबुआ’ यादव के रूप में नजर आते हैं। जैसलमेर में ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा बाब्बन सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाना नहीं चाहता, बल्कि उसकी नजर मिर्जापुर की सत्ता पर भी है।

मिर्जापुर के पुराने दुश्मन रति शंकर शुक्ला के साथ मिलकर बाब्बन कालीन भैया के साम्राज्य को चुनौती देने की तैयारी करता है। इसके लिए वह पहले मिर्जापुर की सत्ता और कालीन भैया के उभरने की पूरी कहानी समझने की कोशिश करता है।

यहीं से कहानी में नए समीकरण बनते हैं। बाब्बन को लगता है कि अगर उसे मिर्जापुर पर कब्जा करना है तो उसे सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि पुराने रिश्तों और दुश्मनियों की भी जानकारी चाहिए। फिल्म इसी कोशिश को कई मोड़ों के जरिए आगे बढ़ाती है।

Guddu और Munna की दुश्मनी फिर बनी कहानी का केंद्र

Mirzapur की कहानी Guddu Pandit और Munna Tripathi की दुश्मनी के बिना अधूरी लगती है और फिल्म भी इससे अलग नहीं है। अली फजल का गुड्डू पहले की तरह गुस्सैल, ताकतवर और अपने तरीके से दुनिया को देखने वाला किरदार है।

वहीं दिव्येंदु का मुन्ना अपने पिता कालीन भैया से नाराज है। उसे लगता है कि उसके पिता गुड्डू और बबलू को जरूरत से ज्यादा छूट देते हैं। पिता-पुत्र के बीच की यह दूरी फिल्म में कई जगह कहानी को भावनात्मक आधार देती है।

दिलचस्प बात यह है कि गुड्डू और मुन्ना एक-दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन होने के बावजूद कई मामलों में एक जैसे नजर आते हैं। दोनों के अंदर गुस्सा है, दोनों सत्ता चाहते हैं और दोनों अपने परिवार के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

परिवार और रिश्तों की कहानी भी दिखाती है फिल्म

पहली नजर में Mirzapur The Movie एक गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड ड्रामा दिखाई देती है, लेकिन कहानी के बीच-बीच में फिल्म परिवार और रिश्तों पर भी ध्यान देती है।

कालीन भैया और मुन्ना के रिश्ते में पिता-पुत्र की कड़वाहट साफ दिखाई देती है। मुन्ना अपनी मां को भूल नहीं पाया है और अपनी सौतेली मां बीना त्रिपाठी को दिल से स्वीकार नहीं कर पाता। उसकी यही नाराजगी कई बार उसके व्यवहार में दिखाई देती है।

बीना त्रिपाठी का किरदार भी पहले की तरह बेहद महत्वपूर्ण है। रसिका दुग्गल ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो ताकतवर परिवार का हिस्सा होने के बावजूद खुद को कई स्तरों पर असहाय महसूस करती है। फिल्म में उसकी कहानी को नया मोड़ दिया गया है, जिससे त्रिपाठी परिवार के अंदर की राजनीति और ज्यादा उलझती है।

गुड्डू और उसके पिता के रिश्ते में भी तनाव

पंडित परिवार में भी सब कुछ ठीक नहीं है। गुड्डू के पिता रामाकांत अपने बेटे की हिंसक जिंदगी से परेशान हैं। उन्हें डर है कि छोटा बेटा बबलू भी धीरे-धीरे उसी रास्ते पर जा रहा है जिस पर उसका बड़ा भाई चल पड़ा है।

गुड्डू अपनी मां वसुधा से बेहद जुड़ा हुआ है। उसके लिए मां की जगह सबसे ऊपर है। फिल्म में एक घड़ी से जुड़ी घटना इसी रिश्ते को और गहरा करती है।

वसुधा अपनी भावनाओं से जुड़ी एक पुरानी घड़ी वापस पाने की कोशिश करती है, लेकिन ज्यादा पैसे देने वाला व्यक्ति उसे हासिल कर लेता है। इस घटना के बाद गुड्डू के भीतर बदले की भावना और मजबूत हो जाती है। यह छोटा सा घटनाक्रम फिल्म के हिंसक संसार में परिवार और भावनाओं का एक अलग पक्ष सामने लाता है।

फिल्म में प्यार और रिश्तों के भी कई रंग

Mirzapur The Movie सिर्फ बंदूक और गैंगवार की कहानी नहीं है। फिल्म में पुराने किरदारों के बीच प्रेम और अधूरे रिश्तों को भी जगह दी गई है।

मुन्ना को लगता है कि वह स्वीटी गुप्ता के करीब आ सकता है, लेकिन स्वीटी के दिल में उसके लिए कोई जगह नहीं है। उसका प्यार गुड्डू के लिए है। दूसरी तरफ बबलू, स्वीटी की बहन गोलू के प्रति अपने मन में भावनाएं रखता है, लेकिन वह उन्हें खुलकर जाहिर नहीं कर पाता।

बबलू गोलू की कॉलेज चुनाव की तैयारियों में मदद करता है। इन छोटे-छोटे रिश्तों की वजह से फिल्म का माहौल सिर्फ अपराध और हिंसा तक सीमित नहीं रहता।

मिर्जापुर से जैसलमेर तक फैली कहानी

फिल्म का एक बड़ा बदलाव इसका लोकेशन है। जहां वेब सीरीज की पहचान उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और पूर्वांचल के माहौल से बनी थी, वहीं फिल्म कहानी को राजस्थान के जैसलमेर तक ले जाती है।

रेगिस्तान के लंबे शॉट्स, खुला वातावरण और अलग तरह का विजुअल ट्रीटमेंट फिल्म को बड़े पर्दे के लिए ज्यादा भव्य बनाने में मदद करता है। मिर्जापुर की संकरी गलियों और अपराध की दुनिया के मुकाबले जैसलमेर का रेगिस्तानी बैकग्राउंड फिल्म को एक अलग दृश्यात्मक पहचान देता है।

जैसलमेर और मिर्जापुर भले ही एक-दूसरे से काफी दूर हों, लेकिन फिल्म में दोनों जगहों की अपराध की दुनिया को आपस में जोड़ा गया है।

एक्शन और हिंसा के बीच इंसानी पहलू

Mirzapur The Movie में एक्शन की कमी नहीं है। गोलियां चलती हैं, हाथापाई होती है और किरदार एक-दूसरे के खिलाफ साजिश रचते रहते हैं। हालांकि फिल्म का फोकस सिर्फ खून-खराबा दिखाने पर नहीं है।

किरदारों के बीच की बातचीत में कई बार उनका मानवीय पक्ष सामने आता है। यही फिल्म को केवल गैंगस्टर ड्रामा बनने से रोकता है। पिता और बेटे के बीच तनाव, भाईचारा, मां के प्रति गुड्डू का लगाव, प्यार में नाकामी और सत्ता खोने का डर—ये सभी पहलू कहानी को भावनात्मक आधार देते हैं।

अभिनय कैसा है?

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका पुराना स्टारकास्ट है। अली फजल गुड्डू के किरदार में फिर उसी ऊर्जा के साथ नजर आते हैं। दिव्येंदु का मुन्ना भी कहानी में वही आक्रामकता और सनक लेकर आता है, जिसकी उम्मीद दर्शक उससे करते हैं।

रसिका दुग्गल बीना के किरदार में एक बार फिर प्रभाव छोड़ती हैं। राजेश तैलंग रामाकांत के रूप में परिवार और अपराध की दुनिया के बीच फंसे पिता का पक्ष सामने रखते हैं।

वहीं रवि किशन की एंट्री कहानी में नया तनाव पैदा करती है। उनका बाब्बन यादव पुरानी Mirzapur दुनिया के लिए एक नई चुनौती के रूप में सामने आता है।

क्या फिल्म पुराने फैंस को पसंद आएगी?

अगर आपने Mirzapur के दोनों सीजन देखे हैं और इस दुनिया के किरदारों से अच्छी तरह परिचित हैं, तो फिल्म आपको ज्यादा आसानी से समझ आएगी। फिल्म को पुराने दर्शकों के लिए बहुत ज्यादा बैकग्राउंड एक्सपोजिशन की जरूरत नहीं पड़ती।

हालांकि नए दर्शकों के लिए कहानी और रिश्तों को समझने में कुछ समय लग सकता है। फिल्म कई पुराने संदर्भों और किरदारों पर निर्भर करती है, इसलिए इसे Mirzapur सीरीज के विस्तार के रूप में देखना ज्यादा बेहतर रहेगा।

फिल्म का रनटाइम तीन घंटे से अधिक है, लेकिन इसमें कहानी को आगे बढ़ाने के लिए नए किरदार और नए लोकेशन जोड़े गए हैं। इसके बावजूद कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां कहानी पहले से अनुमान लगाने योग्य लग सकती है।

पोस्ट-क्रेडिट सीन ने बढ़ाई आगे की उम्मीद

फिल्म का पोस्ट-क्रेडिट सीन खास है। यह सिर्फ कहानी में एक नया ट्विस्ट नहीं देता, बल्कि इस बात का संकेत भी देता है कि Mirzapur की कहानी बड़े पर्दे पर यहीं खत्म नहीं होने वाली।

मेकर्स ने आगे की संभावनाओं के लिए दरवाजा खुला रखा है। अगर फिल्म को दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है और कहानी के लिए पर्याप्त सामग्री मिलती है, तो Mirzapur को एक फिल्म फ्रेंचाइजी के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

Mirzapur The Movie Review: कैसी है फिल्म?

कुल मिलाकर Mirzapur The Movie अपने मूल अंदाज को बरकरार रखते हुए वेब सीरीज की दुनिया को बड़े पर्दे पर विस्तार देने की कोशिश करती है। इसमें सत्ता, बदला, अपराध, परिवार, प्यार और वफादारी के पुराने विषय मौजूद हैं, लेकिन कहानी को राजस्थान तक ले जाकर इसका दायरा बढ़ाया गया है।

फिल्म पूरी तरह नई कहानी होने का दावा नहीं करती, लेकिन यह केवल पुराने एपिसोड को दोहराने वाली फिल्म भी नहीं है। पुराने किरदारों की वापसी और नए चेहरों की एंट्री इसे एक नया मोड़ देती है।

अगर आपको Mirzapur की हिंसक दुनिया, गुड्डू पंडित, मुन्ना त्रिपाठी और कालीन भैया के किरदार पसंद रहे हैं, तो यह फिल्म आपके लिए खास हो सकती है। वहीं जो दर्शक पूरी तरह नई कहानी की उम्मीद लेकर जाएंगे, उन्हें फिल्म के कुछ हिस्से अनुमान लगाने योग्य लग सकते हैं।

फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसके किरदार और उनकी आपसी दुश्मनी हैं। अंत में पोस्ट-क्रेडिट सीन जिस तरह आगे की कहानी की संभावना छोड़ता है, उससे साफ संकेत मिलता है कि Mirzapur का सफर बड़े पर्दे पर अभी खत्म नहीं हुआ है।

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