
Lucknow Fake Medicine Case: राजधानी लखनऊ में सामने आए नकली दवाओं की सप्लाई के मामले ने अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सनसनी फैला दी है। अमीनाबाद में दर्ज केस की जांच करते हुए अधिकारियों को ऐसे सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर एफएसडीए की टीम सहारनपुर पहुंची। यहां नागल क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान एक मकान के तहखाने में दवाओं की पैकिंग से जुड़ा पूरा सेटअप मिलने का दावा किया गया है। टीम ने मौके से मशीनें, प्रिंटेड पैकेजिंग सामग्री और भारी मात्रा में दवा स्ट्रिप्स बरामद की हैं।
इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों का शक केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रह गया है। पूछताछ में सामने आए नामों और ठिकानों के आधार पर अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली या संदिग्ध दवाओं की पैकिंग और सप्लाई का नेटवर्क कितनी दूर तक फैला हुआ है। सहारनपुर के साथ-साथ रुड़की की कुछ फर्मों का नाम भी जांच के दायरे में आया है।
एजाज से पूछताछ के बाद सहारनपुर पहुंची जांच
लखनऊ के अमीनाबाद थाने में दर्ज मामले में सहारनपुर निवासी एजाज को गिरफ्तार किया गया था। उस पर सस्ती और कथित नकली दवाओं की सप्लाई से जुड़े होने का आरोप है। लखनऊ एसओजी और पुलिस की कार्रवाई के बाद जब एजाज से पूछताछ की गई तो जांच टीम को सहारनपुर में एक संभावित ठिकाने के बारे में जानकारी मिली।
इसी सूचना को आगे बढ़ाते हुए एफएसडीए की टीम ने सहारनपुर जिले के नागल थाना क्षेत्र में कार्रवाई की। टीम ग्राम कोटा स्थित एक मकान तक पहुंची। जांच के दौरान मकान में दवाओं की पैकिंग से संबंधित कई ऐसी चीजें मिलीं, जिन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
अधिकारियों के अनुसार मकान में 41 लुपिन और दो मैक्लिओड्स के कॉरुगेटेड बॉक्स बरामद हुए। इन बॉक्स के नीचे एक तहखाना बना हुआ था। तलाशी के दौरान इसी तहखाने से दवा पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और अन्य सामग्री मिली।
तहखाने में मिला दवा पैकिंग का पूरा सेटअप
सहारनपुर में मिली सामग्री ने जांच अधिकारियों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा। तहखाने से स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो, अलग-अलग डाई-पंच और प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल बरामद किया गया। यह सामग्री सामान्य घरेलू इस्तेमाल की नहीं होती, बल्कि दवाओं की स्ट्रिप और पैकेजिंग तैयार करने में इस्तेमाल की जा सकती है।
टीम को डिफकॉर्ट-6 की प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल भी मिली। इसके अलावा अलग-अलग दवाओं की पैकिंग से जुड़ी सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई है कि इस जगह का इस्तेमाल दवाओं की पैकिंग के लिए किया जा रहा था।
पूछताछ में विनोद नाम के व्यक्ति से भी जानकारी ली गई। अधिकारियों के मुताबिक विनोद ने तहखाने में दवाओं की पैकिंग किए जाने की बात बताई है। हालांकि, मामले में सामने आए सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और संबंधित प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही होगी।
32 किलो से ज्यादा दवा स्ट्रिप्स और सैकड़ों कार्टन बरामद
एफएसडीए की कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दवा सामग्री बरामद होने की बात सामने आई है। टीम के अनुसार डिफकॉर्ट-6 की करीब 32.555 किलोग्राम स्ट्रिप्स मौके से मिलीं। इसके साथ ही 973 प्रिंटेड कार्टन भी बरामद किए गए।
इसके अलावा रोसुुवास एफ-10 के 472 प्रिंटेड कार्टन भी मिले। जांच टीम को करीब 6.950 किलोग्राम पीली गोलियां और लगभग 4.900 किलोग्राम सफेद गोलियां भी बरामद हुई हैं।
बरामद सामग्री को टीम ने अपने कब्जे में लेकर सील कर दिया है। अब इन दवाओं और अन्य सामग्रियों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इनका निर्माण, पैकिंग और सप्लाई किस स्तर पर की जा रही थी।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि दवाओं की पैकिंग से संबंधित मशीनों के साथ बड़ी मात्रा में पहले से प्रिंट की गई पैकेजिंग सामग्री भी मिली है। इससे जांच एजेंसियों को कथित सप्लाई चेन की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
लखनऊ में दवा के नमूने जांच में निकले संदिग्ध
इस पूरे मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र से जुड़ी है। वहां की गई जांच के दौरान लेवेरा-500 दवा के दो अलग-अलग बैच के नमूने राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए थे।
प्रयोगशाला जांच में इन नमूनों को ‘प्रकृति से असली नहीं’ पाया गया। यानी नमूनों की गुणवत्ता और वास्तविकता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। इसी रिपोर्ट ने जांच एजेंसियों के सामने मामले को और गंभीर बना दिया।
अब अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि संदिग्ध दवाओं की खरीद कहां से हुई, उन्हें कहां पैक किया गया और किन-किन स्थानों पर उनकी सप्लाई की गई। इसके लिए खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और स्टॉक की जानकारी को भी खंगाला जा रहा है।
खरीद और बिक्री के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर
जांच के दौरान दवाओं की खरीद-बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड में भी अंतर सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 76,790 स्ट्रिप्स की खरीद दर्ज थी, जबकि बिक्री और स्टॉक को मिलाकर करीब 85,832 स्ट्रिप्स का आंकड़ा सामने आया।
खरीद की तुलना में बिक्री और स्टॉक का आंकड़ा अधिक होने से जांच अधिकारियों के सामने कई सवाल खड़े हुए हैं। आखिर अतिरिक्त स्ट्रिप्स कहां से आईं और उनका रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला, इसकी पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसियां अब दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर, बिल और सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर देख रही हैं। यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो इससे कथित नकली दवा नेटवर्क के संचालन को समझने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
रुड़की की कई फर्में भी जांच के घेरे में
सहारनपुर में कार्रवाई के बाद जांच का दायरा अब रुड़की तक भी पहुंच गया है। पूछताछ के दौरान रुड़की की प्रिजार्क हेल्थकेयर, रेडिएंट प्रिंटो पैक और वी-ब्रोस लाइफसाइंसेज समेत कुछ अन्य लोगों और ठिकानों का जिक्र सामने आया है।
एफएसडीए इन फर्मों की भूमिका की जांच कर रहा है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन कंपनियों का कथित नकली या संदिग्ध दवा पैकिंग और सप्लाई से कोई संबंध था या नहीं।
जांच में पैकेजिंग सामग्री कहां तैयार हुई, दवाओं की स्ट्रिप्स कहां बनीं, उन्हें किन जगहों पर भेजा गया और किन लोगों ने इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई, जैसे सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
नकली दवा नेटवर्क की कितनी गहरी हैं जड़ें?
लखनऊ से शुरू हुई जांच का सहारनपुर और फिर रुड़की तक पहुंचना इस मामले को एक बड़े नेटवर्क की दिशा में ले जा रहा है। हालांकि अभी जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को अंतिम रूप से तभी तय किया जा सकेगा जब सभी सबूतों और जांच रिपोर्ट की पुष्टि हो जाए।
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या सहारनपुर में मिला तहखाना केवल पैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था या इसके पीछे दवाओं के निर्माण और वितरण की भी कोई बड़ी व्यवस्था थी। बरामद मशीनों, पैकेजिंग सामग्री और दवाओं के नमूनों की जांच इस सवाल का जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मरीजों की सेहत से जुड़ा है मामला, इसलिए जांच अहम
नकली या संदिग्ध दवाओं का मामला केवल व्यापारिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहता। ऐसी दवाएं मरीजों की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। यही वजह है कि दवाओं की गुणवत्ता, उनके स्रोत और सप्लाई चेन की जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लखनऊ और सहारनपुर में हुई कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। यदि जांच में अवैध पैकिंग या नकली दवाओं की सप्लाई की पुष्टि होती है तो आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
फिलहाल लखनऊ और सहारनपुर दोनों मामलों में जांच जारी है। बरामद दवाओं और अन्य सामग्री के नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और पूछताछ से मिलने वाली नई जानकारी के आधार पर इस कथित नकली दवा नेटवर्क की अगली कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।



