
नई दिल्ली | 25 मई, 2026 | Rahul Gandhi Slams BJP On Fuel Hike: देश भर में पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों ने एक बार फिर से सियासत का पारा गरमा दिया है। सोमवार, 25 मई, 2026 को तेल कंपनियों द्वारा ईंधन की कीमतों में इस महीने की सबसे बड़ी बढ़ोतरी (लगभग ₹2.80 प्रति लीटर तक) किए जाने के बाद विपक्ष सरकार पर पूरी तरह हमलावर हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘महंगाई मानव’ (Inflation Man Modi) का नया नाम दे दिया है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर कीमतों को किश्तों में बढ़ा रही है ताकि देश की जनता को इस लूट का तुरंत अहसास न हो और चुपके-चुपके उनकी जेब कटती रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव खत्म होते ही जनता को महंगाई के जाल में झोंक दिया गया है और आने वाले दिनों में यह आर्थिक संकट और गहरा होने वाला है।
“चुनाव खत्म होते ही ₹8 की लूट…” राहुल गांधी का ‘X’ पर फूटा गुस्सा
सोमवार को जैसे ही देश के मुख्य शहरों में पेट्रोल और डीजल के नए रेट्स लागू हुए, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर हिंदी में एक पोस्ट साझा करते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को कटघरे में खड़ा किया।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा:
“महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला! पेट्रोल-डीजल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं— ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे। मैं महीनों से देश में एक बड़े ‘आर्थिक तूफान’ (Economic Storm) के आने की चेतावनी दे रहा था। पर मोदी जी तब हमेशा की तरह चुनाव प्रचार में व्यस्त थे— और जैसे ही चुनाव खत्म हुए, पेट्रोल-डीजल के दामों में कुल ₹8 तक की बढ़ोतरी कर दी गई। और याद रखिए, यह बढ़ोतरी अभी रुकने वाली नहीं है, यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।”
उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, “महंगाई मानव मोदी का केवल एक ही काम है— चुनाव के दौरान बड़े-बड़े लोकलुभावन वादे करना और बाकी के पूरे समय आम जनता की जेब पर सीधे सर्जिकल स्ट्राइक करना।”
10 दिनों में चौथा झटका: क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
वैश्विक स्तर पर मचे उथल-पुथल के बीच देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार ईंधन के दामों में संशोधन किया है। 15 मई को तेल की कीमतों पर लगा लंबा फ्रीज हटने के बाद से अब तक दोनों ईंधनों के दामों में संचयी (Cumulative) रूप से लगभग ₹7.50 प्रति लीटर का भारी उछाल आ चुका है।
कीमतें बढ़ने का असली कारण क्या है?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट: पश्चिम एशिया (अमेरिका-ईरान युद्ध) में जारी गंभीर सैन्य तनाव के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘Strait of Hormuz’ पूरी तरह से बंद या बाधित है।
आयात पर निर्भरता: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80% से अधिक हिस्सा आयात करता है। इस जलमार्ग के बाधित होने से कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति रुक गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम और रिफाइनिंग मार्जिन आसमान छू रहे हैं।
कमजोर होता रुपया: इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई 12% की ऐतिहासिक गिरावट ने भी तेल के आयात को भारत के लिए बेहद महंगा बना दिया है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी घेरा: “यह देश की जनता की गाढ़ी कमाई की लूट है”
राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। खड़गे ने कहा कि हर रोज ईंधन के दामों में की जा रही यह बढ़ोतरी घरेलू बजट को पूरी तरह तबाह कर रही है।
खड़गे ने ट्वीट किया:
“ईंधन की लूट का यह दैनिक हमला अभी खत्म नहीं हुआ है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर पड़ता है, जिससे हर चीज महंगी हो जाती है। हमारे किसान भाई हों या देश के छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs), समाज का हर वर्ग आज भाजपा की इस खुली आर्थिक लूट का खामियाजा भुगतने को मजबूर है।”
दिल्ली और मुंबई में आज के नए रेट्स (25 मई, 2026)
ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के महानगरों में तेल की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई हैं:
दिल्ली (Delhi): राजधानी में पेट्रोल की कीमत अब बढ़कर ₹102.12 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर बिक रहा है।
मुंबई (Mumbai): महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थानीय टैक्स और हाई वैट (VAT) के कारण पेट्रोल ₹111.21 प्रति लीटर और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है।
कोलकाता (Kolkata): कोलकाता में पेट्रोल का नया भाव ₹113.51 और डीजल का भाव ₹99.82 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
ईंधन मूल्य वृद्धि और राजनीतिक घमासान 2026: मुख्य बिंदु
विवाद का विषय विपक्ष (कांग्रेस) का आरोप तेल कंपनियों / बाजार की हकीकत
बढ़ोतरी का तरीका किश्तों में दाम बढ़ाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है (चुपके से जेब काटना)। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में दैनिक उतार-चढ़ाव के आधार पर हो रहा संशोधन।
टाइमिंग पर सवाल चुनाव के दौरान कीमतों को जानबूझकर रोका गया, चुनाव खत्म होते ही ₹8 का बोझ डाला। हॉर्मुज जलमार्ग बंद होने के बाद 78 दिनों तक कीमतों को स्थिर रखकर जनता को राहत दी गई थी।
आर्थिक प्रभाव देश में एक ऐसा ‘आर्थिक तूफान’ आ रहा है जिसका असर गरीब, किसान और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने और वैश्विक सप्लाई चेन टूटने से आयात लागत बढ़ी।
राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को ‘महंगाई मानव’ कहना यह साफ दिखाता है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक महंगाई को लेकर विपक्ष एक बड़ा राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है। हालांकि सरकार का तर्क है कि वैश्विक युद्ध और हॉर्मुज संकट के बावजूद भारत में कीमतें दुनिया के अन्य देशों (जैसे यूरोप या अमेरिका) की तुलना में बहुत नियंत्रण में हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ₹102 के पार जा चुके पेट्रोल ने आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार जनता को राहत देने के लिए वैट (VAT) या एक्साइज ड्यूटी में दोबारा कोई कटौती करती है या नहीं।
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