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Nepal-Tibet Flood 2026: मौतों का आंकड़ा 797 के पार, सैकड़ों शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार

Nepal-Tibet Flood 2026: नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। बुधवार को ग्लेशियर टूटने और उसके बाद आए भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े इलाके में तबाही मचा दी। बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई बस्तियां, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं इसकी चपेट में आ गईं।

ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 781 तक पहुंच गई है, जबकि चीन की सरकारी मीडिया ने तिब्बत में 16 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर कुल मौतों का आंकड़ा 797 बताया जा रहा है। वहीं हजारों लोग अभी भी लापता हैं और उनके परिजनों को किसी अच्छी खबर का इंतजार है।

बचाव और राहत अभियान लगातार जारी है। इस बीच नेपाल के चितवन जिले में बड़ी संख्या में ऐसे शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया जा रहा है, जिनकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है। दूसरी ओर, त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में फंसे 100 से ज्यादा कर्मचारियों को बचाने के लिए नेपाली सेना ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

Nepal Flood 2026: मौतों का आंकड़ा 797 के पार

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा ने कुछ ही घंटों में भारी तबाही मचा दी। नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 781 हो गई है। तिब्बत में भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में अब तक 797 मौतें सामने आ चुकी हैं।

हालांकि राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 3,048 लोग अभी भी लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसे में आशंका है कि आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और तेज बहाव बचाव कार्यों को मुश्किल बना रहे हैं। कई इलाकों में राहत दलों को पहुंचने में भी काफी परेशानी हो रही है।

Chitwan में सैकड़ों अज्ञात शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार

इस आपदा का सबसे दर्दनाक दृश्य नेपाल के चितवन जिले में देखने को मिल रहा है। बाढ़ में बहकर आए सैकड़ों शव इतने खराब हो चुके हैं कि उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में प्रशासन ने अज्ञात शवों के सामूहिक अंतिम संस्कार और दफन की व्यवस्था शुरू की है।

चितवन के देवघाट वन क्षेत्र में अधिकारियों ने बड़ी संख्या में कब्रें तैयार की हैं। जंगल के रास्तों और आसपास के इलाकों को अस्थायी दफन स्थल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उन्हें धार्मिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अंतिम विदाई दी जा रही है।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई शव लंबे समय तक पानी और मलबे में रहने के कारण इतनी बुरी हालत में पहुंच गए कि पहचान की प्रक्रिया बेहद कठिन हो गई।

परिवारों के लिए यह स्थिति और भी पीड़ादायक है। कई लोग अब भी अपने रिश्तेदारों की तलाश में राहत शिविरों और अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।

नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 261 विदेशी नागरिक भी लापता

इस प्राकृतिक आपदा ने सिर्फ नेपाल और चीन के नागरिकों को ही प्रभावित नहीं किया है। सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी फंस गए या लापता हो गए हैं।

चीन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, तिब्बत की तरफ नेपाल से जुड़े एक सीमा क्षेत्र में 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें सबसे ज्यादा 104 नेपाली नागरिक बताए गए हैं।

इसके अलावा 49 भारतीय नागरिक, 33 लातवियाई नागरिक, 18 अमेरिकी नागरिक और 15 ब्रिटिश नागरिक भी लापता बताए गए हैं। इससे साफ है कि आपदा का असर सीमावर्ती क्षेत्र में मौजूद स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी यात्रियों और पर्यटकों पर भी पड़ा है।

लापता लोगों की राष्ट्रीयता और संख्या को लेकर राहत एजेंसियां लगातार जानकारी जुटा रही हैं। खराब संचार व्यवस्था और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण सही जानकारी जुटाना आसान नहीं है।

करीब 85 अमेरिकी नागरिक अब भी लापता

अमेरिका ने भी इस आपदा के बाद अपने नागरिकों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार करीब 85 अमेरिकी नागरिक अभी भी लापता हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि अब तक नौ अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की जानकारी नहीं मिली है।

अमेरिकी प्रशासन प्रभावित क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों के बारे में जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयासों में जुटा है। हालांकि इलाके की कठिन भौगोलिक स्थिति और संचार बाधित होने के कारण सभी लोगों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

Australia ने बढ़ाई मानवीय मदद, 42 नागरिक लापता

नेपाल-तिब्बत बाढ़ के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राहत सहायता पहुंचाई जा रही है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त 3 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है।

यह सहायता नेपाल-चीन सीमा के आसपास बाढ़ से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के अनुसार 42 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है

विदेशी सरकारें अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने के साथ-साथ राहत और बचाव प्रयासों में स्थानीय प्रशासन के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।

Trishuli Bazaar में फिर फ्लैश फ्लड का खतरा

पहली आपदा के बाद भी नेपाल के कई इलाकों में खतरा खत्म नहीं हुआ है। नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार क्षेत्र के लिए ताजा फ्लैश फ्लड और अचानक पानी बढ़ने की चेतावनी जारी की गई है।

ऊपरी इलाकों में ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहाव की घटनाओं के बाद निचले इलाकों में अचानक पानी का स्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और नदी के आसपास के इलाकों से दूर रहने की अपील की है।

पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की बाढ़ बेहद खतरनाक होती है क्योंकि पानी के साथ बड़ी मात्रा में पत्थर, बर्फ और मलबा भी नीचे की ओर आता है। इससे सामान्य बाढ़ की तुलना में नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।

Trishuli 3A सुरंग में फंसे 100 से ज्यादा लोगों की उम्मीद जगी

इस भयावह आपदा के बीच बचाव अभियान से एक बड़ी उम्मीद भी जगी है। त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में 100 से अधिक कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है।

शनिवार देर रात नेपाली सेना के बचाव दल ने सुरंग तक पहुंचने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। सेना ने सुरंग के भीतर एक पाइप डालने में कामयाबी हासिल की है। इससे अंदर फंसे लोगों तक संपर्क या जरूरी सामग्री पहुंचाने की उम्मीद बढ़ी है।

बचाव दल लगातार सुरंग में फंसे कर्मचारियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि सुरंग के अंदर की स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मलबे और पानी के कारण अभियान बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।

अगर अंदर मौजूद लोगों के साथ संपर्क स्थापित हो जाता है तो यह इस भीषण आपदा के बीच एक बड़ी राहत की खबर होगी।

Glacier Collapse से क्यों बढ़ा खतरा?

नेपाल-तिब्बत सीमा का हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां ग्लेशियर, बर्फ से बनी झीलें और ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके मौजूद हैं। जब ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटता है या ग्लेशियर से जुड़ी झील का पानी अचानक बाहर निकलता है, तो नीचे की ओर बेहद तेज गति से पानी और मलबा पहुंच सकता है।

इसी तरह की घटना के बाद बुधवार को आई फ्लैश फ्लड ने बड़े इलाके को प्रभावित किया। पानी के साथ चट्टानों और मलबे ने सड़क, पुल, इमारतों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया।

ऐसी घटनाओं में सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि सामान्य बाढ़ की तुलना में लोगों के पास सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का समय बहुत कम होता है।

हजारों परिवार अपनों की तलाश में

नेपाल और तिब्बत में इस समय हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। अस्पतालों, राहत शिविरों और अस्थायी केंद्रों में लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

कई शवों की पहचान नहीं होने के कारण प्रशासन के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। डीएनए जांच, दस्तावेजों और परिवारों से मिली जानकारी के आधार पर पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

जैसे-जैसे बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचेंगे, आपदा की वास्तविक भयावहता और नुकसान का पूरा आकलन सामने आने की उम्मीद है।

Nepal-Tibet Flood: राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौतियां

मौतों और लापता लोगों की बड़ी संख्या के अलावा बुनियादी ढांचे को हुआ नुकसान भी राहत अभियान में बाधा बन रहा है। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुछ क्षेत्रों में बिजली और संचार सेवाएं प्रभावित हैं।

सबसे ज्यादा परेशानी उन पहाड़ी इलाकों में है जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है। बचाव दलों को मलबे और तेज पानी के बीच काम करना पड़ रहा है।

इसके बावजूद नेपाल की सेना, स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। विदेशी सरकारें भी अपने नागरिकों की तलाश और मानवीय सहायता के लिए नेपाल तथा चीन के अधिकारियों से संपर्क में हैं।

Nepal Flood 2026: आगे क्या?

नेपाल-तिब्बत फ्लैश फ्लड के बाद अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना, प्रभावित लोगों तक भोजन और चिकित्सा सहायता पहुंचाना तथा जोखिम वाले इलाकों को खाली कराना है।

781 मौतों और 3,048 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट ने इस आपदा को बेहद गंभीर बना दिया है। तिब्बत में भी मौतें दर्ज की गई हैं और विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।

त्रिशूली 3A परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश फिलहाल बचाव अभियान की सबसे अहम कड़ियों में से एक है। यदि सुरंग में मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता है, तो यह हजारों लोगों के बीच उम्मीद की एक बड़ी किरण होगी।

फिलहाल नेपाल और तिब्बत में राहत एवं बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों की नजर उन इलाकों पर भी है जहां ग्लेशियर टूटने या अचानक पानी बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

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