
India LPG Supply: भारत में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर चल रहे संकट के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। जहां एक ओर पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने गैस सप्लाई को प्रभावित किया है, वहीं अब Argentina भारत के लिए एक नए और अहम सप्लायर के रूप में उभरकर सामने आया है।
साल 2026 की पहली तिमाही में ही Argentina ने भारत को करीब 50,000 टन LPG की सप्लाई की है। यह आंकड़ा पिछले साल 2025 के पूरे साल में भेजी गई 22,000 टन सप्लाई से दोगुने से भी ज्यादा है।
यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब Strait of Hormuz में तनाव के कारण भारत की गैस सप्लाई पर असर पड़ा है।
Hormuz संकट का भारत पर असर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से भारत अपने करीब 60% LPG आयात करता है।
लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इस मार्ग पर शिपिंग धीमी हो गई है और बीमा लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारत की गैस सप्लाई पर पड़ा है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च 2026 में LPG आयात लगभग 46% तक गिर सकता है, जो एक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता था।
Argentina कैसे बना भारत का नया सहारा?
दिलचस्प बात यह है कि Argentina ने 2024 से पहले भारत को LPG सप्लाई नहीं की थी।
लेकिन पिछले दो सालों में यह देश भारत के लिए एक इमरजेंसी सप्लायर बन गया है।
Bahía Blanca पोर्ट से करीब 39,000 टन LPG पहले ही रवाना हो चुकी थी, जबकि 11,000 टन और 5 मार्च को भेजी गई, जब संकट और गहरा गया।
क्या आम लोगों को मिलेगी राहत?
भारत में LPG की मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी भी कमी सीधे आम लोगों की रसोई तक असर डालती है।
Argentina से आई इस अतिरिक्त सप्लाई ने संभावित गैस संकट को काफी हद तक टाल दिया है।
सरकार ने भी स्थिति संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाना, कुछ इंडस्ट्रियल यूजर्स के लिए सप्लाई कम करना और लोगों को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
20,000 किलोमीटर लंबा गैस सफर
Argentina से भारत तक LPG लाने का सफर करीब 20,000 किलोमीटर लंबा है।
Bahía Blanca से गुजरात के दहेज तक पहुंचने में जहाजों को लंबा समय लगता है, जिससे लागत भी बढ़ जाती है।
इस लंबे रूट के कारण फ्रेट चार्ज ज्यादा होता है, डिलीवरी में देरी होती है और मौसम से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
फिर भी संकट के समय में दूरी से ज्यादा भरोसे को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत और Argentina के बढ़ते रिश्ते
ऊर्जा क्षेत्र में भारत और Argentina के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
ONGC Videsh Limited ने 2023 में Argentina की कंपनी YPF के साथ समझौता किया था।
इसके अलावा 2024 में भारत ने Argentina में लिथियम खोज के लिए भी निवेश किया।
दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में 6 अरब डॉलर से ज्यादा पहुंच चुका है, जिसमें ऊर्जा, खनिज और खाद्य तेल प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिका भी बना बड़ा सप्लायर
Argentina के साथ-साथ United States भी भारत के लिए एक अहम विकल्प बनकर उभरा है।
भारत ने अमेरिका से 2026 के लिए 2.2 मिलियन टन LPG खरीदने का लंबी अवधि का समझौता किया है।
साल के पहले दो महीनों में ही अमेरिका से 4.8 लाख टन LPG भारत आ चुकी है।
इससे भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है।
लागत का खेल: कहां सस्ती है LPG?
मध्य पूर्व से आने वाली LPG अब तक सबसे सस्ती पड़ती रही है, क्योंकि दूरी कम होती है और फ्रेट चार्ज भी कम लगता है।
खाड़ी देशों से भारत तक गैस पहुंचने में आमतौर पर 5 से 7 दिन लगते हैं, जिससे लागत नियंत्रित रहती है।
वहीं, अमेरिका और Argentina से आने वाली गैस में लंबी दूरी के कारण लागत बढ़ जाती है।
हालांकि, मौजूदा संकट में भारत के लिए सप्लाई सुनिश्चित करना ज्यादा जरूरी हो गया है, भले ही इसके लिए ज्यादा कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
ऊर्जा सुरक्षा की नई रणनीति
भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सिर्फ एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
सरकार 40 से ज्यादा देशों से ऊर्जा आयात करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर देश प्रभावित न हो।
Argentina और अमेरिका जैसे देश अब इस रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।
निष्कर्ष
India के लिए Argentina से LPG सप्लाई केवल एक अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीति का संकेत है।
यह दिखाता है कि भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है और जोखिम को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
हालांकि 20,000 किलोमीटर दूर से गैस लाना महंगा है, लेकिन संकट के समय यह एक मजबूत बैकअप साबित हो रहा है।
आने वाले समय में यह बदलाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत कर सकता है।



