
30 मई, 2026 | नई दिल्ली | Rahul Gandhi on Education System: देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर राजनीतिक गलियारों में घमासान मच गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के प्रमुख चेहरे राहुल गांधी ने देश की शिक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही तकनीकी और प्रशासनिक कमियों को लेकर केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
हाल ही में नीट (NEET) की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों और छात्रों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा के प्रश्नपत्र व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे सोशल मीडिया ग्रुप्स पर सरेआम और खुले तौर पर बेचे जा रहे थे। उन्होंने देश की पूरी परीक्षा प्रणाली में बड़े और व्यापक सुधारों की मांग की है।
नीट पेपर लीक से लेकर सीबीएसई तक: राहुल गांधी ने गिनाए शिक्षा व्यवस्था के ‘तीन बड़े फेलियर’
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और फैसलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने देश के तीन अलग-अलग आयु वर्ग के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने का दावा करते हुए तीन बड़े मुद्दों को रेखांकित किया:
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NEET पेपर लीक विवाद: राहुल गांधी ने कहा कि नीट परीक्षा के पेपर लीक होने की वजह से देश के 22 लाख छात्रों का भविष्य और उनकी मेहनत दांव पर लग गई है। छात्र गहरे मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
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CBSE क्लास 12वीं का रिजल्ट और OSM सिस्टम: उन्होंने आरोप लगाया कि इस साल सीबीएसई कक्षा 12वीं के मूल्यांकन के लिए लागू किए गए टूटे और दोषपूर्ण ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल सिस्टम के कारण कई होनहार छात्रों को उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं। नतीजतन, कई छात्रों ने कॉलेजों में दाखिला लेने की अपनी पात्रता (Eligibility) तक खो दी है।
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कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में अचानक बदलाव: राहुल गांधी ने सीबीएसई के एक हालिया फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि कक्षा 9वीं के लाखों छात्रों को आगामी 1 जुलाई से अचानक एक नई भाषा सीखने का फरमान सुना दिया गया है। जमीन पर न तो इसके लिए पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही किताबें उपलब्ध हैं। स्थिति इतनी खराब है कि 14 साल के बच्चों को ‘ट्रांजिशनल अरेंजमेंट’ के नाम पर कक्षा 6वीं की किताबें थमाई जा रही हैं।
NEET। CBSE। SSC। और आज CUET।
चार परीक्षाएँ। एक करोड़ बच्चे। एक भी ईमानदारी से नहीं हो पाई।
दावे “विश्वगुरु” के, मगर देश में एक परीक्षा नहीं करवा सकते – मोदी जी ने पूरी शिक्षा व्यवस्था तबाह कर दी है।
जिस पीढ़ी का भविष्य आप बर्बाद कर रहे हैं – वही पीढ़ी आपका हिसाब करेगी।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 30, 2026
“धर्मेंद्र प्रधान नहीं, यह ‘आपदा मंत्रालय’ है” — राहुल गांधी का पीएम मोदी से माफी की मांग
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इन तमाम नाकामियों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए राहुल गांधी ने उन पर तीखे शब्दबाण छोड़े। उन्होंने कहा:
“तीन अलग-अलग परीक्षाएं, तीन अलग-अलग आयु वर्ग और केवल एक मंत्री। धर्मेंद्र प्रधान जी सिर्फ एक बार फेल नहीं हुए हैं, बल्कि उन्होंने एक साथ भारत के हर आयु वर्ग के छात्रों को फेल कर दिया है। सरकार की तरफ से होने वाली हर नई घोषणा बच्चों को अनिश्चितता की गहरी खाई में धकेल देती है। ताज्जुब की बात यह है कि हर नाकामी के बाद भी किसी को सजा नहीं मिलती। अब तो शिक्षा मंत्रालय ‘आपदा का विभाग’ (Department of Disasters) बनकर रह गया है।”
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस विषय पर चुप्पी तोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी को कम से कम उन लाखों बच्चों और उनके परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, जिनका भविष्य इस लचर व्यवस्था के कारण अंधकार में चला गया है।
क्या है सीबीएसई का वह सर्कुलर, जिस पर खड़ा हुआ विवाद?
यह पूरा विवाद सीबीएसई द्वारा 15 मई को जारी किए गए एक आधिकारिक सर्कुलर के बाद और गहरा गया है। इस सर्कुलर के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE 2023) की सिफारिशों को लागू करने की बात कही गई है।
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नया नियम: सीबीएसई के आदेश के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाओं (R1, R2, R3) की पढ़ाई करना अनिवार्य कर दिया गया है।
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मूल भारतीय भाषाएं: इस नियम की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि इन तीन अनिवार्य भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं मूल भारतीय (Native Indian Languages) होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि इस नीति को बिना किसी जमीनी तैयारी, इंफ्रास्ट्रक्चर या शिक्षकों की नियुक्ति के ही आनन-फानन में लागू किया जा रहा है, जिससे स्कूली छात्र परेशान हो रहे हैं।
शिक्षा प्रणाली पर सियासी घमासान 2026: एक नज़र में मुख्य विवाद
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