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CBSE Re-evaluation: सीबीएसई पोर्टल क्रैश! री-इवैल्युएशन में किसी और की कॉपी अपलोड होने पर मंचा हड़कंप; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मांगी रिपोर्ट, IIT के वैज्ञानिक संभालेंगे मोर्चा

नई दिल्ली | 25 मई, 2026 | CBSE Re-evaluation: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 12वीं के नतीजों के बाद शुरू हुई री-इवैल्युएशन (पुनर्मूल्यांकन) और उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी की प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। सीबीएसई के आधिकारिक पोर्टल पर आ रही लगातार तकनीकी खराबियों, पेमेंट गेटवे फेल होने और धुंधली स्कैन कॉपियों की शिकायतों के बीच एक छात्र द्वारा उत्तर पुस्तिका ही बदले जाने के सनसनीखेज आरोप के बाद हड़कंप मच गया है।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने खुद कड़ा संज्ञान लिया है। शिक्षा मंत्री ने सीबीएसई से इस पूरे डिजिटल संकट पर एक विस्तृत और जवाबदेह रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही, सीबीएसई के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और पोर्टल को ठीक करने के लिए आईआईटी मद्रास (IIT Madras) और आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के शीर्ष प्रोफेसरों व तकनीकी विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को तैनात कर दिया गया है।

क्या है वेदांत का वायरल मामला? “यह मेरी हैंडराइटिंग ही नहीं है…”

सीबीएसई के री-इवैल्युएशन प्रोसेस पर यह बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर वेदांत श्रीवास्तव (Vedant Shrivastava) नामक कक्षा 12वीं के एक छात्र का पोस्ट तेजी से वायरल हो गया।

  • छात्र का गंभीर आरोप: वेदांत ने अपनी फिजिक्स (Physics) की उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी के लिए 19 मई को आवेदन किया था, जो उसे 23 मई को ईमेल के जरिए मिली। लेकिन जब उसने पीडीएफ खोली, तो वह दंग रह गया। वेदांत ने आरोप लगाया कि उसके रोल नंबर के तहत जो फिजिक्स की आंसर शीट अपलोड की गई है, वह उसकी है ही नहीं।

    Deccan Herald
  • लिखावट और सवालों का अंतर: छात्र ने ‘X’ पर सबूत साझा करते हुए लिखा, “सीबीएसई द्वारा भेजी गई फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका मेरी है ही नहीं। मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि यह मेरी लिखावट (Handwriting) नहीं है। इसमें वे सवाल भी शामिल नहीं हैं जिन्हें मैंने परीक्षा हॉल में हल किया था।”

    The Times of India
  • अन्य कॉपियों से तुलना: वेदांत के भाई सिद्धांत श्रीवास्तव ने बताया कि जब उन्होंने इस फिजिक्स की कॉपी की तुलना वेदांत के इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस के पेपरों से की, तो साफ अंतर नजर आया। इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की लिखावट आपस में पूरी तरह मिलती है, जबकि फिजिक्स की कॉपी के अक्षरों का आकार, झुकाव (Slant) और फ्लो पूरी तरह से किसी दूसरे छात्र का है।

वेदांत का दावा है कि इस बड़ी लापरवाही के कारण उसे फिजिक्स में महज 50% मार्क्स मिले हैं, जिससे उसका पीसीएम (PCM) एग्रीगेट 75% से नीचे चला गया है और वह कॉलेज एडमिशन व प्रतियोगी परीक्षाओं के पात्रता मानदंडों से बाहर हो गया है।

सीबीएसई ने मामले को लिया ‘टॉप प्रायोरिटी’ पर; ट्रोलिंग के बाद परिवार ने साधी चुप्पी

सीबीएसई के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर वेदांत का पोस्ट वायरल होने के बाद बोर्ड ने इसे “टॉप प्रायोरिटी” (शीर्ष प्राथमिकता) पर लिया है। बोर्ड के अधिकारियों ने सीधे पीड़ित छात्र और उसके परिवार से संपर्क साधा है। सीबीएसई की एक समर्पित टीम लगातार सोशल मीडिया पर आ रही ऐसी शिकायतों की निगरानी कर रही है।

हालांकि, इंटरनेट पर इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। अकाउंट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कुछ सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा छात्र को ट्रोल किया जाने लगा, जिसके बाद उसके भाई सिद्धांत ने स्पष्ट किया कि वेदांत बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में व्यस्त था, इसलिए उसका पहले से कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं था। यह अकाउंट केवल इस गंभीर समस्या को उठाने के लिए बनाया गया था। फिलहाल, भारी ट्रोलिंग और मानसिक तनाव के कारण परिवार ने मीडिया से दूरी बना ली है।

क्या ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम बन गया जी का जंजाल?

इस साल सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की कॉपियों की जांच के लिए पूरी तरह से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लागू किया था। इसके तहत कॉपियों को स्कैन करके पीडीएफ में बदला जाता है और शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही कॉपियों का मूल्यांकन करते हैं।

बोर्ड ने दावा किया था कि इससे पारदर्शिता आएगी और टोटलिंग की गलतियां खत्म होंगी। लेकिन अब छात्रों का आरोप है कि कॉपियों के डिजिटलाइजेशन (स्कैनिंग और टैगिंग) के दौरान डेटा मिक्स-अप या रोल नंबर की गलत कोडिंग की गई है, जिससे एक छात्र की आंसर शीट दूसरे के प्रोफाइल पर अपलोड हो गई। वेदांत के अलावा कुछ अन्य छात्रों ने भी केमिस्ट्री के पेपर में पेज गायब होने या लिखावट न मिलने की शिकायतें दर्ज कराई हैं।

शिक्षा मंत्रालय का एक्शन प्लान: IIT के वैज्ञानिक और 4 सरकारी बैंक संभालेंगे कमान

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने पहले इन दिक्कतों को शुरुआती ट्रैफिक के कारण आई अस्थायी समस्या बताया था, लेकिन लगातार बढ़ते जनाक्रोश के बाद केंद्र सरकार को दखल देना पड़ा।

  • IIT विशेषज्ञों की भूमिका: आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर की टीमें अब सीबीएसई के पोर्टल की स्थिरता, सर्वर परफॉर्मेंस, लॉगिन ऑथेंटिकेशन और सुरक्षा मानकों की ऑडिट करेंगी ताकि भविष्य में कॉपियों की गलत टैगिंग न हो सके।

    The Indian Express
  • पेमेंट गेटवे में सुधार: री-इवैल्युएशन की फीस जमा करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से चर्चा की है। इसके बाद देश के चार बड़े सरकारी बैंकों— स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), केनरा बैंक और इंडियन बैंक को सीबीएसई के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • तारीखों में विस्तार: पोर्टल क्रैश होने की वजह से प्रभावित हुए लाखों छात्रों को राहत देते हुए सीबीएसई ने आंसर शीट की फोटोकॉपी डाउनलोड करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 24 मई किया था, और अब री-चेकिंग की प्रक्रिया 26 मई से 29 मई, 2026 के बीच आधिकारिक वेबसाइट (cbse.gov.in) पर चलेगी।

सीबीएसई री-इवैल्युएशन विवाद 2026: एक नज़र में मुख्य फैक्ट्स

समस्या / शिकायत का क्षेत्र छात्रों का आरोप / परेशानी सरकार और बोर्ड का सुधारात्मक कदम
आंसर शीट मिसमैच (वेदांत केस) रोल नंबर के तहत किसी दूसरे छात्र की फिजिक्स की कॉपी अपलोड की गई। हैंडराइटिंग अलग है। सीबीएसई द्वारा मामले की व्यक्तिगत जांच शुरू; मूल फिजिकल कॉपी और स्कैनिंग ऑडिट का आदेश।
पोर्टल और सर्वर क्रैश लॉगिन एरर, इनवैलिड टोकन और री-इवैल्युएशन पोर्टल का लगातार डाउन होना। आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम तैनात।
पेमेंट गेटवे फेलियर फीस कटने के बाद भी आवेदन पेंडिंग दिखना, असामान्य फीस का शो होना। SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और इंडियन बैंक द्वारा गेटवे इंटीग्रेशन दुरुस्त करने का काम शुरू।
फीस में बड़ी कटौती (राहत) मूल्यांकन में पारदर्शिता की मांग। कॉपियों को देखने की फीस ₹700 से घटाकर ₹100 और प्रति प्रश्न री-चेकिंग फीस ₹25 की गई।

बोर्ड परीक्षाएं किसी भी छात्र के करियर की दिशा तय करती हैं, और ऐसे में मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी खामियां या उत्तर पुस्तिकाओं का कथित रूप से आपस में बदल जाना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात है। सीबीएसई ने भरोसा दिलाया है कि हर जायज शिकायत की जांच विषय विशेषज्ञों की समिति द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होगा। शिक्षा सचिव संजय कुमार के अनुसार, यदि री-इवैल्युएशन में मार्क्स बढ़ते हैं, तो छात्रों की फीस भी वापस की जाएगी। अब देखना यह है कि आईआईटी के विशेषज्ञों की मदद से सीबीएसई अपने इस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को कितना सुरक्षित और पारदर्शी बना पाती है।

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