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तमिलनाडु में इतिहास रचेंगे विजय, कल लेंगे CM पद की शपथ

Vijay Tamil Nadu CM: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव तय हो गया है। अभिनेता से राजनेता बने Vijay को राज्यपाल से सरकार बनाने की औपचारिक मंजूरी मिल गई है। उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam ने विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए जरूरी समर्थन जुटा लिया है। इसके साथ ही विजय अब रविवार शाम तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

यह केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि राज्य की दशकों पुरानी राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। विजय 59 साल बाद तमिलनाडु के पहले गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे राज्य में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।


कैसे मिला विजय को सरकार बनाने का मौका?

राज्यपाल को सौंपे 120 विधायकों के समर्थन पत्र

शनिवार को विजय ने अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को 120 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपे। तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी था और विजय ने यह आंकड़ा पार कर लिया।

उन्हें समर्थन देने वालों में Indian National Congress, Communist Party of India, Communist Party of India (Marxist) और Viduthalai Chiruthaigal Katchi जैसे दल शामिल हैं। इन सभी दलों ने बिना शर्त समर्थन देकर विजय की राह आसान कर दी।

राज्यपाल ने समर्थन पत्रों की समीक्षा के बाद विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया।


चौथी मुलाकात में मिली सफलता

पहले दो प्रयास रहे थे असफल

पिछले एक सप्ताह में विजय की यह राज्यपाल से चौथी मुलाकात थी। शुरुआती दो प्रयासों में वह बहुमत का पर्याप्त समर्थन जुटाने में असफल रहे थे। इसके बाद उन्होंने सहयोगी दलों से बातचीत तेज की और अंततः समर्थन जुटाने में कामयाब रहे।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से लगातार बातचीत और रणनीतिक बैठकों का दौर चल रहा था। आखिरकार शनिवार को स्थिति स्पष्ट हो गई और तमिलनाडु की राजनीतिक अनिश्चितता खत्म हो गई।


TVK की पहली चुनावी परीक्षा में बड़ी सफलता

पहली बार चुनाव लड़कर बनी सबसे बड़ी पार्टी

तमिलगा वेत्री कझगम ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीत लीं। पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई थी।

चुनाव परिणाम आने के बाद विजय ने कांग्रेस, वाम दलों, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से समर्थन मांगा। लंबे मंथन और राजनीतिक जोड़तोड़ के बाद इन दलों ने समर्थन देने का फैसला किया।

हालांकि विजय को दो सीटों से जीत मिली थी, इसलिए उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इससे पार्टी की संख्या 107 रह जाएगी, लेकिन सहयोगी दलों के समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा 120 तक पहुंच गया है।


59 साल बाद तमिलनाडु में गैर-द्रविड़ मुख्यमंत्री

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। पिछले करीब छह दशकों से राज्य की सत्ता द्रविड़ विचारधारा वाले दलों के पास रही है।

ऐसे में विजय का मुख्यमंत्री बनना राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह तमिलनाडु की राजनीतिक संस्कृति में नए दौर की शुरुआत हो सकती है।

विजय ने अपनी राजनीति को युवाओं, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों के मुद्दों से जोड़ा है, जिससे उन्हें बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं का समर्थन मिला।


शपथ ग्रहण से पहले जश्न का माहौल

चेन्नई में TVK समर्थकों का उत्साह

सरकार बनाने की मंजूरी मिलते ही चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। समर्थकों ने पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया।

विजय के समर्थकों का कहना है कि यह तमिलनाडु की राजनीति में नई उम्मीद का संकेत है। सोशल मीडिया पर भी #VijayCM और #TVKGovernment तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।


कैबिनेट गठन को लेकर सस्पेंस बरकरार

कितने मंत्री होंगे शामिल?

हालांकि विजय के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन कैबिनेट में कितने मंत्री शामिल होंगे, इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक सहयोगी दल महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग कर रहे हैं। खासकर वीसीके उपमुख्यमंत्री पद समेत कुछ बड़े विभागों पर नजर बनाए हुए है। हालांकि अभी तक किसी दल ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विजय के लिए गठबंधन को संतुलित रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।


फिर लौटी तमिलनाडु की ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ देखने को मिली। यह स्थिति आखिरी बार 2016 में जयललिता के निधन के बाद सामने आई थी।

इस बार कांग्रेस के विधायकों को हैदराबाद भेजा गया, जबकि TVK विधायकों को चेन्नई के पास मामल्लापुरम के एक रिसॉर्ट में ठहराया गया। इसका मकसद विधायकों को किसी राजनीतिक दबाव से दूर रखना था।


विजय के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?

मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती गठबंधन सरकार को स्थिर रखना होगी। इसके अलावा राज्य की आर्थिक स्थिति, रोजगार, उद्योग निवेश और कानून व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने होंगे।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता को अब प्रशासनिक क्षमता में बदलने की असली परीक्षा शुरू होगी।


निष्कर्ष

तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। विजय को सरकार बनाने की मंजूरी मिलना राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। पहली बार चुनाव लड़कर सबसे बड़ी पार्टी बनने और फिर बहुमत जुटाकर सरकार बनाना विजय के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब सबकी नजर उनके शपथ ग्रहण और नई सरकार के पहले फैसलों पर टिकी है।

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